फ़ोटो प्रथम- नीमच में जीत के बाद प्रत्याशियों के स्वागत।
-रतलाम मंडल की 10 में से 5 सीटों पर कब्ज़ा, रतलाम में हार का मंथन
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। इंस्टीट्यूट चुनाव में मंडल मुख्यालय पर हार का सामना करने वाले रेल संगठन वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ को मंडल की अन्य 5 सीटों ने ऑक्सीजन देने का काम किया है। 10 में से 5 सीट पर कब्जा जमाकर वहां के उम्मीदवारों ने मंडल मंत्री अभिलाष नागर सहित अन्य पदाधिकारियों की निराशा को उबारने का काम किया है। रतलाम में अब हार को लेकर पदाधकारियों में चिंतन-मंथन का दौर शुरू हो गया है। पदाधिकारियों के समझ नहीं आ रही है कि नतीजे उम्मीद के विपरित कैसे आ गए। दूसरी ओर मजदूर संघ से जुड़े कर्मचारियों का मानना है कि कहीं न कहीं उम्मीदवार चयन को लेकर बड़ी गलतियां हार की वजह बनी है।
दरअसल रतलाम में सीनियर एवं जूनियर इंस्टीट्यूट में सचिव पद के लिए क्रमश: बापी चौधरी, अरविंद शर्मा तथा कोषाध्यक्ष पद के लिए दीपक गुप्ता तथा दिनेश छपरी की हार ने मजदूर संघ का चुनावी जायका खराब कर दिया। जबकि महू में दोनों सचिव और कोषाध्यक्ष पद पर और उज्जैन में एक सचिव की सीट पर उम्मीदवारों की जीत ने मजदूर संघ में संजीवनी फूंकी है। मंडल के पांच इंस्टिट्यूट में तीन सचिव एवं दो कोषाध्यक्ष विजयी रहे है l
रतलाम के पदाधिकारी बताते हैं कि चुनाव के पूर्व मंडल मंत्री अभिलाष नागर द्वारा पूरा मैनेजमेंट अपने हाथों में लेकर महू, नीमच एवं उज्जैन में कमान संभाली थी। प्रत्याशियों के समर्थन में खूब प्रचार भी किया। इसके फलस्वरुप रतलाम के अतिरिक्त 5 सीट में जीत हासिल की। यह उनके कुशल नेतृत्व का परिणाम माना जा रहा है। दूसरी ओर मंडल अध्यक्ष प्रताप गिरी भी रतलाम में आधारभूत तैयारियों के अलावा मंडल स्तर पर तालमेल में जुटे रहे। रतलाम में
हालांकि रतलाम में जूनियर इंस्टीट्यूट में भी कांटे का मुकाबला रहा। परंतु सीनियर इंस्टीट्यूट में प्रत्याशियों को बड़े अंतर से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

फ़ोटो द्वितीय- महू में जीत के बाद प्रत्याशी।
शनिवार सुबह से चिंतन-मनन का दौर
इधर, हार के बाद सुबह से ही पदाधिकारियों में चिंतन-मनन का दौर शुरू हो गया। फोन पर चर्चा कर हार की खामियों को खोजा जा रहा है। हार के बाद संगठन में मंडल व निचले स्तर की बॉडी में फेरबदल की अटकलों को जोर मिलने लगा है। दरअसल हार के पहलू में रतलाम के चुनिंदा प्रत्याशी के चयन की चूक भी मानी जा रहीं है। प्रत्याशियों के अलावा संगठन के अन्य पदाधिकारियों की निष्क्रियता का खामियाजा भी मजदूर संघ को उठाना पड़ा। माना यह भी जा रहा है कि एम्प्लॉइज यूनियन के उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने के बाद से शेड्यूलवार जनसंपर्क के लिए व्यस्त रहते हुए भागते रहे। जबकि मजदूर संघ के चारों उम्मीदवारों की एक-दूसरे पर निर्भरता रही। यह सघन जनसंपर्क में तब्दिल नहीं हो सकी। जनसंपर्क के लिए पर्याप्त समय भी नहीं निकाला जाना हार की वजह माना जा रहा है।
मान्यता व जेसी बैंक के चुनाव चिंता का विषय
इंस्टीट्यूट चुनाव में हार के बाद आगामी ट्रेड यूनियन की मान्यता तथा जेसी बैंक के चुनाव मजदूर संघ के पदाधिकारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। गुटबाजी के दीगर अब संगठन की मजबूती को लेकर कार्ययोजना बनाने को लेकर भी बातें निकलकर आ रही है। इसके लिए जल्दी ही यहां मुख्यालय से बड़े पदाधिकारी का दौरा संभावित है।
