मेंटेनेंस नहीं किया तो बिल पास नहीं….अफसरशाही की मजबूरी में दबा ठेकेदार, कुछ माह पहले लगे फर्श पर ही लगा दी टाईल्स

-बांगलानुमा क्वार्टर नंबर 948 फरवरी में ही कराई थी पुख्ता मरम्मत।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम मंडल मुख्यालय पर कुछ साल के लिए नियुक्त रेलवे अफ़सर के निवास में रैनबसेर के लिहाज़ से शासकीय तौर पर पर्याप्त इंतजाम रहते है। बावजूद ये अपने प्रभाव के बूते पर अपने बसेरे को लक्झरी बंगले की शक्ल देने में आमादा है। कमीशनखोर सिस्टम के बीच रेल आवासों के नाम पर शासकीय धन का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है।
यह कहानी रेलवे कॉलोनी रोड नंबर एक स्थित बंगलानुमा क्वार्टर नंबर 948 तथा इसमें रह रहे तमाम बिल पास करने वाले लेखा विभाग के सहायक मंडल वित्त प्रबंधक (एडीएफएम) कृष्ण कुमार से जुड़ी है।

इस क्वार्टर की बात करें तो पिछले दिनों यानी फ़रवरी 2024 में ही इसका पुख्ता मेंटेनेंस किया गया था। तब आईओडब्ल्यू के इंजीनियरों पर दबाव था कि वे बंगले की मरम्मत नहीं करेंगे तो बिल पास नहीं किए जाएंगे। ताबड़तोड़ मेंटेनेंस शुरू कर दिया गया था। इसमें फ्लोरिंग के लिए पत्थर लगाए गए थे। यहीं कहानी इस बार भी दोहराई गई।
बताया जा रहा है कि इस बार भी ठेकेदार का भुगतान बिल पेंडिंग रखा गया। अधिकारी द्वारा दबाव बनाया कि यदि क्वार्टर पर बाहर से लेकर पीछे तक टाईल्स लगवाओगे, तभी बिल पास किया जाएगा। बेचारे ठेकेदार पर ‘मरता क्या नहीं करता’ की कहावत चरितार्थ हो गई। मज़बूरन पिछले साल फ्लोरिंग पर लगाए पत्थर के ऊपर दोबारा से टाईल्स चढ़ाकर लगाई गई। बीच बचाव में एईएन द्वारा मध्यस्थता किए जाने की बात भी सामने आई है।

क्वार्टर की किस्मत चमकी:- पिछले डेढ़ साल में इस बंगलेनुमा क्वार्टर की जैसे किस्मत की बदल गई। क्योंकि अभी भी रेलवे कॉलोनी के सैकड़ों क्वार्टर ऐसे है, जिनमें मेंटेनेंस को लेकर जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं। बारिश में हालात और भी बदतर होना तय है।
लेकिन क्वार्टर नंबर 948 अधिकारी के हाथ लगने से इसका पूरा कायाकल्प कर दिया गया। दरअसल पहले इसमें रेलवे अस्पताल में पदस्थ डॉ. अभिषेक जोशी रहते थे। इसलिए पहले से ही पर्याप्त सुविधाएं थी। इसके बाद मुंबई से तबादला होकर आए लेखा विभाग के अधिकारी एडीएफएम कृष्ण कुमार को यह आबंटित हुआ। इसके बाद इसे और भी सुविधायुक्त व सुरक्षित बनाने का क्रम शुरू कर दिया गया। रंगाई-पुताई के अलावा टॉयलेट व वॉशरूम तक की टाईल्स बदल दी गई। लोहे की एंगलनुमा बाउंड्रीवाल भी बनाई गई। उसी दौरान बाउंड्रीवाल के अंदर कोटास्टोन पत्थर से फ्लोरिंग तैयार किया गया था। अब इसके ऊपर भी टाईल्स लगा दी गई।
इधर, रेलवे पीआरओ का कहना रहता है कि रेलवे में नियमों के तहत काम किए जाते है।
