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कालाबाजारी का ‘नेक्सस’ व ‘गदर’…फर्जी सॉफ्टवेयर से चला रहे थे अवैध रेल टिकिटों का धंधा

-ऑनलाइन रेल टिकिटों की अवैध बिक्री का बड़ा मामला उजागर।

-विजिलेंस कार्रवाई में धंधेबाज दलाल को दबोच पुलिस के हवाले किया।

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। देशभर में ऑनलाइन टिकिटों की कालाबाजारी की आशंकाओं के बीच पश्चिम रेलवे जोन में छापामार कार्रवाई में इसके पुख्ता प्रमाण मिले है। विजिलेंस ने अवैध टिकिटों का बड़ा मामला उजागर किया है। दलाल द्वारा ‘नेक्सस’ व ‘गदर’ नाम के फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए से धड़ल्ले से ऑनलाइन टिकिटों की बिक्री की जा रही थी। कार्रवाई में 1 लाख 2100 रुपए के 38 लाइव टिकट (तत्काल और ओपनिंग) ज़ब्त की। जबकि सॉफ्टवेयर से बनाए गए कुल टिकिट की संख्या व राशि कई गुना ज्यादा पाई गई। दलाल को पुलिस को सौंपा गया।
यह मामला इसी माह यानी 20 दिसंबर 2023 का है। इसमें पश्चिम रेलवे विजिलेंस टीम द्वारा अवैध आरक्षित टिकटिंग गतिविधियों में लिप्त एक अपराधी दलाल को दबोचा। विजिलेंस ने सिटी पुलिस के साथ सिलवासा (दादरा और नगर हवेली राज्य) की शहरी सीमा में धरपकड़ की योजना बनाई। इसमें अपराधी को सबूत मिटाने और परिसर से भागने की तक कोई गुंजाइश दी। इसे टिकिट बनाते भी लाइव पकड़ा।

फ़ोटो-विजिलेंस टीम के साथ ( बीच में धारीदार टीशर्ट) में खड़ा आरोपी।

तत्काल बुकिंग के समय बनाई प्लानिंग

विजिलेंस की जांच के दौरान सिलवासा शहर में एक व्यक्ति अपने घर से अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग करके रेलवे आरक्षित टिकटों का अवैध कारोबार संचालित कर रहा था। मुख्य सतर्कता निरीक्षक मिक्की सक्सेना के नेतृत्व में विजिलेंस टीम द्वारा योजनाबद्ध तरीके से तत्काल टिकट बुकिंग के समय, अपराधी के घर में इंटर हुए। टिकिटों बुकिंग के उपयोग में आने वाले संबंधित सिस्टम लैपटॉप व मोबाईल जब्त कर सॉफ्टवेयर की जांच की। तब पता चला कि अपराधी ई-टिकट बनाने के लिए ‘नेक्सस’ और ‘गदर’ नाम के दो अवैध सॉफ़्टवेयर चला रहा था। उसके द्वारा ऑनलाइन खरीदे गए थे। सॉफ़्टवेयर में उपयोगकर्ताओं को कई फॉर्म, आईआरसीटीसी आईडी, पासवर्ड और भुगतान विवरण के सभी बुकिंग विवरण पहले से भरने की रहती है। इस तरह पूरी टिकट बुकिंग प्रक्रिया को सिस्टम पर स्वचालित कर कुछ ही सेकंड में कई आरक्षित टिकट बना देते हैं।

240 आईआरसीटीसी आईडी का उपयोग

जांच में यह पाया गया कि अपराधी ऑनलाइन खरीदी गई लगभग 240 लाइव आईआरसीटीसी आईडी का उपयोग कर रहा था। वह 05 अलग-अलग आईपी एड्रेस के साथ एक ही समय में 03 सर्वर संचालित करते हुए पाया गया। इसके लेपटॉप से कुल 38 लाइव टिकट (तत्काल और ओपनिंग) जिनकी कीमत 1,21,052 रुपए की जानकारी मिली है। जिसे बाद में जब्त कर लिया गया और सिस्टम में ब्लॉक कर दिया गया। इसके अलावा, सॉफ्टवेयर ‘नेक्सस’ और ‘गदर’ से बरामद पिछले 30 दिनों (20.11.23 से 20.12.23 तक) के टिकट हिस्ट्री की गहन जांच की गई। जिसमें कुल 539 टिकट बने हुए पाए गए, जिनकी किमत 14,61,921 रुपए थी।

17 ई-मेल एड्रेस का उपयोग कर संचालन

जांच से यह भी पता चला कि यात्रियों को टिकट भेजने के लिए अपराधी कुल 17 ई-मेल एड्रेस का उपयोग कर संचालन कर रहा था। सभी ई-मेल आईडी पर भेजे गए मेल की जांच करने पर कुल 631 ई-टिकट जिनकी कीमत रु. 17,36,396 रुपए का पता चला। अपराधी को लेपटॉप, मोबाईल के साथ आईपीएफ/वापी को सौंप दिया गया। उसके खिलाफ भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

विजिलेंस की सबसे बड़ी कार्रवाई

पश्चिम रेलवे के विजिलेंस विभाग द्वारा सॉफ्टवेयर के आधार पर ई-टिकट बनाकर देने वाले को रंगे हाथ पकड़ने की यह अब तक की सबसे बढ़ी कार्रवाई है। इस विजिलेंस टीम का नेतृत्व मिक्की सक्सेना, मुख्य सतर्कता निरीक्षक द्वारा किया गया। टीम के सदस्य में श्रीकांत दत्त-सी.वी.आई, मुकेश मुन्ड-प्रधान आरक्षक, हरीश- आरक्षक एवं अनिल तोमर-आरक्षक एवं सीटी पुलिस एवं आरपीएफ के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

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