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मैं और मेरी कविता

नव वर्ष, नई उमंग, नए विचार, नया लक्ष्य… जी हां, इन्हीं उद्देश्यों को लेकर हम सभी ने नए वर्ष 2024 में प्रवेश किया है। कुछ पीछे रह गया… कुछ उम्मीदें भी बंधी है। सपनों को साकार करने का वर्ष है यह…। जीवन को बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता का भी वर्ष है…। उम्मीद यह भी है, हमें आत्मविकास, आत्मप्रेरणा के लिए प्रेरित करेंगा…। ताकि हम अपनी क्षमताओं का पूरा प्रयोग कर सकें…। सफलता के शिखर तक पहुंच सकें। आप सभी का नूतन वर्ष में अभिनंदन। हमें नए साल से जुड़ी कई कविताएं प्रेषित की गई। इसमें से श्रेष्ठ रचनाओं को प्रस्तुत कर रहे हैं।

जलज शर्मा
संपादक, न्यूज़ जंक्शन-18
मोबाइल नंबर 9827664010
रतलाम।

रचनाओं के चयनकर्ता
संजय परसाई ‘सरल’
मोबाइल नंबर 9827664010
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नया साल

आ गई है रात बीती, फिर नया यह साल है।
प्राची उतावली हो रही, खुशियों का लेकर थाल है।

बिसार दें आप बीती, भविष्य में सदा ध्यान दें।
त्रुटियाँ हमसे हुयीं, फिर उसको नहीं दोहराना है।

राग-द्वेष दिल से मिटाएँ, अपना समझ कर्त्तव्य ये।
करुणा-दया की निर्झरी, दिल से सदा बहानी है।

संस्कृति क्षरित हो रही, रखना उसे संभाल के।
मानवता सदा कायम रहे, सबसे बड़ा ये धर्म है।

स्वार्थ के आगे कभी, झुकना नहीं ये जान लें।
अपना-पड़ोसी-राष्ट्र का, रखना सदा ही ध्यान है।

सुस्वास्थ्य-सुख-सम्पन्नता, विश्व में सबको मिले।
कष्ट न पाए कोई, प्रभु रखना सभी का ध्यान है।

आ गया है रात बीती, फिर नया यह साल है।
प्राची उतावली हो रही, खुशियों का लेकर थाल है।

-डॉ. शशि निगम, इन्दौर
(मप्र)।
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नूतन वर्षाभिनंदन

गुज़र गया कैलेंडर का एक और वर्ष,
यादों के उतार चढ़ाव भरे सफर की तरह |

कुछ खूबसूरत पल ठहरे है अब भी ,
कुछ यादें ठहरी मुसाफिरों की तरह |

लम्हा लम्हा वक्त फिसला ,
बंद मुठ्ठी से सरकती रेत की तरह |

संकल्पों को पूरा करते रहे कुछ इस तरह
क्या पाया क्या खोया हिसाब नहीं गणित की तरह |

कुछ मोड़ मुड़ गये, कुछ बिछुड़ गये ,
कुछ साथ रहे हरदम साये की तरह |

वक्त की खामोशियों के नश्तर भी चुभे,
हौंसले फिर भी रहे साथ मरहम की तरह |

ख्वाहिशों के फूल सूख गये किताबों में,
उम्मीदें खिली शूलों पर गुलाबो की तरह |

नये साल के नये सफर की नई उम्मीदें,
यादों को सहेज रखे गठरी की तरह |

नूतन वर्षाभिनंदन ,नव प्रभात, नव सृजन,
नई आशाओं से करें स्वागत उत्सव की तरह |

-डॉ. गीता दुबे
(से.नि. प्राध्यापक)
रतलाम (मप्र)।
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क्या खोया, क्या पाया

भागती दौड़ती
जिंदगी है
समय है
वर्ष है
या
हम खुद रुकने को
तैयार नहीं है…..
60 बसंत गुजरे
दौड़ते भागते ही….
गिनती दर गिनती में
2023 भी थकहार कर
रुक ही गया…..

और हम है कि थमने को
राजी ही नहीं…..हैं
सोचें क्या लिया…क्या दिया
2023 ने हमसे….
और
क्या लौटाएंगे
2024 को हम…
वैसे पलटकर देखना उचित नहीं होता…
पर भविष्य तो बाहें
फैलाये खड़ा है…..
आओ
इस वर्ष…..

