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रतलाम रेलवे ट्रैफिक वर्कशॉप में ऐसी धांधलियां: मनमाने टीए क्लेम से सरकार को चपत, रेलवे ऑफिस परिसर बने गोदाम, विजिलेंस जांच और आउटसोर्सिंग की मांग

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे के रतलाम स्थित ट्रैफिक वर्कशॉप में वित्तीय अनियमितताओं, मस्टर रोल में गड़बड़ी और अधिकारियों की कथित सांठगांठ का एक गंभीर मामले सामने आते जा रहे है। मनमाने टीए क्लेम कर रेलवे धन का दुरूपयोग किया जा रहा। वहीं नियमित हाजरी तथा ऑफिस अनुशासन को दरकिनार कर सरकारी सिस्टम का खूब मख़ौल उड़ाया जा रहा है।

बता दें कि न्यूज़ जंक्शन-18 द्वारा अनियमितताओं से जुड़ी पहली ख़बर बुधवार को प्रकाशित की थी। जिसमें गोपनीय शिकायकर्ता ने ट्रैफिक वर्कशॉप में कमीशनबाजी से जुड़े मामले की शिकायत सीधे प्रधान कार्यकारी निदेशक (PED), रेलवे बोर्ड विजिलेंस (रेल भवन, नई दिल्ली) को भेजी। भ्रष्टाचार के पूरे तंत्र की निष्पक्ष जांच की मांग की है। निरंतर ख़बरों के प्रकाशन के बाद मामला सरकार के संज्ञान के लाने के लिए रेल मंत्री ट्वीट किए जा रहे है।

हाजिरी में फर्जीवाड़ा और बिना छुट्टी का ‘कीर्तिमान’:- दरअसल वर्कशॉप में अधिकारी व ठेकेदार के संरक्षण बूते पर इंचार्ज सहित चुनिंदा कर्मचारियों की पूरी तरह से मौज चल रही है। कर्मचारी कार्यस्थल से गायब रहते हैं। अगले दिन आकर बैकडेट में मस्टर रोल में हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। आश्चर्यजनक पहलू यह उजागर हुआ है कि वर्तमान इंचार्ज ने पिछले एक साल में एक भी दिन का आधिकारिक अवकाश नहीं लिया है। जिसे जांच का मुख्य बिंदु बनाया गया है।

ठेकेदारी प्रथा की आड़ में रेलवे संसाधनों का दुरुपयोग:- शिकायतकर्ता के अनुसार, पूरा सिस्टम ठेकेदार के प्रभाव में काम कर रहा है। नियमानुसार ठेका होने के बाद साइन बोर्ड या यात्री सुविधाओं से जुड़े सूचनात्मक बोर्ड लगाने की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। इसके विपरीत, इन कार्यों को पूरा करने के लिए रेलवे के पक्के कर्मचारियों को भेजा जा रहा है। आरोप है कि वर्कशॉप के कुछ चहेते कर्मचारी एक-दो बोर्ड लगाने के बहाने बाहर जाते हैं और 100 प्रतिशत ट्रैवलिंग अलाउंस (TA) क्लेम कर लेते हैं। यदि मंडल रेल प्रबंधक स्तर पर ही निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो रेलवे को चूना लगा रहे इस सिंडिकेट गिरोह और आर्थिक अनियमितता करने वालों का पर्दाफाश हो सकता है।

ठेकेदार का गोदाम बना ट्रैफिक वर्कशॉप:- जिस तरह इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की संरक्षक में रेलवे क्वार्टर को ठेकेदारों ने गोदाम बना रखे है। इसी तरह से ट्रैफिक वर्कशॉप को भी ठेकेदार ने गोदाम शक्ल दे दी। खरीदी के नाद ठेकेदार द्वारा सामग्री को अपने अधीन कर स्टोर इंतजाम करने चाहिए। लेकिन सीधे वरिष्ठ अधिकारी से तगड़ी सांठगांठ के चलते शासकीय ऑफिस वर्कशॉप को ही गोदाम बना दिया गया है।

जांच के इन बिंदुओं पर जांच की दरकार

– औचक निरीक्षण: रतलाम ट्रैफिक वर्कशॉप का तत्काल सरप्राइज इंस्पेक्शन कर धरातली स्थिति देखी जाए।
– दस्तावेजों की जांच: जनवरी 2026 से अब तक के उपस्थिति रजिस्टर, TA बिलों और ठेकेदार के सप्लाई मस्टरों की गहन स्क्रूटनी हो।
– कड़ी कार्रवाई: दोषी अधिकारियों, प्रभारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं।
– पूर्ण आउटसोर्सिंग: यदि अधिकारी या सुपरवाइजर जवाबदेही तय करने से बचते हैं, तो वर्कशॉप का पूर्ण रूप से ठेकेदारी (आउटसोर्सिंग) में विलय कर दिया जाए।

– रिटायर्ड की एंट्री बंद रहे: ट्रैफिक वर्कशॉप में वर्तमान में इंचार्ज MCF (लोहार ग्रेड) हरिप्रसाद लोट है।।इसलिए रिटायर्ड इंचार्ज अहमद शेख की ऑफिस में एंट्री प्रतिबंधित की जाएं।

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