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FLASHBACK…. दिलों पर राज किया, अपनों के बीच राजू बन गया राजेंद्र, गुणवत्ता को ही कर्म को आधार माना, संगठन ने बनाया उम्मीदवार

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। अपने सफल जीवन को गुणवत्ता का आधार मानते हुए कर्म करने वाले राजेंद्र चौधरी ने कड़ी मेहनत से रेलवे की नौकरी हासिल की। उसी गुणवत्ता के मुताबिक इन्होंने वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ जैसे संगठन को चुना। इनका यह चयन कर्मचारी सेवा के लिहाज से पूरी तरह से उपयुक्त रहा। यहीं वजह है कि इसी संगठन से इन्हें जेसिस बैंक में उम्मीदवार बनने का मौका दिया गया।
दरअसल अपनी कर्मठ, ईमानदार और जमीनी कार्यकर्ता की छबि के चलते अल्प समय की लीडरशीप से वह पा लिया। जिसके लिए सालों लगते है।यह संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, संघर्षशीलता और कर्मचारियों के बीच उनकी गहरी पकड़ का नतीजा है।

विद्युत पावर विभाग से रेल सफर शुरू:- किसी ने सोचा नहीं था कि विद्युत (पावर) विभाग से रेल सफर की शुरुआत करने वाले चौधरी इस मुकाम तक पहुंचेंगे। पॉवर विभाग में रहते हुए उन्होंने कर्मचारियों के अधिकारों और सुविधाओं के लिए आंदोलनों का नेतृत्व किया। विद्युत कर्मचारियों के समय पर प्रमोशन, कार्यस्थल सुरक्षा और रेनकोट जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता के लिए उन्होंने प्रशासन पर प्रभावी दबाव बनाया। बल्कि इसका कर्मचारियों को लाभ दिलाया।

बड़े नेताओं का लाभ:- नौ वर्षों के कार्यकाल के राजेंद्र को मजदूर संघ के नेतृत्व का भरपूर लाभ मिला। पूर्व मंडल मंत्री बीके गर्ग व वर्तमान मंडल मंत्री अभिलाष नागर से कर्मचारियों की सेवा के गुर सीखे। उन्होंने संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए मजदूर संघ के हर अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उन्हें दो बार डीआरएम अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

विनम्रता ने बढ़ाया आगे:-चौधरी की माने तो उनकी सबसे बड़ी विशेषता उनका मिलनसार स्वभाव और विनम्रता ने ही आगे बढ़ाया है। विनम्र व्यवहार की वजह से विरोधियों को भी अपना बनाने में सफल रहे।
वर्तमान के इन्होंने मजबूत उम्मीदवार सचिन मिश्रा के साथ मिलकर जेसिस बैंक डायरेक्टर चुनाव में कर्मचारियों से खासा मेलजोल बढ़ाया।

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