भूखे का निवाला बनें
तो मुस्कुराने की वजह भी…
होंगे नए दोस्त बहुतेरे….
पर पुरानों के साथ
टापरी पर कुल्हड़ चाय का
चस्का जरूर हो….
परपीड़ बांटे न बांटे…..पर
हम वजह तो न ही हों ….

न हो कोई तेइस की कोई टीस….
हर्ष उल्लास आरोग्य से भरपूर रहे ये चौबीस….

शुभकामना….

-मयूर व्यास
रतलाम (मप्र)।
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नया प्रण

वो एक पुराना बरस, बस बीत गया,
यादें धुंधली हुई, मन कुछ रीत गया,
वक्त रूकता नहीं, ये किसी के लिए,
कल जो हारा हुआ था, वो जीत गया।

नवल वर्ष का अब, हुआ शुभ आगमन,
खुश हैं कलियां बड़ी, खुश है‌ अब चमन,
खोल दो द्वार दिल के, अब जरा साथियों,
नई लग रही है धरा, नई बह रही है पवन ।

मन की गहराइयों का, अब लगा लो पता,
तन की परछाइयों से, अब करो ना खता,
अपने इन वादों से, अब तुम मुकरना नहीं,
शोख भंवरों को, अब माफी कर दो अता ।

लो अब नया प्रण, तुम इस नए साल में,
करना खूब मेहनत, तुम हर एक काम में,
ध्यान रखना चरणों में, तुम मां-बाप के,
सफल होगा जीवन, इस नए साल में ।

-हेमलता शर्मा ‘भोली बेन’
इंदौर (मप्र)।
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जो बीत गया वो कल था…

कुछ हाथ गहा,कुछ फिसल गया, कुछ देख लूँ मुठ्ठी में,क्या नवरूप धरा,कभी देखूँ अनागत की किरणें सुनहली,कभी कुछ सिसकती कसक रही मन की।

कैलेंडर के पन्ने फड़फड़ाए, दिन, सप्ताह, महीनों संग बरस 2023 बीत गया और वर्ष 2024 के स्वागत के लिए तैयार हैं हम इक विश्वास,उल्लास और उमंग के साथ।
नव वर्ष के नवकिसलय,कोमल चिकने पात नर्तन कर रहे हैं ।गत बारह मास के तीन सौ पैंसठ पन्ने अलग-अलग रंगों और इबारतों से भरते रहे अब समय है-
आत्मावलोकन -आत्ममूल्यांकन का, कुछ संकल्प धार, कुछ योजनाएँ रच उन्हें अपने अंदर उतारने और पूरी ईमानदारी, समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ उन्हें क्रियान्वित करने का,नवल गात ,नवल गान संग नवल प्राण रचने का।
और तब सूखे पत्तों से झरती बूंदों से आगत के स्वप्न फिर झरेंगे, नवांकुर फिर प्रस्फुटित होंगे, अंधेरे की चादर बेध, नवविहान की किरणें फिर चहुँदिक् फैलेंगी, नववर्ष के नवविहान का हम पुनः स्वागत करेंगे
‘आ रही रवि की सवारी’ नवकिरणों से सजी रवि की सवारी का उन्मुक्त हृदय से स्वागत,अरुणोदय!
अतीत के अंक से उदित नवविहान!यह आनंदमय वरदान ही तो है!
नवल गात, नवल दृष्टि!नव आशा,नवोत्साह,नवोल्लास,
सज्जित मन-मानस ,इंद्रधनुष सजा सजीला आसमां! हर रंग गढ़ता इक सुंदर संसार रचेगा।
‘सर्वे भवंतु सुखिनः,सर्वे संतु निरामया’ को फलीभूत करते रंग फिर खिलेंगे।’वसुधैव कुटुम्बकम्’ का मंत्र उचारते रंग फिर निखरेंगे । ‘त्यक्तेन भुंजीथा’ को जिदंगी के कैनवास पर  फिर चित्रित करेंगे!’अहिंसा परमो धर्मः’ को मनसा, वाचा,कर्मणा से हम फिर साकार करेंगे!’सबका मंगल, सबका मंगल होय  रे’ चहुँओर गुंजित होगा!पर्वत ,पंछी, नदियों, कूप,वन,वाटिका ,उपवन सरसाते रंग फिर दृष्टगोचर होंगे!’पुरुषार्थी पुरुषं उपैति लक्ष्मी’ हृदय धार ,राष्ट्र को उन्नति पथ पर हम निरंतर प्रशस्त करते रहेंगे।
ईश से करबद्ध प्रार्थना यही कि नैनों में उतरे ये स्वप्न सच हो जाएँ। नववर्ष का हर दिन देवभूमि पर प्रसृत दिनकर रश्मियों से सजा रहे, हर आँगन धूप खिली रहे, हर जन-मन में आनंद उर्मियाँ अलकनंदा सी अठखेलियाँ करती रहें,जीवन सदा उजाले से तरलता को पाता रहे।महकती, चहकती, खिली, चुलबुली शरद की निशा सी हर निशा मुसकाती रहे।बस हिय इक भाव है इस बरस ‘दो हजार चौबीस ‘ में स्वर्ग धरा पर उतर आए।सूरज खुशियों पोटली खोल दे और
खिलखिलाहटों -कहकहों
का हर दिशि नाद हो
बासंती बसंत बारहमासी हो
बगिया के फूल सदाबहारी हों
रंग केसरिया, सफेद, हरा
त्याग, शांति, समृद्धि लिए
जगत को प्यारा हो
नव बरस सतरंगी हो

