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“मौत है उसकी, जिसका जमाना करे अफसोस… यूं तो सभी आए हैं मरने के वास्ते।”

‘श्रद्धांजलि’ : सरदार गुरनाम सिंह डंग।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। “हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश विधि हाथ”….।रामचरितमानस की यह पंक्ति हमें स्मरण कराती है कि जीवन और मृत्यु मनुष्य के नियंत्रण में नहीं होते ! परंतु महापुरुष लोग इसकी व्याख्या करते हुए आगे कहते है कि ‘जन्म से अंतिम क्षण तक की यात्रा को अर्थपूर्ण और सार्थक बनाना व्यक्ति के अपने हाथ में होता है। जो व्यक्ति इस सत्य को आत्मसात कर लेते हैं, वे समाज के लिए प्रकाशपुंज बन जाते हैं।
सरदार गुरनाम सिंह डंग ऐसे ही व्यक्तित्व का नाम है , जिन्होंने अपने जीवन को शिक्षा और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
रतलाम का शिक्षा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अग्रणी रहा है। जिस दौर में बालिकाओं को विद्यालय भेजना कठिन और साहसिक निर्णय माना जाता था। उस समय 1906 में पृथक प्राथमिक कन्या शाला का प्रारंभ होना तथा 1904 में सेंट्रल कॉलेज (तत्कालीन दरबार हाई स्कूल) में ड्राइंग की कक्षाओं का संचालन शुरू होना इस क्षेत्र की प्रगतिशील सोच का प्रमाण है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में सरदार गुरनाम सिंह डंग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
शहर आज गर्व से कह सकता है कि जिन महानुभावों—सरदार राजेंद्रसिंह, सरदार हृदयाल सिंह, सरदार महेंद्रपाल सिंह, सरदार दर्शन सिंह गुरुदत्ता—ने जिस पौधे को अपनी श्रम-साधना से रोपा था, उसे सरदार गुरनाम सिंह डंग ने अपने चौदह वर्षीय अध्यक्षीय कार्यकाल में विशाल वटवृक्ष का रूप प्रदान किया। उन्होंने बिना आत्ममुग्ध हुए, बिना किसी प्रदर्शन के, अपने कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाया। उनके कार्यों की प्रशंसा होने पर वे विनम्रता से कहा करते थे कि यह सब वाहे गुरु की कृपा और उनके सहयोगियों—अजीत छाबडा,देवेंद्र सिंह वाधवा, हरजीत चावला, हरजीत सलूजा, सतपाल सिंह डंग, सुरेंद्रसिंह भामरा, धर्मेन्द्र गुरुदता, और कुलवंत सिंह सग्गू—के साथ के कारण संभव हो पाया।
उनकी अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब और नम आँखों से छलकते भाव इस बात के साक्षी है कि उन्होंने कितने लोगों के जीवन को स्पर्श किया था। उनकी सहजता, सरलता और आत्मीयता के किस्से हर जुबान पर थे। किसी ने सच ही कहा है
“मौत है उसकी जिसका जमाना करे अफसोस,
यूं तो सभी आए हैं मरने के वास्ते।”
सरदार गुरनाम सिंह डंग के संसार से विदा होने पर समाज के हर वर्ग को गहरा दुःख हुआ है। उनका जीवन सेवा, समर्पण और विनम्रता की अमिट मिसाल बनकर सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
हम सबकी प्रार्थना है कि वाहे गुरु दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा प्रदान करे
कैलाश व्यास, चिंतकशिक्षाविद।

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