रतलाम रेल मंडल में ₹3.06 करोड़ का सफाई टेंडर निरस्त, वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों के बाद रेलवे का बड़ा फैसला
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए जारी एक बड़े टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद रेलवे प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए टेंडर निरस्त कर दिया है।
बता दें कि न्यूज़ जंक्शन-18 वेब चैनल द्वारा ‘रेलवे टेंडर में बड़ा खेल’ शीर्षक से खबर का प्रकाशन किया गया था। इसके बाद रेलवे टेंडर को निरस्त करने का एलान किया गया।
दरअसल ₹3,06,33,663.37 (लगभग 3.06 करोड़ रुपये) की अनुमानित लागत का यह टेंडर गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर बिड संख्या GEM/2026/B/7435981 के तहत जारी किया गया था।
यह टेंडर रतलाम स्थित रेलवे कॉलोनियों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, ड्रेनेज (नालियों) की सफाई और सेप्टिक टैंकों की गाद निकालने (Cleaning and Sanitation Work) जैसे अति-आवश्यक कार्यों के लिए आमंत्रित किया गया था।
नियमों को दरकिनार कर अयोग्य फर्म को L1 घोषित करने के आरोप:- प्रारंभिक चरण में इस टेंडर प्रक्रिया में कुल 20 फर्मों ने भाग लिया था। आरोप है कि रेलवे के संबंधित अधिकारियों ने तकनीकी मूल्यांकन के दौरान तय नियमों और शर्तों को दरकिनार करते हुए एक ऐसी फर्म को योग्य घोषित कर दिया, जो टेंडर की अनिवार्य शर्तों को पूरा ही नहीं करती थी।
वित्तीय मूल्यांकन के बाद इसी अयोग्य फर्म को L1 (सबसे कम बोली लगाने वाली फर्म) घोषित कर दिया गया।
टेंडर की प्रचलित अनिवार्य शर्त:- टेंडर नियमों के अनुसार, बोलीदाता फर्म के पास रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, मेंटेनेंस डिपो, बस डिपो, एयरपोर्ट अथवा किसी केंद्र/राज्य सरकार या PSU के अधीन आने वाले नगर निकाय क्षेत्रों/कॉलोनियों में सफाई व हाउसकीपिंग का स्पष्ट और पर्याप्त अनुभव होना अनिवार्य था।
<span;>शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्म को फायदा पहुँचाने की कोशिश की गई। जिसके बाद मामले की शिकायत वरिष्ठ स्तर पर दर्ज कराई गई। शिकायत में सामने आई अनियमितताओं की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने आखिरकार बिड को निरस्त करने का निर्णय लिया।
अब दोबारा जारी होगा नया टेंडर:- अनियमितताओं के चलते इस टेंडर प्रक्रिया को रद्द किए जाने के बाद अब रतलाम रेल मंडल द्वारा नियमानुसार दोबारा नया टेंडर जारी किया जाएगा। हालांकि, नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने और नई एजेंसी को काम सौंपने में अभी समय लगेगा।
अब देखना यह होगा कि क्या नए टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाती है। तब तक रेलवे कॉलोनियों के निवासियों को बदहाल सफाई व्यवस्था से राहत दिलाने के लिए प्रशासन क्या वैकल्पिक कदम उठाता है।
बदहाल है कॉलोनियों की व्यवस्था:
ढेरों कचरा, बदाहाल नालियाँ:- एक तरफ टेंडर की फाइलों में नियमों का खेल चल रहा था, वहीं दूसरी ओर रतलाम की रेलवे कॉलोनियों में जमीनी हकीकत बेहद बदतर हो चुकी है।
– कचरे का उठान व्यवस्था लचर:- वर्तमान में कार्यरत ठेकेदार/फर्म द्वारा कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। कई-कई दिनों तक कचरा उठाने ट्रैक्टर ट्रॉली नहीं पहुँच रहे हैं।
– स्वास्थ्य पर संकट:- जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। नालियाँ जाम हैं। जिससे कॉलोनियों में भयंकर बदबू और बीमारियों के फैलने का खतरा बन गया है।
– कर्मचारियों में आक्रोश:- रेलवे आवासों में रहने वाले रेल कर्मचारी और उनके परिजन लगातार इस कुप्रबंधन से परेशान हैं। वर्तमान ठेका एजेंसी के ढुलमुल रवैये से भारी असंतोष व्याप्त है।
बता दें कि रेलवे में डेवलपमेंट सिविल वर्क्स को लेकर किए जा रहे टेंडर एवं भुगतान में जमकर अनियमितता के तगड़े खेल चल रहे है। इससे रेलवे राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है। वही मोटे खर्च के बावजूद भ्रष्टाचार व कमीशनबाजी के चलते रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर दोयम दर्जे के निर्माण की भेट चढ़ रहा है। इसे लेकर न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा नियमित खबर का प्रकाशन कर इंजीनियरिंग विभाग के आला अधिकारियों को जल्दी ही भ्रष्टाचार को बेपर्दा कर कमीशनबाजी के चैनल को सार्वजनिक किया जाएगा।
