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जय विश्व वंदिनी शक्ति स्वरूपा

शक्ति स्वरूपा मां नारायणी।
दिव्य रूप लावण्यमयी कल्याणी।

नवरूप अष्टभुजाधारी जगदंबा।
कांति मय स्वरूप कितना आलौकिक सजा।

घट स्थापना कर होता भक्ति अर्चन।
घर-घर श्रद्धा सरिता से होता कीर्तन।

मां की ज्योति से जीवन जगमगाता।
शक्तिहीन कातर तेरे दर पर शीश नवाता।

शैलपुत्री ,ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा दिव्यरूपा।
कुष्मांडा ,स्कंदमाता ,कात्यायनी विविध स्वरूपा।

कालरात्रि ,महागौरी ,सिद्धिदात्री माता।
हर रूप वंदन, दुख हर सुख समृद्धि दाता।

धूप दीप नैवेद्य समर्पित, करे मंत्र उच्चारण।
सिंह वाहिनी शत्रु का करती नित संहारण ।

महिषासुर मर्दिनी पाप हरनी जय जय जग जननी।
त्रिशूल से हरती त्रि-शूल जय विश्व वंदिनी।

नवरात्रि पर्व है आस्था और उपासना का।
आओ सब मिल मनाए दिव्य शक्ति आराधना का‌ ।

-डॉ. गीता दुबे
से. नि. प्राध्यापक
रतलाम (मप्र)।

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माँ दुर्गे नव रूप तेरे

 

माँ शैलपुत्री!
आशीर्वाद दें हमें
नमन् करें।
माँ ब्रम्हचारिणी!
आए हैं तेरे द्वार
तू है कल्याणी।
माँ चन्द्रघण्टा!
बाट जोहती तेरी
विनती मेरी।
माँ कूष्माण्डा!
हैं अष्ट भुजाधारी
देती समृद्धि।
माँ स्कन्दमाता!
हैं पद्मासना देवी
मोक्ष दायिनी।
माँ कात्यायनी!
जग वंदन करे
सुख दायिनी।
माँ कालरात्रि!
बिखरे बाल काले
त्रिनेत्र धारी।
माँ महागौरी!
शिव अर्द्धांगिनी हैं
अभय देतीं।
माँ सिद्धिदात्री!
हैं माँ सिद्धि प्रदाता
सिंह वाहिनी।
माँ नव दुर्गे!
रूप निराले तेरे
तू है कल्याणी।

-डाॅ. शशि निगम
इन्दौर (मप्र)।

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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम
श्रीराम ही मेरे शक्ति के दाता
दर्शन मात्र से सारे सुख पाता।
जब ध्यान लगाएं हरदम तुझमें
पुनीत विचार सब समाए मुझमे।
श्री राम की छवि बड़ी निराली
कण -कण में समाई खुशहाली।
सारा जग होता तुझसे ही रोशन
प्राणी पाते धन धान्य और पोषण।
सांस सांस में है बसा नाम तुम्हारा
श्रीराम ही तो है बस मेरा सहारा।
हे श्रीराम सारा जग तो है तुम्हारा
जग में तुम बिन कोई नही है हमारा।
पूजन करो और बोलो जय श्री राम
दुःख दूर होगा मिलेगा सुख आराम।

-संजय वर्मा “दृष्टि”
मनावर, जिला धार (मप्र)
मोबा. 9893070756

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