संत विशोकानंद जी महाराज का आह्वान: 17 वर्ष की उम्र में हो उपनयन संस्कार, 60 के बाद धर्म मार्ग पर बढ़ें आगे

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। श्री सर्व ब्राह्मण सभा के कार्यकारी अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी के काटजू नगर स्थित निवास पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें परम पूज्य आचार्य पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर विशोकानंद जी महाराज ने शिरकत कर समाजजन को आशीर्वचन दिए। इस अवसर पर सभा के पदाधिकारियों व सदस्यों ने संतश्री का चरण वंदन एवं पुष्पहार से आत्मीय स्वागत किया तथा आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
संस्कार और परंपराओं पर जोर:- कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संत विशोकानंद जी महाराज ने ब्राह्मण समाज के उत्थान और पुरातन कर्म परंपराओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर ब्राह्मण को अनिवार्य रूप से शिखा रखना चाहिए। उन्होंने इसके लिए समाजजनों को संकल्प भी दिलाया। संतश्री ने वर्तमान में उपनयन संस्कार को बालकों की शादी के ठीक पहले रस्मअदायगी को गलत ठहराते हुए कहा कि 17 साल की आयु में जनेऊ धारण करना जरूर है।

इनसे पहले स्वागत एवं आरती के पश्चात संतश्री ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति भी दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया।
प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति:- कार्यक्रम में श्री सर्व ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष नरेंद्र जोशी, महिला अध्यक्ष सुनीता पाठक, परामर्शदाता शांतिलाल शर्मा, उपाध्यक्ष राजेश चाष्टा, सुरेश दवे व दुर्गेश सुरोलिया, पत्रकार जलज शर्मा, पीएनबी के नयन सूबेदार, महिला कार्यकारी अध्यक्ष उषा दुबे, उपाध्यक्ष सीमा सुरोलिया, महिला सचिव रजनी व्यास, राधा जोशी, मंजू जोशी, नितिन दवे, रामकृष्ण शर्मा, मनोहर पंड्या, भावना पंड्या तथा प्रवीण आचार्य सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में गृहस्वामी शैलेंद्र तिवारी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूज्य संतश्री के चरण उनके निवास पर पड़ना समस्त परिवार व समाज के लिए अत्यंत सौभाग्य और गौरव का विषय है।

संतश्री के आशीर्वचन के प्रमुख बिंदु रखे:
समय पर उपनयन संस्कार: महाराज श्री ने कहा कि ब्राह्मण बालकों का 17 वर्ष की आयु में जनेऊ (उपनयन) संस्कार होना अनिवार्य है। विवाह के ठीक पहले जनेऊ देने की वर्तमान प्रथा को उन्होंने कुरीति करार दिया।
-शिखा (चोटी) का महत्व: उन्होंने प्रत्येक ब्राह्मण के लिए अनिवार्य रूप से चोटी रखने की बात कही। मौजूदा लोगों से शिखा का संकल्प दिलाया।
-आत्मचिंतन और आत्मशक्ति: संतश्री ने कहा कि देवादिकाल से ही समाज में ब्राह्मणों का स्थान उच्च और महत्वपूर्ण रहा है। कोई राष्ट्राध्यक्ष या प्रधानमंत्री अपने देश के लिए वीजा देने का अधिकार रखता है। इसी तरह संसार के केवल ब्राह्मण में वह शक्ति है जो किसी को भी स्वर्ग का वीजा यानी मोक्ष मार्ग दिला सकता है।
-60 वर्ष बाद धर्म मार्ग: समाज और धर्म के उत्थान के लिए 60 वर्ष की आयु के पश्चात गृहस्थ जीवन के बंधनों को छोड़कर पूर्णतः धर्म की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
