एक सूची जारी, दूसरी का इंतजार… राजकोट मंडल ने ली सीएमआई के तबादला की सुध, रतलाम में सालों से टेबल पर जमे अभी भी यथावत
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेल मंडल के वाणिज्य विभाग द्वारा चेकिंग स्टाफ के पिरियोडिकल तबादलें की सूची भले ही जारी कर दी, लेकिन सीएमआई स्तर के तबादलों की प्रकिया में लगता हैं अफसरों को अभी भी रुचि नहीं है। हालांकि राजकोट मंडल में सभी सीएमआई को टेबलों से इधर-उधर कर दिया गया है। ऐसे में रतलाम में दबाव जरूर बनने लगा है।
बता दें कि विभाग में सीएमआई सालों से टेबल पर एक ही तरह के काम कर रहे है। जबकि रेलवे के नियमों के मुताबिक हर 4 साल में तबादलें की अनिवार्य प्रकिया है। वह भी सेंसेटिव पोस्ट के लिए तबादलें तो बेहद जरूरी है। हालांकि एक साल पहले सख्त कार्यशैली के चलते सीनियर डीसीएम हिना केवलरमानी द्वारा महिला सीएमआई को रेलवे स्टेशन पर केटरिंग के काम में जुटाया तथा बदले में अन्य सीएमआई को डीआरएम ऑफिस बुलवाया गया। विभाग प्रमुख अन्य प्रशासनिक मामले में सख्त है।
टीटीई स्टाफ की तबादला सूची को लेकर असंतोष:- इधर विभाग द्वारा पिछले सप्ताह टीटीई स्टाफ की जारी पिरियोडिकल तबादले की सूची को लेकर असंतोष है। कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि विशेष कर्मचारियों को ऑब्लाइज किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। मामला विभाग प्रमुख केवलरमानी द्वारा संज्ञान में लिया। अब सूची में आंशिक फेरबदल के संकेत कर्मचारियों को दिए गए है।
पिछले फैसलों में भी मनमानी:- ट्रांसफर-प्रमोशन व तबादला सूची में मनमानी के अलावा हर छोटे फैसलों में कुछ कर्मचारियों का दखल रहता है। अब इनकी परतें भी खुलने लगी है। कुछ माह पूर्व प्रयागराज महाकुंभ में टूर के लिए भी मनमानी की गई। दरअसल प्रयागराज के लिए रेलवे से विभिन्न मंडलों से कर्मचारियों को मदद के लिए बुलाया गया था। इसके अलावा रतलाम मंडल के उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए अधिकारी एवं कर्मचारियों की टीम को बतौर अनुभव व प्रशिक्षण के लिहाज से वहां भेजा गया। मजेदार बात यह रही कि टीम में एक ऐसे कर्मचारी को शामिल किया गया, जिनका रिटायरमेंट 2025 में ही है। इन्हें 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के अनुभव के लिए कुंभ में ले जाना समझ से परे माना जा रहा है। क्योंकि इनके यात्रा भत्ता (TA) क्लेम करने से रेल राजस्व की भी हानि की गई। यदि अन्य कर्मचारी वहां जाता तो शायद कुंभ के मेले का अनुभव सिंहस्थ में काम आता।
दूसरी ओर किसी सरकारी कार्यक्रम जैसे ट्रेन, लिफ्ट, वेटिंग हॉल के उद्घाटन या किसी बड़े अधिकारी के दौरे में रेलवे से खाते से जो पैसे निकाले जाते है। उसको खर्च करने का जिम्मा भी सेक्शन के खासमखास कर्मचारी के पास ही है।
