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करोड़ों की लागत पानी-पानी….नया रेलवे मालगोदाम बारिश में बेहाल, लापरवाही से लाखों का माल दांव पर

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रेलवे प्रशासन की बड़ी लापरवाही और घटिया प्रबंधन का एक और नमूना सामने आया है। स्थानीय स्तर पर व्यापारियों और माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए करोड़ों रुपए की भारी-भरकम लागत से धौंसवास में तैयार किया गया नया रेलवे मालगोदाम बारिश के मौसम में पूरी तरह बेहाल हो चुका है। करोड़ों खर्च करने के बाद भी यहाँ माल की सुरक्षा भगवान भरोसे है। दूसरी ओर पिछले तीन दिनों से गोदाम पर ही माल रखा है। क्लियरेंस नहीं हुआ तो संबंधित फर्म को डेमरेज का डर भी नही।।ऐसे में मिलीभगत की भी आशंका है।

लाखों का माल भीगने की कगार पर, सुरक्षा के इंतजाम शून्य:-मालगोदाम परिसर में बुनियादी सुविधाओं और ड्रेनेज (जल निकासी) की भारी कमी देखी जा रही है। बारिश का पानी मालगोदाम के आसपास और कई हिस्सों में जमा हो रहा है। जिससे वहाँ रखा कीमती सामान और व्यापारियों का माल भीगने और खराब होने की कगार पर है। टीन शेड की लीकेज और खुले में पड़े माल की सुरक्षा के लिए रेलवे की ओर से कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।

समय पर नहीं उठ रहा माल, पैदा हुआ जाम का संकट:- समस्या सिर्फ जलजमाव तक सीमित नहीं है। मालगोदाम से समय पर माल का उठाव (क्लियरेंस) नहीं हो पा रहा है। अव्यवस्था के चलते मालगाड़ियों से उतरा सामान दिनों तक वहीं डंप पड़ा रहता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि समय पर लेबर और ट्रांसपोर्ट की सुचारू व्यवस्था न होने और रेलवे प्रबंधन की सुस्ती के कारण माल उठाने में भारी देरी हो रही है। जिससे नया स्टॉक रखने की जगह भी नहीं बच रही है।

अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीनता:- इस पूरे मामले में स्थानीय रेल अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीनता साफ नजर आ रही है। नया मालगोदाम चालू करने से पहले बारिश से बचाव के जो पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे। उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। जब व्यापारी अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं, तो अधिकारी केवल आश्वासन का झुनझुना थमा रहे हैं।
फर्म व्यापारियों का कहना है कि बारिश में हमारा लाखों का सामान सड़ने लगा है। इसका हर्जाना कौन देगा? अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।” इस मामले में जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार पांडेय का कहना है कि मालगोदाम पर अभी लगातार खाद की गाड़ियां आ रही है। इसलिए दबाव ज्यादा है। माल समय पर उठाया भी जा रहा है। पार्टियों द्वारा समय पर बेवजह माल नहीं उठाने पर डेमरेज वसूला जाता है। साइडिंग पर बारिश के बचाव के लिए और भी इंतज़ाम किए जाएंगे।

मुख्य समस्याएं जो खड़े कर रही हैं सवाल:
– जलजमाव: परिसर में पानी निकासी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं।
– शेड और कंक्रीटीकरण में खामियां: करोड़ों की लागत के बावजूद पहली ही बारिश ने निर्माण कार्य की पोल खोल दी है।
– धीमी रफ्तार: माल के उठाव में देरी पर कितना डेमरेज लगाया जा रहा। यदि मामले मेलजोल है तो इसकी जांच होना चाहिए।

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