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रेलवे पीरियॉडिकल तबादलों की प्रकिया बेपटरी….नियम ताक पर, चहेते कर्मचारियों का बचाव, 8 लाख रुपए बकाया बिल कर अंधेरे में डूबोया पातालपानी स्टेशन, फिर भी कार्रवाई नहीं

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में अधिकारियों की मेहरबानी और मिलीभगत के चलते रेलवे के कड़े नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमों के विपरीत काम करने और गंभीर लापरवाही बरतने के बावजूद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें अभयदान दिया जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण ऐतिहासिक पातालपानी स्टेशन पर देखने को मिला। यह पिछले तीन दिनों से अंधेरे में डूबा हुआ है।
​विद्युत वितरण कंपनी का 8 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया होने के कारण स्टेशन का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। विद्युत विभाग द्वारा बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी डीआरएम ऑफिस के इलेक्ट्रिकल पावर विभाग ने बिल का भुगतान नहीं किया। नतीजतन, यात्रियों के आकर्षण का केंद्र रहने वाली हेरिटेज ट्रेन के यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। स्टेशन का अनाउंसमेंट सिस्टम ठप है। वेटिंग रूम और वॉशरूम में अंधेरा छाया हुआ है। रात के समय डीजल व रेलवे सामग्री चोरी होने का खतरा बढ़ गया है। फिलहाल स्टेशन को जनरेटर के सहारे जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। इसके बावजूद इस लापरवाही के जिम्मेदार आवधिक तबादले की अवधि पार कर चुके कार्यालय अधीक्षक पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

4 साल के आवधिक तबादले के नियमों की अनदेखी:- रेलवे नियमों के मुताबिक, संवेदनशील (सेंसेटिव) पदों और टेबलों पर कार्यरत कर्मचारियों का हर 4 साल में आवधिक (पीरियॉडिकल) तबादला करना और सेक्शन बदलना अनिवार्य है। लेकिन रतलाम मंडल में अधिकारियों की शह पर इन नियमों को ताक पर रख दिया गया है।
डीआरएम ऑफिस के विभिन्न सेक्शनों में एक ही टेबल पर सालों से जमे कर्मचारियों पर न तो कोई कार्रवाई हो रही है और न ही उनसे पूछताछ। अधिकारियों का यह पक्षपाती रवैया न सिर्फ रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे है। बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी खतरे में डाला जा है।

– इलेक्ट्रिकल पावर विभाग: बिजली बिल भुगतान में लापरवाही के जिम्मेदार और कार्यालय अधीक्षक (ओएस) अर्जुन देवसिंह पिछले 5 सालों से एक ही टेबल पर टिके हुए हैं। वर्तमान में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सीनियर डीईई धर्मेंद्र प्रजापति है। इन्हें कार्रवाई का सीधा अधिकार है।

– इस्टैब्लिशमेंट विभाग: ग्राउंड फ्लोर पर कार्यरत ओएस मनोज चंद्रा और चीफ ओएस के अलावा, पॉलिसी सेक्शन में सीओएस मिलिंद सराफ, दीपा शर्मा, सेटलमेंट विभाग में ओएस तनुजा कोराने (जो अपनी भर्ती के समय से एक ही टेबल पर हैं) और पे-शीट सेक्शन में कार्यरतओएस योगेश शर्मा के बारे में भी बताया जा रहा है कि ये भी 4 साल की निर्धारित समय-सीमा पूरी कर चुके हैं। इस विभाग में प्रमुख अधिकारी सीनियर डीपीओ सोमनाथ कैलास गायकवाड़ है।

– एसएंडटी (S&T) विभाग: इस विभाग में भी कई एसएसई (SSE) सहित महिला व पुरुष कर्मचारी आवधिक तबादले के दायरे में आने के बावजूद सालों से एक ही जगह जमे हुए हैं।​ इस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सीनियर डीएसटीई राजेंद्र सिंह मीणा है। 

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