-यूनियन के सशक्त उम्मीदवार अर्पित जैन। उम्मीदवार अशोक तिवारी के साथ चुनावी रन में उतरे।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। जेसीस बैंक डायरेक्टर के चुनावी परिदृश्य में एक चर्चित चेहरा अर्पित जैन धूमकेतु की तरह प्रचार माहौल में चमकीले सितारे भांति अपनी आभा बिखेर रहा है। रेलवे नौकरी में स्वच्छ छबि व कर्मचारियों के प्रति सेवा भावना की ललक इनकी डायरी के कागजों में भी समाहित है। इसे देखते ही वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन ने इन्हें डायरेक्टर पद का उम्मीदवार बनाने में ज़रा भी झिझक नहीं दिखाई। वर्तमान में यह यूनियन के साथी उम्मीदवार अशोक तिवारी के साथ अपनी सफल उम्मीदवारी को पुख्ता करने एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। यहीं वजह है कि यूनियन के महामंत्री जेआर भोंसले, मंडल मंत्री मनोहर बारठ, मंडल अध्यक्ष ह्रदेश पांडेय अपने उम्मीदवारों की जीत के प्रति पूरी तरह से आशान्वित है।
अर्पित जैन की शासकीय सेवा का रिपोर्ट कार्ड:- यूनियन के उम्मीदवार अर्पित जैन ने वर्ष 2014 में स्टेशन मास्टर के तौर पर चन्चेलाव, उज्जैन एवं डीआरएम ऑफिस में कार्य किया।
वर्ष 2019 से SO के रूप में SSE/PW/MKC, IOW/UJN में कार्य किया। वर्ष 2023 से विजिलेंस इंस्पेक्टर के रूप में मुख्यालय चर्चगेट में कार्यरत रहे। इस दौरान अर्पित के मन में सेवा व समर्पण का अलग ही फितूर रहता था। एक हाथ में शासकीय कामों की फाइल तो दूसरे हाथ में निजी डायरी भी रहती थी। इसमें निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम, उनकी परेशानियों से जुड़े काम तथा उनके मोबाइल नंबर रहते थे। साथ ही किस शाखा में किस अधिकारी से चर्चा करना। यह भी उल्लेखित रहता था। बकौल अर्पित, कर्मचारी उनके पास उम्मीदों से समस्याएं लेकर आते थे। बस उनके काम पूरे करने पर मुझे आत्मिक संतुष्टि रहती थी।

ऐसे कामों का रहा सफरनामा:- अर्पित का कहना है कि विजिलेंस एवं ट्रैकमैन यूनिट में कार्य के दौरान देखा कि ट्रैकमैन, गैंगमेन, पॉइंट्समैन आदि जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों को कुछ निजी तो कुछ विभागों से जुड़ी तकनीक समस्याओं का सामना करना पड़ता था। रेलवे आवास, वहां पर गंदगी, साफ सफाई, HRMS, उम्मीद कार्ड, स्थापना संबंधी विसंगतियां, पे फिक्सेशन संबंधी त्रुटियां, पारिवारिक वेलफेयर जैसी समस्या निदान में आगे आता था। वहीं परीक्षाओं की तैयारी करने वाले साथियों को गाईडलाइन्स, समय-समय पर आवश्यक सूचनाएं, नोटिफिकेशन आदि की जानकारी देना दैनिक कार्य में शामिल रहता था। इन सभी समस्याओं के निराकरण के उद्देश्य से ‘सार्थक सहयोग’ नामक ग्रुप की स्थापना की और लगभग 6000 कर्मचारियों को इसमें जोड़ा गया। किसी भी कर्मचारी को रतलाम मंडल कार्यालय के चक्कर नही लगाने पड़े, कोई रिश्वत ना देना पड़ी और कर्मचारियों को काफी राहत मिली। कर्मचारियों और उनके परिवारजनों के बीमारी और इमरजेंसी की स्थिति में उम्मीद कार्ड बनवाए और उनके ईलाज में सहायता की। ऐसे अनगिनत परोपकारी एवं सहयोगी कार्यो की वजह से ट्रैकमैन, पॉइंट्समैन जैसे तमाम छोटे कर्मचारियों को घर बैठे बिना किसी अनुनय, विनय बहुत अधिक सुविधाएं प्राप्त हुई।
फ़िलहाल अर्पित साथ उम्मीदवार अशोक तिवारी के साथ कांधे से कांधा मिलाते हुए चुनाव प्रचार कर यूनियन की उपलब्धि भी गिना रहे है।
