गरीब रथ बनी ‘अमीर रथ’, कमर्शियल विभाग बना मिडिल क्लास…. मनमानी ड्यूटी में मालामाल वर्किंग, TTE रोस्टर में बड़े खेल
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम रेल मंडल में यात्री आय से राजस्व बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। इसके लिए टिकिट चेकिंग स्टाफ की मुनादी भी की जा रही। लेकिन ज़मीन पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। मुंबई-रतलाम रेल खंड पर चलने वाली स्पेशल और प्रीमियम ट्रेनों में टीटीई (TTE) ड्यूटी रोस्टर में घोर अनियमितता और तगड़ी साठगांठ है। मंडल को मिलने वाले राजस्व में सेंध लगाकर कुछ चुनिंदा रेल कर्मचारी चेकिंग स्टाफ की जेबें गर्म हो रही हैं। हालात यह है कि इस खेल में जहां ड्यूटी इंचार्ज की शह है वहीं कुलियों से भी कमाई का भरपूर सहयोग मिल रहा है। एक ओर सालाना टारगेट के लिए दबाव है। वहीं मैनिंग की अर्निंग के लिए विभाग को ही मशक्कत करनी पड़ रही है।
गरीब रथ में मनमानी वसूली, टीटीई के लिए बनी ‘अमीर रथ’:- हजरत निजामुद्दीन-बांद्रा ‘गरीब रथ’ और मुंबई हॉलिडे स्पेशल जैसी ट्रेनों में वर्किंग की मनमानी चरम पर है। दरअसल रतलाम से रात 12:05 बजे रवाना होकर सुबह बोरीवली पहुंचने वाली गरीब रथ का कम किराया यात्रियों की पहली पसंद है। इसी का फायदा उठाकर रात के अंधेरे में वडोदरा, सूरत और मुंबई जाने वाले यात्रियों से अनाधिकृत रूप से ऊपरी रकम वसूल कर आरामदायक बर्थ उपलब्ध कराई जा रही है। यही वजह है कि यह ट्रेन आम यात्रियों के लिए गरीब रथ और टीटीई के लिए ‘अमीर रथ’ साबित हो रही है।
34 दिनों के रोस्टर में ‘खास’ कर्मचारियों पर मेहरबानी:- कानपुर-बांद्रा और मुंबई सेंट्रल-भिवानी (09001 सीरीज) जैसी प्रीमियम ट्रेनों में भी गिने-चुने टीटीई की ही ड्यूटी लगाने की बात सामने आई है। 34 दिनों के ड्यूटी रोस्टर में पारदर्शिता को दरकिनार कर अधिकांश समय पसंदीदा टीटीई ही इन मलाईदार रूटों पर ड्यूटी करने में जुटे हुए है। भिवानी प्रीमियम ट्रेन (12 एसी और 5 स्लीपर कोच) में तो बाकायदा सेटिंग का खेल चलता है। रास्ते में चेकिंग करने वाले टीटीई रतलाम के टीटीई को पासिंग यात्रियों की लोकेशन देकर अनधिकृत उन्हें आगे के लिए हैंडओवर कर देते हैं।
कुली-टीटीई साठगांठ, हर कुली के पास ‘सेटिंग’ वाले टीटीई का नंबर:-
<span;>स्टेशनों पर कुली और टीटीई के बीच गहरा मेलजोल देखने को मिल रहा है। लगभग सभी कुलियों के पास इन चुनिंदा टीटीई के सीधे संपर्क मोबाइल नंबर हैं। ट्रेन आने से पहले ही कुली बिना टिकट या वेटिंग वाले यात्रियों की सूची टीटीई तक पहुंचा देते हैं। फिर सीट दिलाने के नाम पर तगड़ी वसूली का खेल रचा जाता है।
विजिलेंस की कार्रवाई भी बेअसर:- मामले की गंभीरता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछली बार विजिलेंस की छापेमारी के दौरान अटेंडेंट ‘बजरंगी’ के पास से 18 हजार रुपए की अघोषित नकदी बरामद हुई थी। इसके बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया और सिंडिकेट बेखौफ होकर अपना काम कर रहा है। इसके अलावा भी रतलाम से वर्किंग कर कोटा गए टीटीई को भी विजिलेंस इंस्पेक्टर ने पकड़ा था।
मंडल के राजस्व पर लग रहा चट्टा:- उगाही के इस खेल में रेलवे के कमर्शियल विभाग को सीधा यात्री आय का नुकसान हो रहा है। दरअसल रतलाम मंडल का पिछले साल का यात्री आय का राजस्व 26 करोड़ रुपए था। जिसे इस बार बढ़ाकर 32 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य रखा गया है। सीनियर डीसीएम हिना केवलरामानी ने इसके लिए कड़े निर्देश जारी किए। मैनिंग (ट्रेन ड्यूटी) से अर्निंग कम होने से हिदायत भी दी जा रही है। लेकिन धरातल पर यह बेअसर तथा टीटीई की जेब की पॉकेट पर असर ज्यादा हो रहा है। जब मंडल के राजस्व की कीमत पर टीटीई और दलालों का नेटवर्क फल-फूल रहा हो। तब 32 करोड़ के लक्ष्य को पाना बेहद मुश्किल नज़र आता है। प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े करती है। इसके विपरित मामले में जनसंपर्क विभाग का कहना है कि नियमों से ड्यूटी कराई जा रही है।
