Logo
ब्रेकिंग
रतलाम रेल मंडल में ₹3.06 करोड़ का सफाई टेंडर निरस्त, वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं के आरोपों के बाद ... धामनोद के अर्जुन ने पहली बार में लक्ष्य भेदा....NEET-2026 में 581अंक हासिल कर बढ़ाया जिले का गौरव, प... ​रतलाम: रेलवे कॉलोनी में विक्षिप्त युवक का उत्पात, परेशान रहवासियों ने पकड़कर GRP के सुपुर्द किया तेज बारिश ने हजारों यात्रियों को ट्रेनों में फंसाया....रेल यातायात ठप, बामनिया में हंगामा, नामली में... नशे से दूरी जरूरी.....सेंट स्टीफन बीएड कॉलेज में नशामुक्ति पर परिचर्चा: विद्यार्थियों ने लिया नशे से... रेलवे बोर्ड का बड़ा अलर्ट: स्टेशनों पर छात्रों की हलचल और दिल्ली जाने वाली भीड़ पर पैनी नजर रखने के ... 'कुंभकर्णी बाबू से जवाब तलबी' .... यह सोता रहा और छूटने लगी थी ट्रेनें, यात्रियों ने तोड़ा था काउंटर... न्यूज़ जंक्शन-18 ख़बर का असर शुरू.... ट्रेनों की गति बढ़ाने की कवायद, 300 से अधिक अनुपयोगी स्टॉपेज हों... ​ WREU की ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता: सेवानिवृत्ति से ठीक 24 घंटे पहले लोको पायलट राकेश पुरोहित को ... ऐसी भी बड़ी कार्रवाई.....कर्मचारियों पर सख्ती बरतने वाले पूर्व सहायक कार्मिक अधिकारी पर गिरी गाज: अनि...

चार्ट प्रीपेड, कंफर्म बर्थ, चेहरों पर मुस्कान…रेल यात्रियों के इसी सुकूनभरे सफर के जतन में जूझते रहे

-37 साल का कामकाजी सफर, रिटायमेंट के आखरी स्टेशन तक सुरक्षित पहुंचे विजय गुप्ता
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्र में लोगों की सेवा करना आम तौर पर देखा जा सकता हैं। लेकिन शासकीय नौकरी में रहते ऐसा काम करने वाला बिरला ही शख्स होता है। ऐसा ही एक नाम रेलवे वाणिज्य विभाग में वीआईपी सेल में बतौर वाणिज्य अधीक्षक पद से रिटायर्ड हो रहे विजय गुप्ता का है। 37 सालों तक रेल सेवा के आखरी दशक तक वीआईपी सेल में काम कर ये रेल यात्रियों के सुरक्षित, बेहतर व शुभमयी यात्रा पूरी कराने के बखूबी सहभागी रहे है। ड्यूटी के दौरान इनकी अतिव्यस्तता कभी-कभी मानसिक तनाव में भले तब्दील होती रही। लेकिन चार्ट प्रीपेट होते व कंफर्म बर्थ का मैसेज पाते ही यात्रियों के चेहरों पर जो मुस्कान आती थी। इसे ही इन्होंने अपने जीवन की बड़ी खुशी माना।


जद्दोजहद व मशक्कत भरी वर्किंग को पूरा करने के दौरान विजय का एक ही लक्ष्य रहा। टाइम लिमिट में ट्रेनों की चार्टिंग कम्प्लीट करना व जरूरतमंदों को आपातकालीन कोटे में आरक्षित टिकिट पर कंफर्म बर्थ उपलब्ध करवाना। यहीं वजह है कि नियमों के तहत जरुरतों के मानिद असंख्य लोगों को हर साल कंफर्म सीट पर यात्रा पूरी कराने का पुण्यलाभ भी कमाया।
विजय के मुताबिक रोजाना जरूरतमंद लोग वीआईपी कोटे में बर्थ की उम्मीद में आवेदन लेकर आते थे। तब इनकी परेशानी चेहरों पर साफ दिखाई देती थी। इन्हें प्राथमिकता के मुताबिक अधिकारी को संज्ञान में देकर इसकी वास्तविकता से रूबरू करवाता। बल्कि बेहद जरूरतमंद को कंफर्म टिकट का लाभ भी दिलाने का भरपूर प्रयास किया जाता। यहीं वजह है कि अधिकांश शहरवासी इन्हें शक्ल, सूरत व नाम से बख़ूबी पहचानते रहे।
वाणिज्य अधीक्षक विजय गुप्ता की 37 वर्षीय रेलवे नौकरी के सफर की शुरुआत वर्ष 1988 में सिंग्नल व टेलीकम्युनिकेशन से रही। उस दौरान ऑटोमेटिक सिग्नलिंग या मोबाइल टेक्नोलॉजी का दौर न होने से रेलवे में परिचालन, संपर्क व संवाद के लिहाज़ से यह काम भी अहम हुआ करता था। अंतर्विभागीय विकल्प के चलते ये सालों पहले वाणिज्य विभाग में आ गए। इनकी काम करने की ललक को देखते इन्हें वीआईपी सेल की वर्किंग दी गई। निपुणता से काम करने पर हर अधिकारी ने इन्हें इस काम से पृथक नहीं होने दिया। इसके बाद से विजय सफर को अंजाम तक पहुंचाने के काम को निष्काम भाव से करते चले गए। वर्किंग के आखरी दिन 28 नवंबर को कार्यालयीन समारोह में डीआरएम अश्वनी कुमार ने इनका स्वागत, सम्मान किया। सीनियर डीसीएम हिना केवलरामानी ने इनके कामों की प्रशंसा की। वहीं कमर्शियल स्टाफ ने इनके सम्मान में बिदाई समारोह आयोजित किया। लोगों की बधाई संदेश का दौर जारी है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.