– विभागों में पिरियोडिकल तबादलों का असर नहीं ,आदेश के बाद भी सीट पर कुंडली मारे बैठे।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। लेंड फ़ॉर जॉब मामले में सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) के जांच दायरे में आने पर रेलवे में इस रैकेट में भर्ती रेलवे कर्मचारियों की भले ही फिलहाल जांच चल रही है। लेकिन इन्हें रतलाम मंडल में भी अब तक खूब उपकृत किया गया। रतलाम मंडल में अलग-अलग विभागों में कार्यरत ये कर्मचारी आर्थिक मामलों की सेंसेटिव पोस्ट पर भी जमे बैठे है। इन्हें एक साल पहले सीबीआई ने जांच के लिए दिल्ली तलब किया था। बावजूद इन्हें जिम्मेदार पद से हटाया गया। इसी तरह से मंडल कार्यालय के प्रमुख विभागों में भी सेंसेटिव पद पर पिरियोडिकल तबादलें के बाद भी चहेते कर्मचारी ठेकेदार की टेबलों पर जमे बैठे है। इससे भ्रष्टाचार तथा इससे जुड़े तार अधिकारी तक जुड़े रहने के साफ संकेत मिलने लगे है।
बता दें कि 3 दिसंबर 2025 को पश्चिम रेलवे मुख्यालय से सीबीआई के हवाले से आदेश जारी हुआ है। इसमें अवधेश कुमार सीएचओएस (स्टोर विभाग), अनिल कुमार डिप्टी सीटीआई (कमर्शियल), बाबुलाल राय ड्रेसर (रेलवे हॉस्पिटल), दिलीप कुमार राय (इलेक्ट्रिकल) व पप्पू कुमार टी/मेन-1 के नाम शामिल है। इन कर्मचारियों की जन्मतिथि, एज्युकेशन तथा इससे जुड़े सर्टिफिकेट जैसी वेरिफिकेशन डिटेल मांगी गई है। इसके बाद से संबंधित विभाग द्वारा कर्मचारियों के वेरिफिकेशन से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे है। इधर, बताया जा रहा कि इन कर्मचारियों में से एक कर्मचारी दूसरे दिन यानी 4 दिसंबर को अवकाश पर चला गया।
यह भी बता दें कि इस रैकेट की भर्ती में रतलाम सहित भारतीय रेलवे के दूसरे मंडल में भी कर्मचारी कार्यरत है। सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर कर्मचारियों पर सेवा से निष्काशन (रिमूव फ्रॉम सर्विस) कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।
डिप्टी सीटीआई को चेकिंग का इंचार्ज:- इधर, सूत्र बताते है कि सीबीआई द्वारा जारी लेटर में डिप्टी सीटीआई अनिल कुमार यादव का भी नाम है। यह कर्मचारी भी लेंड फ़ॉर जॉब मामले की जांच में शामिल है। चेकिंग कर्मचारी फिलहाल महू में कार्यरत है। डिप्टी सीटीआई पद यानी निचली ग्रेड के बावजूद इसे अपर ग्रेड सीटीआई की जिम्मेदारी सौंपकर चेकिंग इंचार्ज बनाया गया है। जबकि कुछ माह पूर्व 200 रुपए केश अधिक मिलने व ट्रैपिंग कार्रवाई के बाद चेकिंग कर्मचारी अनिल कौशल अभी भी नौकरी पर बहाल नहीं हुआ है।
इसी तरह इसी विभाग में लोअर ग्रेड के कर्मचारियों को जिम्मेदार पदों पर काबिज़ कर खूब उपकृत है।
तबादलों के बावजूद कुंडली मारे बैठे कर्मचारी:- इसी तरह से विभागों में आर्थिक मामलों से जुड़ी टेबल पर चार साल के आवधिक तबादलों की अवधि के बावजूद कर्मचारी कुंडली मारे बैठे है। इंजीनियरिंग विभाग में कार्यरत ओएस आरपी मीणा सहित कुछ और कर्मचारी ज्वलंत उदाहरण है। ओएस आरपी मीणा का कागजों पर तबादला तो कर दिया गया। लेकिन पिछले कई माह से टेंडर टेबल पर ही कार्यरत है। ऐसी अनियमितता के पीछे अलग-अलग स्वार्थ कारण माने जा रहे है। बताया जा रहा कि विभाग के जिम्मेदार व ठेकेदार में सांठगांठ के व्यवहार में कर्मचारी बीच की प्रमुख कड़ी है। बिल पास करने सहित अन्य कई कामों में ये सेतु की भूमिका निभाते आए। ठेकेदार के अनुनय-विनय के चलते भी कर्मचारी को अधिकारी स्वयं भी हिलाना नहीं चाहते।
