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सेटिंग की बेटिंग….बड़े नेता के इशारे पर की गई जमावट, अब पदोन्नति भी मिल जाएगी?

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे के कूपमण्डूक सिस्टम में अगर कर्मचारी संगठन के नेताओं का वरदहस्त रहे। ऊपर से अधिकारियों की मेहरबानी बरसे। तब कुछ भी अवैधानिक काम को नियमों के दायरे में लाकर इसे आसानी से पूरा करना या अंजाम तक पहुंचाना संभव है।
ऐसा ही मामला दुष्कर्म के आरोपी रहे ट्रैकमैन अजहर को लेकर सामने आया है। अजहर पर पुलिस प्रकरण दर्ज है।ढाई माह से वह अपसेन्ट रहा है। इसके बाद भी बैकडोर एंट्री करवाकर ज्वाइन करवा दिया गया। एक दिन बाद वह छुट्टी भी चला गया। यह केवल अज़हर को असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा में शामिल कराने की जुगत की आशंका के चलते हुआ है। इसमें रेल संगठन से जुड़े एक बड़े नेता के हस्तक्षेप, अधिकारियों पर दबाव व नियम-काग़ज़ों की आड़ का खेल भी सामने आया है। अधूरी पुलिस कार्रवाई के बावजूद इसे पदोन्नति भी दे जी जाए तो भी बात आश्चर्यजनक नहीं रहेगी।
बता दें कि आरोपी अजहर खान को लेकर महिला के परिजनों की सूचना व पीड़िता की शिकायत पर स्टेशन रोड पुलिस थाना में 30 जून को प्रकरण दर्ज किया था। इसी मामले को लेकर उसके साथ डीआरएम ऑफिस के बाहर मारपीट भी हुई।

एक के लिए रास्ता आसान, दूसरे कर्मचारी परेशान:- कर्मचारियों से जुड़े ऐसे कई विभागीय छोटे-बड़े मामले रहते है। इसमें आम कर्मचारियों को ज्वाइन होने, सिक लेने या अन्य किसी भी काम के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने के बावजूद कई दिनों तक परेशान किया जाता है। बड़ा सवाल है कि अफ़सर एक आरोपित कर्मचारी पर इतने मेहरबान क्यों और कैसे हो गए।
ट्रैकमैन अजहर बकायदा परीक्षा के एक दिन पहले दाहोद अस्पताल से फिट सर्टिफिकेट लेकर ज्वाइन होने मंडल कार्यालय आया। इसके इंचार्ज एसएसई नार्थ राजेंद्र शर्मा से संपर्क किया। इसके बाद सूचना इंजीनियरिंग विभाग के निचले अधिकारी के माध्यम से विभाग प्रमुख सीनियर डीईएन कोर्डिनेशन पीयूष पांडे तक पहुंची। निचले अधिकारियों को निर्देश मिले कि अजहर से लिखवाकर फ़ौरन ज्वाइन करवा दिया जाए। इसके बाद अजहर 21 सितंबर को ज्वाइन हुआ। पूर्व जमावट के मुताबिक इसे असिस्टेंट लोको पायलट की विभागीय परीक्षा में शामिल होने का भरपूर मौका दिया गया। तुरंत बाद वह सिक पर उतर गया। ऐसे में विभाग के नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

जोन स्तर के कर्मचारी संगठन के बड़े नेता का दखल:- पूरे मामले में यह भी सामने आया है कि इस मिलीभगत में पश्चिम रेलवे जोन स्तर के कर्मचारी संगठन के एक बड़े नेता का दखल रहा है। दरअसल अज़हर इसी सांठगांठ के बूते पर करीब डेढ़ साल पहले बड़ौदा से रतलाम तबादला होकर आया था। ताज़ा मामले में भी उसी नेता से लिंक मानी जा रही है। इसके दबाव के चलते अधिकारियों ने गंभीर मामले में आरोपित कर्मचारी को आगे बढ़कर ज्वाइन कराया। सांठगांठ के चलते इसे असिस्टेंट लोको पायलट की परीक्षा दिलवाई गई। बड़ी बात नहीं कि इसे परीक्षा में पास करवाकर कैडर भी बदल दिया जाएगा।

इसलिए भी उठ रहे सवाल

:- मीडिया की सुर्खियों में रहने के बाद भी विभाग के अधिकारियों को अपने ही विभाग के कर्मचारी के दुष्कर्म के प्रकरण की ढाई माह तक जानकारी न लगी।
-कोई कर्मचारी लंबे समय तक बीमार अवस्था में अनुपस्थित रहे। इस पर वह मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर सूचना देता है। यदि ट्रैकमैन ने सूचना भी दी तो अफसरों ने गंभीर चोंट के बारे में पड़ताल क्यों नहीं करवाई।
-डीआरएम ऑफिस के ठीक नजदीक ट्रैकमैन के साथ दुष्कर्म मामले को लेकर मारपीट हुई। इसकी जानकारी कार्यालय के लगभग सभी कर्मचारियों को हुई। फिर अफ़सर इसे लेकर अनजान क्यों बने रहे।
-ट्रैकमैन पर दुष्कर्म जैसे आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद इसे इंजीनियरिंग विभाग द्वारा नोटिस जारी नहीं किया। हालांकि इससे लिखवाया गया कि उसके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला नहीं है।
-इसी मामले में स्टेशन रोड थाना प्रभारी स्वराज डाबी द्वारा अब कार्रवाई की जा रही है। सवाल यह भी है कि ट्रैकमैन द्वारा लिखित में देने के बाद पुलिस से प्रकरण संबंधित दस्तावेजी सूचना आएगी। तब गलत जानकारी देने पर ट्रैकमैन पर कार्रवाई की जाएगी?

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