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कार्रवाई की दहलीज पर करतूत…दिए बयान और दस्तावेज जांच में अंतर, कमर्शियल क्लर्क को फिर बुलाया हेडक्वार्टर

-कार्रवाई में असहयोग के चलते विजिलेंस ने अब कार्रवाई को दी गति
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे कमर्शियल विभाग में क्लर्क की मनमानी को लेकर विजिलेंस में शिकायत के बाद जांच में असहयोग से ख़फ़ा विजिलेंस अब और सख़्त हुई है। इसे लेकर कमर्शियल क्लर्क को दो दिन के लिए हेडक्वार्टर तलब किया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अब विजिलेंस कार्रवाई के लिए तैयार की जा रही रिपोर्ट को जल्दी ही मंडल मुख्यालय भेजेंगी। इसके बाद विभाग को संबंधित पर कार्रवाई की जाना तय है। हालांकि विभाग द्वारा क्लर्क को बचाने के भी भरसक प्रयास किए जा रहे है। लेकिन डीआरएम की प्रशासनिक सख्ती के चलते कार्रवाई को रोकना मुश्किल माना जा रहा है।

मालूम हो कि कमर्शियल क्लर्क की टिकिट चेकिंग सहित अन्य सेक्शनों में ट्रांसफर व प्रमोशन में धांधलियों को लेकर एक माह पूर्व रेलवे बोर्ड स्तर पर शिकायत पर विजिलेंस टीम रतलाम पहुंची थी। तब जांच में क्लर्क द्वारा असहयोग के बाद विजिलेंस टीम द्वारा कुछ दिनों इंदौर में डेरा डाला था। कुछ ट्रांसफर प्रमोशन के जारी किए गए आदेशों की जांच की गई। वहीं कुछ तबादला होकर इंदौर पहुंचे टीटीई से मौखिक बयान व जानकारियां भी ली थी।

बयान व दस्तावेज जांच में अंतर को देखते तलब

विभागीय सूत्र बताते है कि इंदौर सहित अन्य स्टेशनों पर जांच के बात कुछ गड़बड़ियां विजिलेंस के हाथ लगी है। जबकि क्लर्क से पूछताछ में दी गई जानकारियों में भिन्नता पाई गई। इसे देखते क्लर्क को एक बार फिर मुख्यालय तलब किया गया। बताया यह भी जा रहा कि इस सप्ताह क्लर्क को दो दिन के लिए मुंबई बुलवाया गया। इसमें एक बार फिर से कड़ी पूछताछ की गई।

तबादलों में ऐसे की गई गड़बड़ियां

दरअसल रेलवे प्रकिया में हर चार साल में पिरियोडिकल तबादलें के नियम है। सेंसेटिव पोस्ट पर तो हर संभव चार साल की अवधि उपरांत तबादला जरूरी है। कमर्शियल विभाग में जिन चेकिंग, रिजर्वेशन सहित अन्य कर्मचारियों के तबादलें किए गए। उनमें से अधिकांश ने बच्चों की पढ़ाई सहित चिकित्सा उपचार का आधार बनाकर फिर से मूल स्टेशन पहुंचने की जुगत जमा ली। जैसे चेकिंग कर्मचारी का इंदौर से रतलाम तबादला किया गया था। इसे मेडिकल आधार की आड़ में फिर से इंदौर (घर) भेज दिया गया था।

तबादलें करने वाले स्वयं चार साल से ज्यादा समय से डटे

रेलवे के अन्य विभागों में हाल ही में पिरियोडिकल तबादलें किए गए। इनके रिलीविंग की कार्यवाही प्रकियाधीन है। कमर्शियल विभाग में ट्रांसफर प्रमोशन की टेबल पर क्लर्क भी चार साल से अधिक समय से कार्यरत है। पूर्व में यहां कार्यरत रहे सीनियर डीसीएम सुनील कुमार मीणा ने अनुभवहीन व जूनियर होने के बावजूद क्लर्क को टिकिट चेकिंग, बुकिंग सहित अन्य सेक्शनों के ट्रांसफर प्रमोशन प्रकिया जैसी अहम टेबल पर बिठाकर जिम्मेदारी सौंप दी गई। यही वजह है कि क्लर्क द्वारा आदेश व फाइलों की अफरा-तफरी में महारथ हासिल कर ली। इसके बाद अन्य पूर्व सीनियर डीसीएम प्रतिभा पाल ने भी क्लर्क की कुशलता को देखते काम करवाना जारी रखा। इसकी आड़ में क्लर्क को कर्मचारियों से मिलीभगत का भरपूर मौका मिल पाया।

सीसीटीसी में मर्ज प्रकिया के बाद बढ़ी अनियमितता

रेलवे कमर्शियल में पूर्व में चेकिंग कर्मचारियों से केवल टिकिट चेकिंग ही करवाई जाती थी। पिरियोडिकल तबादलें के बावजूद कर्मचारियों को स्लीपर, स्टेशन चेकिंग या स्पेशल चेकिंग में केवल टिकिट चेकिंग का ही काम था। वर्ष 2018 के बाद रेलवे बोर्ड द्वारा सीसीटीसी भर्ती में पदों का मर्जिकरण किया गया। चेकिंग कर्मचारियों को बुकिंग व पार्सल में भी भेजे जाने के प्रावधान किए गए। इसके बाद से कमर्शियल क्लर्क की मान मुनव्वर का दौर शुरू हुआ और स्वतः अनियमितता की गुंजाइश बनने लगी। नई भर्ती के कर्मचारी टिकिट चेकिंग में रहने की मंशा के चलते जोड़तोड़ की जुगत में लग गए। इसका क्लर्क द्वारा भरपूर लाभ उठाया गया।
मामले में रेलवे पीआरओ खेमराज मीणा का कहना है कि विजिलेंस की कार्रवाई गोपनीय रहती है।

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