यहां भी अनदेखी…गंदगी की समस्या पर सुनवाई नहीं, आखिर ट्वीट से ही शुरू हुआ समाधान, पार्किंग की भी समस्या बरकरार
-डीआरएम ऑफिस के एसबीआई बैंक एरिया से बहती गंदगी को लेकर बैंक ग्राहक ने किया ट्वीट
न्यूज जंक्शन-18
रतलाम। लगता है गूंगे-बहरे सिस्टम में शिकायत के बाद ही समाधान की सुध ली जाती है। रतलाम रेल मंडल कार्यालय परिसर में फैली गंदगी को लेकर ऐसा ही हुआ। मंडल स्तर पर स्वच्छता का बिगुल बजाकर साफ सफाई की दुहाई देने वाले अधिकारी मंडल कार्यालय में ही स्वच्छता को लेकर लापरवाह बने हुए थे। कार्यालय परिसर में ही एसबीआई ब्रांच स्थित है।इसके सामने लंबे समय से गंदगी बहकर सीधे पिछले हिस्से के इंट्री गेट वाले एरिया की सड़क तक फैल रही थी। इसकी सूचना इंजीरियरिंग विभाग के अधिकारियों को कई बार दी गई। लेकिन इसे लेकर कोई सुनवाई नहीं की गई। अंततः बैंक के ग्राहक द्वारा रेलमंत्री को ट्वीट किया गया। तब जाकर स्थाई ड्रेनेज के इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि इस एरिया में बेरिकेटिंग किए जाने से बैंक के ग्राहकों के अलावा रेलवे के कामों के लिए मंडल कार्यालय आ रहे लोगों को अपने वाहन झड़े करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल डीआरएम ऑफिस के पिछले गेट परिसर में टीआरडी बिल्डिंग है। बिल्डिंग के टॉयलेट से जुड़ा ड्रेनेज जाम होने से गंदगी चैंबर से बाहर निकलकर सड़क तक आकर बह रही थी। इसकी शिकायत इंजीनियरिंग विभाग के सहायक इंजीनियर से की गई। लेकिन इस ओर लंबे समय से ध्यान नहीं दिया गया। इससे बैंक के ग्राहकों के अलावा आम कर्मचारी सहित अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। बैंक के ग्राहक एडवोकेट अमित पांचाल ने बुधवार को मोबाइल कैमरें से फोटो खिंचकर शिकायत रेलमंत्री को ट्वीट के माध्यम से कर दी। इसके बाद जागे अधिकारी ने गुरुवार को ड्रेनेज का काम शुरू किया।
ब्यूटी पार्लर के लिए बेरिकेटिंग:- मंडल कार्यालय के पिछले हिस्से के एंट्री गेट के बाद से की गई बेरिकेटिंग अभी भी परेशानी बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व डीआरएम द्वारा महिला समिति द्वारा संचालित ब्यूटी पार्लर के लिए ये परेशानी खड़ी कर दी गई। दरअसल इस एरिया में वाहनों की पार्किंग रोकने के लिए एंगल की बेरिकेटिंग कर दी गई। बल्कि आगंतुकों के लिए परिसर में गाड़ी पार्क करना की मनाही के लिए आरपीएफ गार्ड की तैनाती भी कर दी गई है। इस बदइंतजामी के चलते लोग मुख्य डाट की पुल सड़क के आसपास जहां-तहां अपने वाहन खड़े करने को मजबूर है। इधर, आरपीएफ का कहना है कि उन्हें रेल प्रशासन के आदेश का पालन करना है।