ये लापरवाही, रिटायर्ड पर भारी….मंत्रालय के आदेश के नियम में स्पष्ट उल्लेख फिर भी कर दी मनमानी, अब आरटीआई का सहारा
-ग्रेज्यूटी से अतिरिक्त भुगतान की काटी गई राशि पाने के लिए अभी भी भटक रहा रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई।
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। ग्रेज्यूटी से इंक्रीमेंट के त्रूटिवश अतिरिक्त भुगतान की राशि गलत तरीके से रिकवर कर लिए जाने के बाद इसे पाने के लिए रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई अनिल उपाध्याय अभी भी मंडल कार्यालय के चक्कर काटकर भटकने को मजबूर है। बावजूद अभी इसे लेकर सुनवाई नहीं की गई है। उपाध्याय ने मंत्रालय के आदेश के रूप में मजबूत साक्ष्य को आधार बनाकर अब आरटीआई लगाना भी शुरू की है। इसके बाद मामला दोबारा उच्च स्तर पर संज्ञान में लाए जाने की तैयारी में पीड़ित जुट गए है।
मालूम हो कि पिछले दिनों दाहोद में आए रेलमंत्री अश्विन वैष्णव से पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद द्वारा चर्चा कर उन्हें रिटायर्ड उपाध्याय के मामले में जानकारी दी थी। अब उन्हें बतौर सबूत दस्तावेज भेजे जाने की तैयारियां की गई है।
वर्ष 2024 के आदेश के बिंदू 4 में स्पष्ट उल्लेख:- मंत्रालय द्वारा वर्ष इस बारे में 15.7.2024 में आदेश जारी किया गया थ। इसके बिंदू नंबर 4 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। निर्णय लिया गया है कि हर कर्मचारी के मामले में 2 लाख रुपए तक के अधिक भुगतान की वसूली को रेल मंत्रालय रेलवे बोर्ड सदस्य वित्त-रेलवे बोर्ड की सहमति और अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेलवे बोर्ड के अनुमोदन से माफ किया जा सकता हे। 2 लाख रुपए से अधिक की वसूली माफी के प्रस्ताव को सदस्य वित्त/रेलवे बोर्ड की सहमति और अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी रेलवे बोर्ड के अनुमोदन से व्यय विभाग, वित्त मंत्रालय को भेजा जाना जारी रहेगा। सभी प्रस्ताव को प्रधान वित्त सलाहकार की सहमति और महाप्रबंधक के अनुमोदन से ही अग्रेसित किया जाए। लेकिन दूसरी ओर उपाध्याय सहित अन्य के मामलों में ऐसे प्रस्ताव क्यों नहीं भेजे गए यह भी बड़ा सवाल है।
लगाई गई 9 बिंदूओं की आरटीआई:- इधर, रिटायर्ड डिप्टी सीटीआई उपाध्याय ने अपने हक की दरकार में 9 बिंदूओं की आरटीआई लगाई है। इसमें ग्रेज्यूटी से काटे गए 1.75 लाख रुपए के प्रावधानों एवं नियमों की जानकारी मांगी गई है। वहीं पदोन्नति सहित अन्य बिंदूओं को भी लगाई गई आरटीआई में शामिल किया गया है।
जिम्मेदारों से वसूली जाए रिकवरी राशि:- मामले में पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद के जोनल संगठन मंत्री शिवलहरी शर्मा ने कहा कि उपाध्याय के प्रकरण में जब फरवरी-2023 में विभाग ने त्रूटि मान ली थी कि इंक्रीमेंट की गलत गणना से कर्मचारी के वेतन में ज्यादा राशि चली गई। फिर भी कटौती को लेकर जिम्मेदार सोए रहे। कर्मचारी के रिटायर्डमेंट के पूर्व के डेढ़ साल के अंतराल में भी रिकवरी नहीं की गई। अंतिम भुगतान में एकमुश्त राशि काटकर कर्मचारी के रिटायमेंट के समय को तनाव में तब्दिल कर दिया गया। रेलवे को पहली बार में ही लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों से यह रिकवरी की जाना चाहिए।
यह है पूरा गड़बड़ी का मामला:- कर्मचारी की सीटीआई वेतनमान 9300-34800-4200 के तहत 20.2.2015 को पदोन्नति हुई थी। पदोन्नति पर वेतन निर्धारण करते समय विभाग पे वेतनवृद्धि 15490 रुपए के स्थान पर 15550 रुपए कर दी है। यह त्रूटिपूर्ण गणना का भुगतान 10 साल तक यानी कर्मचारी के रिटायरमेंट वर्ष 2024 तक किया जाता रहा है।
