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पढ़ाई का नवाचार: घोड़ा पल्ला स्कूल, यहां बच्चे खुद पात्र बनकर सीख रहे पाठ


-हिंदी रूपांतरण से अंग्रेजी के लेसन भी आसानी से समझ रहे
-शिक्षक देवेंद्र वाघेला के प्रयास से बढ़ी बच्चों में पढ़ाई की रुचि
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। शिक्षा पाठ्यक्रम के जटिल विषयों को यदि नाट्य रूपांतरण के माध्यम से समझाया जाए तो यह सीख बच्चों में शिक्षा गुणवत्ता सुधार में कारगर साबित हो सकती है। एक शिक्षक द्वारा ग्रामीण बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने में ऐसे प्रयास मिल का पत्थर साबित हो रहे है।
हम बात कर रहे हैं जिला मुख्यालय से 28 किलोमीटर दूर एकीकृत प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल घोड़ा पल्ला की। यहां कार्यरत शिक्षक देवेंद्र वाघेला कुछ ऐसे ही प्रयास में विद्यार्थियों में पढ़ाई में रूचि बढ़ा रहे है।
दरअसल आम तौर पर विषयों को लेकर ग्रामीण छोटे बच्चों में घबराहट रहती है। लेकिन इन विषयों के बड़े प्रश्नों के उत्तर उससे नाटक रूपांतरित कर सिखाना बच्चो के लिए मनोरंजनक भी बन रहा है। शिक्षक द्वारा ऐसे प्रयास से सामान्य रूप से उत्तर को आसान बनावे जा रहे हैं।

खेल-खेल में प्रश्नोत्तरी को नहीं भूलते विद्यार्थी

आम तौर पर स्कूलों में खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाने से बच्चों की लर्निंग कैपिसिटी में इज़ाफ़ा होता है। बकौल शिक्षक बाघेल साल दर साल बच्चों में पाठ्यक्रम का बोझ बढ़ने लगा। बच्चों का मानसिक बोझ कम करने में लर्निंग इनोविटी स्कूलों में कारगर साबित हो रही है। यही वजह है कि रतलाम कलेक्टर के आदेश से कन्या आश्रम शिवगढ़ में पांचवी व आठवीं की बालिकाओं को पढ़ाने का मौका भी मिला। यहां भी बालिकाओं को सामाजिक विज्ञान जैसे विषय से भय था। बड़े प्रश्न के उत्तर सामान्य रूप से अपने नवाचार के माध्यम से सरल कर दिया।

 

अंग्रेजी के हिंदी अनुवाद में आसानी

घोड़ा पल्ला स्कूल में पढ़ाते समय बच्चों को नाट्य रूपांतरण भी लर्निंग इनोविटी का बेहतर जरिया साबित हुआ। बाघेल बताते है कि अंग्रेजी कहानी को हिंदी में लिखकर उसे प्रकृति के साथ पात्र बनाकर जोड़ दिया गया। पूरी कहानी नाटक में पात्रों के डायलॉग बुलवाकर कर उसका मंचन करवा दिया गया। जिससे बच्चे अंग्रेजी के साथ हिंदी अर्थ भी आसानी से सीख रहे है। यही वजह भी है रूचि बढ़ने से बच्चे सुबह जल्दी स्कूल पहुंच रहे है।

स्कूल में मेहनत का मिला सम्मान

शिक्षा में नवाचार शोध के लिए देवेंद्र वाघेला को दिल्ली की संस्था द्वारा भी सम्मानित किया गया।
मध्यप्रदेश से सीसीआरटी की ट्रेनिंग के लिए चयन हुआ। इनके मुताबिक ट्रेनिंग पूरी कर लेने से इसका सीधा लाभ भविष्य में बच्चों को मिलेगा। बहुत जल्द दिल्ली बुलाकर उन्हें भारत सरकार द्वारा इस ट्रेनिंग का प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। क्योंकि मध्यप्रदेश का प्रेजेंटेशन किया था। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, संस्कृति, परंपरा, खानपान, हस्तकला जैसी अहम जानकारियां सीसीआरटी ट्रेनिंग में दी गई। भारत सरकार द्वारा हैदराबाद से सीसीआरटी ट्रेनिंग ऑनलाइन 4 घंटे की अंग्रेजी में वर्चुअल हुई थी।जिसमें विभिन्न भाषाओं के गीत संस्कृति विशेषता सीखने का मौका मिला।

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