-यशोधरा भटनागर
देवास (मप्र)।
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गीत

कोई खड़ा है द्वार पर

जा रहा कोई मगर
कोई खड़ा है द्वार पर।
वक़्त की दहलीज़ फिर से
तू यहां पर पार कर।

कल नया सूरज नई उम्मीद लेकर आएगा,
देखते ही देखते वह
वक़्त पर छा जाएगा।
फिर नया पंचांग होगा कल इसी दीवार पर।
वक़्त की दहलीज़ फिर से
तू यहां पर पार कर।

दे गया दु:ख-दर्द, पीड़ा और कल बीता हुआ,
आ गया उम्मीद लेकर सामने इक पल नया।
सोचना होगा खुशी के असीमित विस्तार पर।
वक़्त की दहलीज़ फिर से
तू यहां पर पार कर।

आज करना है तुझे तो आज ही कुछ कर गुज़र,
कल कहां होगी किसी को आज की थोड़ी ख़बर ।
यह शनिचर फिर न लौटेगा किसी इतवार पर।
वक़्त की दहलीज़ फिर से
तू यहां पर पार कर।

-आशीष दशोत्तर
रतलाम।
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बीता साल

दिन बीते और माह गुजरा
गुजर गया पूरा ही साल।
कोई लड़े रोटी के खातिर
कोई हुआ है मालामाल।।
कहीं छूटा अपनों का साथ।
बेकारी धरे हाथों पे हाथ।।
अपनी किस्मत ने खुद को लूटा।
मुंह का कौर हाथों से छूटा।।
धूप छांव में गुजरे दिन।
कभी खुशी तो कभी दूर्दीन।।
दुख सुख में आए संगी साथी।
सुखे दीये में भीगी सी बाती।।
बुरा समय ना वापस आए।
नया साल सौगातें लाए।।

-दिनेश बारोठ ॓दिनेश’
सरवन जिला रतलाम।
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नववर्ष

नववर्ष है तुम्हारा स्वागत ।
तुम आओ आज मुस्कुराकर ।
भर दो हम सब के जीवन को,
नई -नई खुशियों से सँजाकर ।
मन की हर आशा पूरी हो,
जिदंगी की हर कहानी पूरी हो ।
मेरे मन में नए -नए विश्वास जगाना तुम।
मेरे दामन में भी एक खुशी का ,
फूल गिराना तुम।
सभी के जीवन को प्यार से भर दो।
आज हर किसी के दिल के
तरंगो को मचलने दो॥
सभी को प्यार भरा तोहफा देकर
हर दिल में नई -नई आशा जगाना तुम॥
हर संकट दूर हो, नववर्ष मगंलमय हो॥

-निवेदिता सिन्हा,
भागलपुर (बिहार )।

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