रतलाम मंडल में ‘छोटे साहबों’ के बड़े कारनामे: किसी पर चढ़ा ‘सिलसिला’ का सुरूर, तो कोई खा गया दिल्ली में गच्चा!
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम का रेल विभाग इन दिनों पटरियों से ज्यादा अपने ‘असिस्टेंट साहबों’ के किस्सों को लेकर पटरी से उतरा हुआ है। आलम यह है कि छोटी श्रेणी के इन अफसरों के जलवे बड़े साहबों पर भी भारी पड़ रहे थे। लेकिन जब कारनामों का घड़ा फूटा तो बड़े साहबों को नकेल कसने के लिए मैदान में उतरना ही पड़ा।
हे प्रभु जगन्नाथम, आज किस्सों की शुरुआत इन छोटे अफ़सरो से ही करना पड़ रही है।
‘नायर से नायब’ बनने का चढ़ा बसंती बुखार:- कमाई वाले विभाग के एक कमर्शियल वाले असिस्टेंट साहब पर इन दिनों ‘बसंती’ रंग कुछ ज्यादा ही गाढ़ा चढ़ा हुआ था। साहब चले थे ‘नायर से नायब’ बनने। लेकिन उनकी इस बदमिजाजी की खबर जैसे ही बड़े यानी मंडल के मुखिया साहब तक पहुंची। उन्होंने बिना देर किए नकेल कस दी। नतीजा यह हुआ कि अहिल्या बाई की नगरी (इंदौर) में रंग जमा रहे साहब को सीधे 110 किलोमीटर दूर रतनपुरी यानी रतलाम मुख्यालय का बुलावा थमा दिया गया। अब साहब रतलाम में बैठकर अपनी ‘बसंती’ खुमारी उतार रहे हैं।
इंदौर जैसे ‘नागर’ से रतलाम जैसे ‘नगर’ तक की यात्रा के बाद इन साहब की अभिलाषा है कि ये अब रतलाम मंडल से कही दूसरे मंडल की यात्रा करें।
कंट्रोल ऑफिस में ‘सिलसिला- पार्ट 2’ की शूटिंग की तैयारी में थे साहब:- दूसरा मामला ट्रेनों को चलाने यानी ऑपरेटिंग वाले एक निचले अफसर से जुड़ा है। साहब खुद को किसी ‘वीर’ से कम नहीं समझते थे। कंट्रोल ऑफिस को ही फिल्म का सेट बनाकर ‘सिलसिला-पार्ट 2’ की पटकथा लिखने में जुटे थे। रेखा और अमिताभ की फिल्मों जैसा माहौल बनाने वाले इन साहब की शिकायतों का जब अंबार लगा। तो बड़े साहबों का पारा चढ़ गया। नतीजा? साहब का रतलाम से सीधे दूसरे मंडल में तबादला कर दिया गया। अब ‘वीर’ साहब नए मंडल में जाकर अपनी पटकथा के नए पन्ने तलाश रहे हैं।
दिल्ली में चंदन का टीका और मिला करारा जवाब:- इसी विभाग में तबादलों के इस दौर में पिछले माह बाहर से रतलाम आए एक नए साहब की अगवानी का किस्सा तो सबसे ज्यादा चटखारे लेकर सुना जा रहा है। यह मामला ऑफिस में बात-बात पर ‘राधे-राधे’ का जाप करने वाले और माथे पर भारी-भरकम चंदन का लेप लगाकर घूमने वाले एक स्थानीय कथित राधे बाबा का है।।ये नए साहब की ‘अभूतपूर्व’ आगवानी करने रतलाम से सीधे दिल्ली स्टेशन जा पहुंचे। इन साहब को भी ग्रिप में जो लेना था।
जैसी ही नए साहब दिखे, हमारे ‘राधे बाबा’ चंदन की डिब्बी निकालकर उनके माथे पर टीका लगाने आगे बढ़े। लेकिन नए साहब भी कम छांटू नहीं निकले! उन्होंने तुरंत हाथ रोकते हुए कहा “अरे भाई, अभी रतलाम तो आने दो, फिर आपसे खूब लेप लगवाएंगे!”
हे प्रभु, अब रतलाम रेल मंडल के गलियारों में यही चर्चा है कि ‘छोटे साहबों’ के ये रंग-रूप कब तक बरकरार रहते हैं। बड़े साहबों की यह सख्ती आगे क्या नया रंग दिखाती है!
पीईटी में दौड़ने वालों के नंबर लिए, बाद में मिलाएंगे नंबर:- रेलवे ग्रुप-डी की भर्ती में फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (पीईटी) में भले ही फर्जी लोग मैदान में दौड़ने से पहले पकड़ा गए। लेकिन कभी नी पकड़ाने वाले रतलामी हुनरबाज अब इनसे भी अपना हुनर दिखाने को आतुर है। दरअसल दौड़ के पास होने के बाद अभ्यर्थी मौके से रवाना होने लगे। तब हमारे यहां रेल इंजिन वाले ऑफिस की दूसरी मंजिल पर विराजित रहने वाले कुछ हुनरबाजों ने सफल हुए अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर ले लिए। उन्हें बधाई देते हुए आश्वासन दे दिया कि बाद के काम मे भी तुम्हें हरि झंडी दिखा देंगे।
दरअसल बेचारे कर्मचारी सभी जगह से बच जाते है। लेकिन दूसरी मंजिल पर जाने के बाद उन्हें लेनदेन वाली आरी से कटने को मजबूर होना पड़ता है। ये खिलाड़ी भी अपने खेल में ऐसे माहिर है कि कोई भी उनके घापे में आए, तब उन्हें भेंट तो हरसंभव चढ़ानी ही पड़ती है। इसके बिना किसी का काम देखे हो तो जाए…?
दूसरी ओर सुनने में आया है कि 1 से 9 तारीख तक मैदान में दौड़ने वाले बेचारे लड़के पस्त होते रहे। लेकिन इनकी दौड़ कराने वाले जिम्मेदार शाम को बोतल (सोमरस नही पानी) पीकर अपनी थकान उतारते रहे। बेचारा ‘राजू’ इंतजाम करते-करते चकरघिन्नी हो गया। थोड़ी भी देर होने पर मंडली वाले गाना गाने लगे कि ”ओए राजू देर न करियो….दिल टूट जाता है”।
