ये कैसा करप्शन….सर्वाधिक सुविधा की नौकरी पाने का खेल, कोई मंत्रालय के माध्यम तो किसी ने डीजल शेड भर्ती से पाई जॉब
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम रेल मंडल में पश्चिम रेलवे मुख्यालय के जरिए सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) द्वारा लेटर जारी होने के बाद से रेल महकमे में खलबली मच गई है। लेंड फ़ॉर जॉब में फिलहाल चुनिंदा कर्मचारी ही दायरे में आए है। लेकिन मामले में अब और भी परतें खुलने की संभावना है। सीबीआई सूत्र बताते है कि इससे जुड़ी शिकायत होते ही अन्य कर्मचारियों पर भी जांच प्रकिया में लिया जा है।
बता दें कि लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री कार्यकाल में लेंड फ़ॉर जॉब के तहत धड़ल्ले से नौकरी दी गई थी। इसमें अधिकांश बिहार राज्य के कर्मचारी है। उस दौरान अधिकारियों ने भी अपने भाई, भतीजों व भांजों को नौकरी दिलवाई थी। केंद्र की भाजपा सरकार में रेल मंत्रालय की सिफारिश पर शिकायत के आधार पर ऐसे आरोपों की जांच तेज कर दी है। वहीं रतलाम मंडल में भी 90 के दशक में भ्रष्टाचार की भर्ती आमजन के संज्ञान में है।
पखवाड़े की मोहलत को अब नहीं ले सकते हल्का:- कार्मिक विभाग के सूत्र बताते है कि सीबीआई द्वारा जारी आदेश में 15 दिनों के अंतराल में कर्मचारियों की जन्म तारीख, शिक्षा व इससे जुड़े सर्टिफिकेट मांगे गए है। इसके मुताबिक डिप्टी सीवीओ (ए) सीसीजी पी लोकेगांवकर द्वारा इस मियाद के हवाले मंडल कार्यालय में लेटर फारवर्ड किया गया है। इसमें अवधेश कुमार सीएचओएस (स्टोर विभाग), अनिल कुमार डिप्टी सीटीआई (कमर्शियल), बाबुलाल राय ड्रेसर (रेलवे हॉस्पिटल), दिलीप कुमार राय (इलेक्ट्रिकल) व पप्पू कुमार टी/मेन-1 की चाही गई जानकारी भेजने की चेतावनी दी गई।
अलग-अलग विभागों में कार्यरत:- लेंड फ़ॉर जॉब के मामले में लिप्त मंडल में और भी कर्मचारी कार्यरत है। इसमें बिहार राज्य के लगे कई कर्मचारी कमर्शियल विभाग में कार्यरत है। टिकिट चेकिंग सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी तो पदोन्नत होकर डिप्टी सीटीआई पद तक पहुंच चुके है। शिकायत के आधार पर जल्दी ही कार्रवाई की तैयारी है।
40 हजार रुपए रैकेट में भर्ती:- लेंड फ़ॉर जॉब मामले की परत खुलने के बाद भले ही जांच चल रही है। लेकिन रतलाम मंडल में डीजल शेड में 40 हजार रुपए रिश्वत में भर्ती की फिलहाल शिकायत नहीं होने पर मामला पिटारे में बंद है। वर्ष 90 के दशक में उस दौरान दर्जनों कर्मचारियों ने तकरीबन 40 हजार रुपए की रिश्वत के बदले रेलवे में नौकरी पाई थी। इसमें कार्मिक विभाग के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी लिप्त थे। जबकि वेलफेयर इंस्पेक्टर ने दलाल की भूमिका निभाई थी। उस दौरान की भर्ती में कई कर्मचारी पदोन्नत होकर लोको पायलट तो कोई विभाग बदलकर चेकिंग तक में चले गए। कई कर्मचारी तो रेल संगठनों के पैठ बनाते समय-समय पर चुनाव भी लड़ते आए।
