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Welfare: न वेल है, नहीं फेयर….कल्याण करने वाले ही खुद बदहाल, फिर कैसे होगा रेल कर्मचारियों का कल्याण?

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल का कार्मिक विभाग और उसका कल्याण अनुभाग इन दिनों खुद ही अव्यवस्थाओं के भंवर में फंसा हुआ है। जिस विभाग का जिम्मा हजारों रेल कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना और उनका समाधान करना है। वह विभाग आज अपने ही कर्मचारियों की बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है।
इस अव्यवस्था को देखकर अब रेल कर्मचारियों के बीच एक ही बड़ा सवाल तैर रहा है “जब दूसरों का कल्याण करने वाले खुद अपना कल्याण नहीं कर पा रहे हैं, तो आम रेल कर्मचारियों का भला कैसे होगा?”

​स्टाफ की भारी कमी, काम का बढ़ा बोझ:- रतलाम मंडल में इस समय महज 12 से 13 कल्याण निरीक्षक (वेलफेयर इंस्पेक्टर) कार्यरत हैं। लंबे समय से कई पद खाली पड़े है। तीन अनुभवी निरीक्षकों को मूल काम से पृथक कर अन्य काम में जुटाया गया है। जबकि एक 8 महीने से सस्पेंड है। इस कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है। स्टाफ की इस किल्लत का सीधा असर रेल कर्मचारियों की समस्याओं के निपटारे और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर साफ दिखाई दे रहा है। साथ ही विभाग के भीतर अंदरूनी तालमेल और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तीन अनुभवी निरीक्षक मूल काम से अलग, एक 6 महीने से सस्पेंड
विभाग के भीतर अंदरूनी तालमेल और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

रेलवे प्रशासनिक की कमजोर हुई रीढ़:- 

– कमल कनिक, प्रशांत पांडेय सहित राजेंद्र चौधरी अनुभवी कल्याण निरीक्षकों को उनके मूल काम से अलग रखा गया है।

– कल्याण निरीक्षक फखरे आलम पिछले 8 महीने से अधिक समय से निलंबित चल रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि कोई जांच लंबित है। तो उसका फैसला समय पर होना चाहिए।

-महीनों तक मामला लटके रहने से संबंधित कर्मचारी के साथ-साथ पूरे विभाग का मनोबल टूट रहा है।
– कल्याण निरीक्षकों के बीच निराशा की एक बड़ी वजह  4800 ग्रेड पे में होने वाली पदोन्नतियां हैं। इसकी फाइलें वर्षों से धूल खा रही हैं। निरीक्षकों का दर्द है कि जब उनकी खुद की तरक्की रुकी हुई है, तो वे पूरे मन से दूसरों की समस्याओं का समाधान कैसे कर पाएंगे?
– कुछ समय पहले ही सोमनाथ गायकवाड़ ने मंडल कार्मिक अधिकारी (प्रभारी DPO) का कार्यभार संभाला था। तब कर्मचारियों को उम्मीद बंधी थी कि लंबित मामलों में तेजी आएगी। लेकिन धरातल पर अब तक कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया है।
– रेलकर्मी अपनी समस्याएं लेकर डीआरएम कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

व्यवस्था पटरी पर लौटेगी?
– खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि काम का बोझ कम हो।
– वर्षों से अटकी हुई पदोन्नति की प्रक्रियाओं को तत्काल पूरा किया जाए।
– निलंबन और विभागीय जांच के मामलों का समय सीमा के भीतर निपटारा हो।
– जिन निरीक्षकों को मूल काम से अलग रखा गया है, उनके मामलों में जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर उन्हें मुख्यधारा में लौटाया जाए।

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