न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। निराश्रित रूपी प्रभु जी की सेवा को सर्वोपरि मानव सेवा माना गया है। इसलिए जब इनकी सेवा के लिए कुछ हाथ उठे, कुछ कदम आगे चले तो पीछे कारवां चलता गया। अब कई हाथ इस काम में जुट गए तो शारीरिक रूप से परेशान व मानसिक पीड़ित उन निराश्रितों के चेहरों पर रौनक दिखाई देने लगी है।
दरअसल ‘सेवापथ’ ऐसी ही सेवार्थ संस्था है। इसके माध्यम से हर माह व हर दिन सेवा कार्य चलाए जा रहे है। सेवाकर्ताओं का मिशन अब रतलाम से निकलकर अन्य शहरों तक फैलने लगा है। मंगलवार को सेवापथ से जुड़े लोगों ने अपना घर आश्रम में जाकर वहां रह रहे लोगों को दवाई सहित अन्य जरूरी सामग्री का वितरण किया गया। तब भी इनके चेहरों पर संतुष्टि का भाव देखा गया।
दरअसल सेवापथ की स्थापना वर्ष 2000 में रतलाम रेल मंडल में कार्यरत रहे राम प्रजापति व टीम द्वारा की गई थी। तब से मानव सेवा का क्रम अनवरत जारी है। सेवा के इस कारवां से लोग जुड़ते चले जा रहे है। वर्तमान में रतलाम के अलावा मुंबई, दिल्ली, चेन्नई व कोलकाता के अलावा अन्य शहरों में भी संस्था के जरिए सेवा के प्रकल्प चलाए जा रहे है।
प्रभु सेवा मानकर जुड़ रहे लोग:- टीम सदस्यों का मानना है कि सेवापथ के माध्यम से की जा रही मानव सेवा एक तरह से प्रभु सेवा ही है। इसके लिए बढ़ते हमारे अतुलनीय कदम हमें शक्ति देते है। सेवापथ पर अनवरत आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देते है। वर्तमान में दिल्ली रेलवे बोर्ड में कार्यरत श्रीराम प्रजापति का कहना है कि अन्नसेवा से की गई जनसेवा एक तरह से प्रभु सेवा ही है। जो आत्मा रूपी जीवंत मन को संतुष्टि और शांति देती है। परमपिता परमेश्वर का आशीष प्राप्त करवाती है। आज के इस सेवा के अवसर पर कई प्रभुजी जो शारीरिक और मानसिक तौर पर अस्वस्थ है। उनके चेहरों पर संतुष्टि के भाव दिखाई देते है।
हर माह निराश्रितों को करा रहे भोजन, दे रहे जरूरी सामग्री:- संस्था द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य सेवा कार्यों के साथ हर माह निराश्रितों को भोजन कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, जरूरी सामग्री भी वितरित की जाती है। 24 मार्च को रतलाम के कमल किशोर मंडल, नरेंद्र सिंह चौहान व समीर तारणेकर सहित अन्य साथियों द्वारा ‘अपना घर आश्रम’ पहुंचकर वहां रहने वाले लोगों को भोजन कराया। साथ ही अन्य साथियों द्वारा दवाई भी वितरित की।