हताहत व राहत वाले पिरियोडिकल तबादलें….रेलवे लेखा विभाग के 12 वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी के तबादलें, वाणिज्य विभाग में आक्रोश
-डेढ़ साल में ही वर्किंग ड्यूटी बदलने पर टीटीई पहुंचे विभाग में।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे में पिरियोडिकल तबादलों की प्रकिया का क्रम जारी है। लेखा विभाग में शुक्रवार को तबादला सूची जारी की गई। इसमें 13 में से 12 वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी के तबादलें कर दिए गए। एक को राहत दी गई। जबकि कुछ माह पूर्व शिकायत के आधार पर हटाए गए एक कर्मचारी को दोबारा पूर्व पद पर काबिज़ कर दिया गया।
दूसरी ओर वाणिज्य विभाग में दो दिन पूर्व चेकिंग कर्मचारियों की जारी की गई तबादला सूची में अनियमितता के आरोप लग रहे है। प्रकिया से असंतुष्ट कुछ टीटीई अपनी शिकायत लेकर डीआरएम ऑफिस पहुंचे।
मालूम हो कि न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा पूर्व में इस सूचना से अवगत करा दिया गया था कि लेखा विभाग में लंबे समय से एक सीट पर पदस्थ कर्मचारियों व कार्यालय अधीक्षक के तबादलें जल्दी किए जाएंगे।
नियम के बावजूद दिव्यांग कर्मचारी को राहत नहीं
लेखा विभाग में 13 में से 12 वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी के तबादलें किए गए है। जबकि एक को राहत दी गई है। बड़ी बात यह है कि पूर्व में सीनियर एसओ दिलीप साहू को ठेकेदारों की शिकायती अपील पर पूर्व में वर्क्स एकाउंट्स में हटाया गया था। अब दोबारा ठेकेदारों की डिलिंग की पोस्ट एक्सपेंटेचर-2 में तबादल करना हैरानी की बात मानी जा रही है। वहीं तबादला सूची में दिव्यांग कर्मचारी राजेन्द्र कुमार रायक को भी शामिल कर लिया गया। जबकि रेलवे बोर्ड के नियमों के मुताबिक दिव्यांग कर्मचारियों को पिरियोडिकल तबादलें से राहत देना आवश्यक है।
विभागीय सूत्रों की माने तो कुछ माह पश्चात लेखा विभाग में स्टाफ की तबादला सूची भी जारी की जाएगी। इसमें काम के बजाय टेबल को आरामगाह बनाने व समय पास करने वाले कर्मचारियों को भी जिम्मेदारी वाली टेबल पर पदस्थ कर उनसे काम लिया जाएगा।
वाणिज्य विभाग की सूची से असंतोष
इधर, वाणिज्य विभाग में 32 चेकिंग कर्मचारियों के तबादला सूची जारी की गई। इसमें 6 नेमनोटिंग तथा बाकी पिरियोडिकल श्रेणी के तबादलें शामिल है। हालांकि विभाग में दिव्यांग कर्मचारी को सर्टिफिकेट के आधार पर राहत दी गई है। वहीं दो स्पोर्ट्स कोटे के कर्मचारियों को छूट दी गई है।
दूसरी ओर करीब आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी अपनी पीड़ा लेकर डीआरएम ऑफिस पहुंचे। कर्मचारियों का कहना है कि उनके एक से डेढ़ साल की ड्यूटी के बावजूद पिरियोडिकल श्रेणी में मान लिया गया। उनकी अर्निंग बेहतर होने पर भी तबादला करना क्लर्क स्तर की मनमानी है। इसे लेकर सभी डीआरएम ऑफिस पहुंचे। लेकिन डीसीएम से मुलाकात नहीं हो सकी।
मामले में पीआरओ खेमराज मीना का कहना है कि नियमों से पिरियोडिकल के अलावा प्रशासनिक हित में भी तबादलें करने की प्रकिया अपनाई जाती है।
