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ELECTION ADVENTURE….कयासों व आंकलन की राह चलती रही बयार, आखरी दिन तक अनुमान, और एक घोषणा ने चौंका दिया

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। जैक्सन कॉपरेटिव सोसायटी की चुनावी सरगर्मियां नामांकन प्रकिया से लेकर प्रचार-प्रसार व काउंटिंग तक कयासों व आंकलन के बीच ऊपर-नीचे होती रही। लेकिन परिणामों ने लगभग सभी को चौंका दिया। हालांकि इस बार के चुनाव में संगठनों की साख दांव पर थी। अब जो स्थिति उभरकर आई है। इसमें कुछ को राहत मिली तो कुछ हो चिंतन के लिए मजबूर कर दिया। यदि चुनाव में अगर किसी संगठन को लाभ मिला, तो वह मात्र वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन व एसटी-एससी एसोसिएशन है….। एक संगठन ने अंतराल के बाद बैंक डायरेक्टर की सीट हथियाई तो दूसरे संगठन के उम्मीदवार मुकेश मीणा को हार के बावजूद सम्मानजनक वोट मिले। पदधिकारियों लिए यह राहत की बात जरूर हो सकती है।

सेक्शनों में लगाई दौड़, की गई कड़ी मेहनत, उम्मीदवारों का तो गला खराशी हो गया:- जेसीस बैंक चुनाव में जीत के लिहाज से संगठनों व उम्मीदवारों ने प्रतिष्ठा बरक़रार रखने या पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। कुल 12372 मतदाताओं से संपर्क करने सेक्शनों में ज्यादा ध्यान दिया गया। हालात यह रहे कि सप्ताह भर तक पदाधिकारी व समर्थक सेक्शनों में वोट के लिए घूमते व भटकते रहे। उम्मीदवारों के हालात तो यह रहे कि किसी को थकान के मारे फीवर की हरारत हुई तो किसी का विनती कर-करकर गला खराशी हो गया। आवाज भी धीमी पड़ गई। कुल मिलाकर मेहनत तकरीबन सभी ने की है। यहीं वजह रही कि मंडलीय स्तर पर नंबर एक व दो के विजयी उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 697 मतों रहा। जबकि बाकी उम्मीदवारों के बीच मतों का अंतर भी कुछ सैकड़ा का ही रहा। यानी निचले क्रम के चुनिंदा उम्मीदवार को छोड़कर वोट तकरीबन सभी को मिले। ऐसी ही स्थिति जोनल उम्मीदवारों के बीच रही।

इस तरह रही संगठनों की एकजुटता…

वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ:- इस संगठन के उम्मीदवारों के लिए सामूहिक ताकत से प्रचार-प्रसार किया गया। मान्यता के चुनाव सहित जेसीस बैंक में पिछले चुनाव की जीत के अनुभवों का संगठन को लाभ मिला। पूर्व मंडल मंत्री व सहायक महामंत्री बीके गर्ग भी प्रचार के लिए उतरे। मंडल मंत्री अभिलाष नागर व प्रताप गिरी के नेतृत्व में टीम ने बखूबी काम किया। हालांकि राजेंद्र चौधरी की उम्मीदवारी को लेकर संगठन में शुरुआती विरोध की लहरें उठी थी। लेकिन पैनल में शामिल गौरव दुबे ने चौधरी का समर्थन किया। वहीं टीम मजदूर संघ ने भी संगठन के फैसले पर मोहर लगाई। सचिन मिश्रा की जीत को लेकर शुरू से आश्वस्ति दिखाई दे रही थी। वहीं महिला सीट पर उम्मीदवार को संगठन की छबि का भरपूर लाभ मिला।

वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन:- महामंत्री जेआर भोंसले की सख्त तथा मंडल मंत्री मनोहर बारठ व अध्यक्ष ह्रदेश पांडेय की ईमानदार छबि को भुनाया गया। उम्मीदवार अर्पित जैन की साफगोई व्यक्तित्व का लाभ जेसीस बैंक को मिलने की उम्मीद है। अन्य उम्मीदवार अशोक तिवारी ने जैन के साथ कांधे से कांधा मिलाकर प्रचार किया। लेकिन विपक्षी उम्मीदवार सचिन मिश्रा को दाहोद सहित अन्य सेक्शनों में अच्छी बढ़त मिली। इस वजह से यूनियन को एक ही सीट हाथ लग सकी। पूरे परिदृश्य में देखा जाए तो मान्यता चुनाव के बाद यूनियन को इस चुनाव में पिछली साख सहित बहुत कुछ हासिल हुआ। इस अव्वल जीत में जहां पूर्व डायरेक्टर वाज़िद की सेक्शनों में पकड़ तथा आईटी स्पेशलिस्ट महेंद्र सिंह राठौर की सकारात्मक भूमिका रही। वहीं यूनियन ने भी कार्यकर्ताओं के बल पर टीम शक्ति के रूप में काम किया।

पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद:- पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद मान्यता के चुनाव में दूसरे नंबर की जीत के सम्मान को दोहरा न सकी। इसमें संगठनात्मक खामियां भी मानी जा रही है। हालांकि उम्मीदवार मीणा विश्वनाथ प्रताप सिंह व अजय महाजन को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि एक उम्मीदवार की जीत तो लगभग तय है। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दरअसल बड़ा वोट कैडर यानी ट्रैकमैन कैटिगिरी का लाभ इस बार परिषद के हाथों फिसल गया। इसकी वजह मान्यता चुनाव के बाद मंडलीय बॉडी की सेक्शनों में संपर्क से दूरी मानी जा रही है। हालांकि प्रारंभ में परिषद के आला पदाधिकारी जेसीस बैंक डायरेक्टर चुनाव से दूरी बनाने के मूड में थे। लेकिन सामुहिक निर्णय के चलते उम्मीदवार उतारे गए। माना जा रहा है कि अब मंडलीय बॉडी में आंशिक फेरबदल किया जा सकता है।

ऑल इंडिया एसटी एससी एसोसिएशन:- संगठन ने रिजर्व सहित एसटी उम्मीदवार खड़े किए। इसका लाभ भी मिला, लेकिन जीत दूर से निकल गई। बावजूद जोनल उपाध्यक्ष आरसी वर्मा के अलावा मंडलीय बॉडी के मंडल मंत्री पीएम वर्मा, मंडल अध्यक्ष रामावतार वर्मा सहित अन्य पदाधिकारी की छबि का संगठन को लाभ मिला। यहीं वजह है कि हार के बावजूद उम्मीदवार मुकेश मीणा ने 1515 वोट बटोरे। मीणा परिषद के उम्मीदवार विश्वनाथ प्रताप सिंह से भी आगे निकल गए। एसटी रिजर्व सीट के जोनल उम्मीदवार गगन छपरी को भी हार नसीब हुई। लेकिन इन्हें जोनल स्तर की संगठन में नई पहचान जरूर मिली। कर्मचारी राजनीति के लिहाज़ से आगामी दिनों में इन्हें संगठन स्तर पर लाभ मिलना तय है।

11 सीटों पर यूनियन समर्थित उम्मीदवार की जीत:-इधर, वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के लिए राहत रही। यूनियन समर्थित जोनल सहित मंडल स्तर पर 11 सीटों पर जीत हासिल हुई। इसे मंडल मंत्री बारठ व अध्यक्ष पांडेय ने सभी मतदाताओं का आभार जताया। कहा कि जीत कर्मचारियों की एकता, विश्वास और संगठन की मजबूती का प्रतीक है। माना जा रहा कि चुनाव में कुल 19 सीटों जो कि NWR , WCR एवं WR स्तर पर जीत के मान से बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में यूनियन से समर्थित उम्मीदवार ही चेयरमैन बनेगा। इसलिए नव-निर्वाचित प्रतिनिधि सोसायटी के समग्र विकास, पारदर्शिता, जवाबदेही और सदस्यों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

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