न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे जोन के अंतर्गत रतलाम यात्री आय के मान से NSG-2 श्रेणी (पूर्व में A-1 श्रेणी के समान) में शामिल है। लेकिन यहां स्वच्छता के लचर इंतजाम यात्री सुविधाओं पर भारी पड़ रही है। जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते गंदगी का फालूदा बना हुआ है। ट्रैक पूरा गंदे पानी से लबालब है। तकरीबन नाले की ही शक़्ल ले ली है। जबकि प्लेटफॉर्म पर डस्टबीन भी समय पर खाली नहीं किए जा रहे। ऐसी समस्याएं बीमारियों को शुद्ध रूप से आमंत्रण है।
दूसरी ओर मानसून दस्तक की आमद सिर पर है। लेकिन अभी नालों की सफाई का काम भी पूरा नहीं हुआ। मैकेनिकल व इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मेदार निंद्रा का शिकार है। पूरा सिस्टम कमीशनखोरी से घिरा है। लापरवाही का खामियाजा बारिश के दिनों में ट्रैक ओवरफ़्लो के रूप में भुगतना पड़ेगा। इससे यात्रियों को समय पर गंतव्य तक पहुंचना बड़ी चुनौती रहेगा। शनिवार को सुबह 20 से 25 मिनिट की बारिश से ही ट्रैक भर आया था। मामले में डीआरयूसीसी मेंबर अनिल उपाध्याय ने कहा कि रेलवे प्रशासन को ठेकेदार फर्म से टेंडर शर्तो के मुताबिक सख्ती से सफाई का काम लेना चाहिए। साथ ही मानसून पूर्व स्टेशन के आसपास के नालों की सफाई जरूरी है। इधर, स्टेशन के जिम्मेदारों का कहना है कि नालों की सफाई शुरू हुई है।

यह समस्या सुलभ इंतजामों के आड़े है:-
-रेलवे स्टेशन पर सफ़ाई का ठेका आरआर इंटरप्राइजेज का है। फर्म को रेलवे की ट्रेंडर शर्तों के लिहाज़ से काम करना है। लेकिन बायोमेट्रिक प्रेजेंट सिस्टम सहित पेनल्टी के फार्मेट से परेशान फर्म अब काम छोड़ना चाहती है।
– टर्मिनेट की दरख्वास्त के चलते मैकेनिकल विभाग के अधिकारी फर्म के साथ मनौव्वल की भूमिका निभाने लगे।
– प्लेटफॉर्म नंबर 4 का ट्रैक धंसना भी सफाई में बड़ी बाधा है। नालियां जाम होने से पानी ट्रैक पर जमा हो रहा है। बदबूदार माहौल के साथ ही मच्छर व मक्खियां पनपने की समस्या बढ़ गई है।
ये विभाग जिम्मेदार:- रेलवे स्टेशन पर ट्रैक धुलाई, प्लेटफॉर्म सफाई, सर्कुलेटिंग एरिया तथा ऑफिस की सफाई का टेंडर मैकेनिकल विभाग के अधीन है।
दूसरी ओर मानसून पूर्व नालों की सफाई का काम इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मे है। प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर ट्रैक एडजस्टमेंट का काम भी इसी विभाग के जिम्मे है।
