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संम्पत्ति जांच में ‘आनाकानी’, भारी पड़ गई ‘मनमानी’… विजिलेंस कार्रवाई की ‘रार’, ओएस को तव्वजों ‘बरक़रार’

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। दो बत्ती स्थित डीआरएम ऑफिस में पिछले दिनों विजिलेंस कार्रवाई में सहयोग न करना कार्मिक विभाग के ओएस (कार्यालय अधीक्षक) पर भारी पड़ने लगा है। ओएस की परेशानी अब जाकर और भी बढ़ने लगी है। दरअसल विजिलेंस जांच गंभीर विभागीय अनियमितता के चलते हुई है। इसमें ओएस (प्राइम सेल) हरिकृष्ण बारगे के बैंक खातों के जांच तक की नौबत आ गई। इसमें सहयोग नहीं करने पर मामला गंभीर हो गया। ऐसे में पुख़्ता जांच के बाद बारगे सहित एक अन्य कर्मचारी को भी चार्जशीट के दायरे में लिया गया। बड़ी बात यह है कि बारगे का प्राइम सेल से तबादला पॉलिसी विभाग में करने के आदेश भी जारी कर दिए गए। बावजूद यह कर्मचारी एक अधिकारी के वरदहस्त के चलते अभी भी प्राइम सेल में ही कार्यरत है। इससे विभाग की प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे है। इतना ही नहीं पूर्व में विजिलेंस जांच झेल चुके एक अन्य डब्ल्यूएलआई को विभाग द्वारा निरंतर इसे उपकृत किया जाना भी सवालों के घेरे में है।
बता दें कि न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा पूर्व में पिरियोडिकल तबादलों में अनदेखी की खबर का प्रमुखता से प्रकाशन किया गया था। तब 15 साल से अधिक की अवधि तक बगैर पिरियोडिकल तबादलें प्राइम सेल में
कार्यरत ओएस बारगे के अलावा डब्ल्यूएलआई संजय शिंखेडकर को लेकर खबर उज़ागर की गई थी। लेकिन तत्कालीन सीनियर डीपीओ ने इनके तबादला करने की जहमत नहीं उठाई। अब विजिलेंस कार्रवाई में अनियमितता सामने आने पर भी प्रशासन द्वारा बारगे के तबादला आदेश तो जारी कर दिया। लेकिन प्राइम सेल में अभी भी किसी अन्य को नियुक्त न करना प्रशासनिक मनमानी भी मानी जा रही है।

यह सामने आई थी अनियमितता, इसलिए हुई जांच? :- विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक एक्ट अप्रेंटिस के तहत प्रशिक्षणार्थियों की परीक्षा में प्रमुखता से अनियमितता हुई है। दरअसल इसी विभाग से संबंधित किसी अधिकारी को परीक्षा के पेपर तैयार करने व कॉपी जांचने का जिम्मा था। लेकिन ये काम ओएस हरिकृष्ण बारगे द्वारा किए गए। सूचनाएं मुंबई तक पहुंची तो पिछले दिनों विजिलेंस ने धावा बोलकर मामले को जांच के दायरे में लिया गया। वहीं यह मामला आर्थिक अनियमितता के इर्दगिर्द भी माना गया। इसलिए विजिलेंस द्वारा संबंधित ओएस के बैंक खाते की जांच करना उचित समझा। लेकिन कर्मचारी द्वारा सहयोग नहीं करने से जांच का मामला गहराता गया।
इधर, पुख्ता छानबीन के बाद विजिलेंस से रिपोर्ट लेटर भी मंडल कार्यालय भेज दिए जाने की सूचना है। फ़िलहाल बारगे के अलावा अन्य कर्मचारी विनय तिवारी को भी चार्जशीट जारी करने की प्रकिया जारी है।

इन कर्मचारियों को उपकृत करने में एपीओ का हाथ!…इधर, एक अन्य मामले में दो डब्ल्यूएलआई कर्मचारियों को उपकृत करने पर एपीओ अंबालाल लबाना की कार्यशैली पर भी उंगलियां उठने लगी है। दरअसल डब्ल्यूएलआई रमेश मीणा पर दाहोद में पदस्थी अवधि में विजीलेंस कार्रवाई हुई थी। लबाना भी उस दौरान दाहोद में कार्यरत रहे थे। अब दो साल पहले एपीओ लबाना दाहोद से तबादला होकर रतलाम मंडल कार्यालय में एपीओ के रूप में पदस्थ हुए। तब डब्ल्यूएलआई मीणा को 4800 ग्रेड दी गई। हाल ही में मीणा को इसी न्यून ग्रेड पर प्रशासनिक हित (सरकारी खर्च) के हवाले से रतलाम से इंदौर में डब्ल्यूएलआई फ़ख़रे आलम के स्थान पर बतौर होस्टल इंचार्ज नियुक्त करने के अलावा सेक्शन की वर्किंग भी सौंप दी गई। जबकि इंदौर के लिए नेमनोटिंग पूर्व में अन्य कर्मचारियों सहित मीणा द्वारा भी लगाई गई। बावजूद मीणा को सरकारी खर्च पर तबादला कर उपकृत किया गया।
एक अन्य डब्ल्यूएलई सोमराज मीणा को लेकर भी प्रशासनिक कार्रवाई सवालों के घेरे में है। दरअसल सोमराज का 6 माह पूर्व पिरियोडिकल तबादला हुआ था। 4 साल की आवधिक अवधि के पूर्व 6 माह में ही इन्हें इंदौर से चित्तौड़ सेक्शन दे दिया गया। इन सबके बावजूद जनसंपर्क अधिकारी का कहना है कि नियमों के मुताबिक काम किए जाते है।

इन अनियमितताओं को लेकर भी ध्यान नहीं:-

-कार्मिक विभाग में अभी भी पिरियोडिकल तबादलों के अभाव में अन्य कर्मचारी भी प्रमुख पदों पर कार्यरत है। इनकी टेबल को लेकर विभाग के गलियारों के आए दिन चर्चाएं होती है।
-सर्वाधिक वरिष्ठ डब्ल्यूएलआई संजय शिंखेडकर की नियुक्ति कल्याण निरीक्षण सेक्शन में होना चाहिए। तांकि कर्मचारियों के वेल्फेयर से संबंधित तमाम काम को जिम्मेदारी से पूरा किया जाए।
-डब्ल्यूएलआई संजय शिंखेडकर भी पिछले 15 साल से अधिक की अवधि से प्राइम सेल में कम्प्यूटर से जुड़े काम कर रहे है। जबकि वर्तमान में नई भर्ती के कई प्रतिभावान कर्मचारी आईटी का काम करने में निपुण है।
-डब्ल्यूएलआई शिंखेडकर के कल्याण निरीक्षक सेक्शन में नियुक्ति न होने से वर्तमान में डब्ल्यूएलआई सेक्शन में नियमों को दरकिनार कर इंचार्ज डब्ल्यूएलआई को सौंप रखा है।
-अभी भी सेक्शनों की विभागवार प्रमोशन, इंक्रीमेंट, छुट्टियों की गणना सहित अन्य छोटे मामलों के लिए नियुक्त टेबलों पर जिम्मेदारों द्वारा खूब मांग की जा रही है।
-काम के बदले उपहार स्वरूप मिठाई के पैकेट, वाइन बोतलें सहित लिफ़ाफ़े स्वीकारें जा रहे है। कर्मचारियों द्वारा मजबूरन अनैतिक मांग को पूरा किया जा रहा है। कभी भी बड़े अधिकारियों पर आंच आना तय है।

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