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विजिलेंस कार्रवाई में अनियमितता उजागर, एसएसई पर सख्त कार्रवाई, अकाउंट्स विभाग के 4 कर्मचारियों को भी नोटिस

-रतलाम, दाहोद से लेकर मुंबई तक चला कार्रवाई का सिलसिला।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। Indian Railways के रतलाम मंडल में विजिलेंस कार्रवाई के बाद संबंधित कर्मचारी पर बड़ी कार्रवाई की गाज गिरी है। इनसे जुड़े विभाव के कर्मचारी भी कार्रवाई की चपेट में आए है।
मामला दाहोद रेलवे स्टेशन से जुड़ा है। आरोप की पुष्टि होने के बाद  विजिलेंस मुंबई हेडक्वॉर्टर द्वारा पिछले सप्ताह एसएफ-5 चार्जशीट जारी की। इसके अलावा तबादले सहित और भी प्रतिबंध लगाए गए है। बड़ी बात यह है कि विजिलेंस द्वारा कर्मचारी की कार्रवाई संबंधित आदेश रेल।मंडल के कार्मिक विभाग के भेजा गया। लेकिन इसे अमल में लाने में लापरवाही बरती गई।

यह था पूरा मामला:- दाहोद रेलवे स्टेशन पर कार्यरत SSE (C&W) भरत पुष्कर से जुड़ा यह मामला है। कर्मचारी मई 2026 में विजिलेंस जांच के दायरे में आए थे। ART (एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन) के कैश इम्प्रेस्ट के कथित दुरुपयोग एवं अन्य गतिविधियों को लेकर जांच की गई थी। विजिलेंस ने कार्रवाई के दौरान कम्यूटर सेट सीज किया था। इसमें पिछले 4 साल के कैश इम्प्रेस्ट बिल का डाटा था। विजिलेंस जांच के वक्त गहमागहमी भी हुई। इसमें कर्मचारी ने विजिलेंस को किसी अधिकारी की रिश्तेदारी का हवाला देते धमकाया भी था।
जिस कर्मचारी को दायरे में लिया वह वर्ष 2014 से दाहोद में ही पदस्थ हैं। ऐसे में कर्मचारियों और रेलवे से जुड़े लोगों के बीच प्रशासनिक पारदर्शिता एवं निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। जबकि रेलवे बोर्ड की ट्रांसफर नीति का सख्ती से पालन किए जाने के नियम साफ है।

यह भी हुई करवाई:- सूत्रों के मुताबिक SSE (C&W) भरत पुष्कर पर मुंबई विजिलेंस हेडक्वार्टर से मेजर चार्जशीट जारी कर इसे रतलाम मंडल भेजी गई। कर्मचारी का तबादले के साथ सिफारिश की गई कि केश डिलिंग तथा सेंसेटिव पद पर इन्हें कभी भी नियुक्त नहीं किया जाए।

अकाउंट्स के चार कर्मचारी को भी नोटिस:- मई माह में जब विजिलेंस कार्रवाई हुई, तब संभावना जताई जा रही थी कि जांच की गाज एकाउंट्स विभाग के जिम्मेदारों पर भी गिर सकती है। इस विभाग के कर्मचारी भी कार्रवाई के दायरे में आए। बगैर जांच के बिल पास करने पर अकाउंट्स विभाग के चार कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए है।

कार्रवाई में मंडल अधिकारी सुस्त:- विभागीय सूत्र बताते है कि विजिलेंस हेडक्वार्टर से कार्रवाई आदेश जारी किया गया। इसे मंडल में त्वरित संज्ञान में नहीं लिया गया। बताया जा रहा है कि कार्मिक विभाग में चार्जशीट आदेश जारी होने के बाद अधिकारी द्वारा चार दिन तक कम्यूटर सिस्टम पर इसे खोला तक नहीं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मंडल में विजिलेंस की किसी भी कार्रवाई को लेकर अधिकारी गंभीर नहीं है।

और भी कर्मचारी लंबे समय से पदों ओर आसीन:- सूत्रों के अनुसार कैरिज विभाग में कई कर्मचारी लंबे समय से संवेदनशील पदों पर कार्यरत हैं। इसमें जेई तथा एसएसई स्तर के कर्मचारी शामिल है। ये सभी कर्मचारी रतलाम मंडल के अलग-अलग स्टेशनों पर कार्यरत है।

कैश इम्प्रेस्ट का दबा-छिपा घोटाल:- रेल मंडल स्तर पर किसी भी स्टेशन पर ट्रेन दुर्घटना के मौके आए। तब त्वरित राहत व बचाव के लिए रेलवे ने रतलाम सहित दाहोद, चित्तौड़गढ़, महू सहित अन्य स्टेशनों पर दुर्घटना राहत ट्रेन (एआरटी) की तैनाती कर इनके इंचार्ज नियुक्त किए है। वहीं दुर्घटना राहत चिकित्सा उपकरण (एआरएमई) ट्रेन की रतलाम स्टेशन पर तैनाती की गई। जिन स्टेशनों पर एआरटी के इंतजाम है। इसके रखरखाव सहित छोटे-मोटे उपकरण खरीदी के लिए 12 हजार रुपए कैश इम्प्रेस्ट राशि हर माह स्वीकृत की जाती है। इनकी बिलिंग जांच को लेकर ठोस कार्रवाई है। यहीं वजह है कि दाहोद में विजिलेंस को कैश इम्प्रेस्ट राशि व बिलिंग को लेकर गड़बड़ी उजागर हुई थी।

 

इसलिए भी बढ़ रहा भ्रष्टाचार:- रतलाम मंडल में इंजीनियरिंग विभाग, कार्मिक विभाग, एकाउंट्स विभाग, सीएंडब्ल्यू विभाग, कमर्शियल विभाग, एसएंडटी सहित अन्य प्रमुख विभागों में अभी भी कई खास कर्मचारी टेंडर से जुड़े कामों की टेबलों पर लंबे समय से कार्यरत है। ऐसे में भ्रष्टाचार फलफूल रहा। बल्कि इसका इन्हीं टेबलों में अनियमितता के प्रतिशत का विकेंद्रीकरण हो रहा है। कर्मचारी की पदस्थी के पीछे विभाग प्रमुख का वरदहस्त माना जाता रह है। ये कर्मचारी ठेकेदारों से जुड़े कामों में सीधी मध्यस्थता कर अफसरों की कड़ी है। यहीं वजह है कि आवधिक तबादलों की अवधि पूरी होने पर दिखावे का आदेश जारी किए आते है। असल में टेंडर से जुड़े काम स्वयं उन कमाऊ कर्मचारियों के जिम्मे रहते है। इन मामलों को विजिलेंस का दखल भी बेअसर साबित होता है।

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