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रेलवे स्टेशन पर गुणवत्तापूर्ण डेवलपमेंट के दावे खोखलें: रतलाम में हल्की बारिश में ही नए प्लेटफॉर्म नंबर 8 का धंसा फर्श, करोड़ों के काम का मख़ौल

न्यूज़ जंक्शन-18
​रतलाम। दो से तीन साल के कार्यकाल में ठेकेदारी काम में कमीशनखोरी के नाम पर लाखों रुपए जेब में डालकर रतलाम से जाने की मंशा वाले रेल अफसरों ने अनैतिकता की हद पार कर ली।
इसका नज़ारा पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल मुख्यालय के जंक्शन पर चल रहे डेवलपमेंट में साफ देखा गया है। आधुनिकीकरण के नाम पर यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर घटिया निर्माण कार्य सामने आया है। कुछ दिनों या चंद माह पहले बनाए गए इस प्लेटफॉर्म का फर्श पहली हल्की-फुल्की बारिश में ही धंस गया। इससे न सिर्फ रेलवे प्रशासन के दावों की पोल खुल गई है। बल्कि विकास कार्यों के नाम पर हो रहे कथित भ्रष्टाचार पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी एजेंसी द्वारा निगरानी में लापरवाही भी उजागर हुई है। मार्च 2026 के आख़री सप्ताह में सीआरएस निरीक्षण हुआ था। वर्क्स का फिट सर्टिफिकेट देने के बाद इसे रेलवे ने हैण्डओवर कर प्लेटफॉर्म को अधीन किया था।

बता दें कि इससे पहले रेलवे कॉलोनी में इंजीनियरिंग विभाग के जिम्मे सीसी रोड निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थी। बगैर ज़मीन खुदाई के सीमेंट सड़क बना दी गई है।

लाखों-करोड़ों का बजट, पर पहली परीक्षा में ही फेल:- रतलाम मंडल के रतलाम सहित अन्य स्टेशनों के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 350 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से पुनर्विकसित के फंड जारी हुआ है। इसे देख पिछले व वर्तमान अधिकारियों की बांछे खिल गई थी। नए काम में अन्य डेवलपमेंट के अलावा प्लेटफॉर्म नंबर 7 से जुड़े प्लेटफॉर्म नंबर 8 का भी निर्माण कराया गया। संबंधित विभाग की देखरेख में ठेकेदारों द्वारा किए गए काम की हकीकत कुछ अलग ही सामने आ गई। प्लेटफॉर्म के फर्श का एक बड़ा हिस्सा धंस गया। फर्श उखड़ गए तथा जगह-जगह से सीमेंट निकलने लगी। जिससे प्लेटफॉर्म गड्ढानुमा हो गया। यदि प्लेटफॉर्म हैण्डओवर कर उपयोग शुरू किया जाता तो भागमभाग में कोई भी यात्री हादसे का शिकार हो सकता था।

विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की जुगलबंदी पर उठे सवाल:- इस घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों और रेल यात्रियों में भारी आक्रोश है। आरोप लग रहे हैं कि इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत के कारण निर्माण कार्य में जमकर लापरवाही बरती गई है। भ्रष्टाचार की बिंदुवार पोल।
-घटिया सामग्री का इस्तेमाल: फर्श का धंसना साफ तौर पर दर्शाता है कि बेस तैयार करने में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। तकनीकी मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।

-निगरानी का अभाव: रेलवे के इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन विभाग के जिम्मेदारों ने काम के दौरान ठेकेदारों के काम की सही तरीके से मॉनिटरिंग (जांच) नहीं की। जिसका खामियाजा अब सामने आ रहा है।

यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे?:- रतलाम एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है, जहां रोजाना हजारों यात्रियों का आना-जाना होता है। ऐसे में नए नवेले प्लेटफॉर्म पर इस तरह की लापरवाही यात्रियों की जान से खिलवाड़ के समान है। लोग रेलवे से पूछ रहे हैं कि “आखिर इस भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन है?”। मामले में पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद के जोनल संगठन महामंत्री व जेडआरयूसीसी मेंबर  शिवलहरी शर्मा ने कहा कि मोदी सरकार रेलवे को डेवलपमेंट सहित अन्य कामों के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध करवा रही है। यह राशि भ्रष्टाचार की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर 8 का फर्श धंसना रेलवे के निर्माण कार्यों में ईमानदारी के दावों पर सवाल खड़ा कर रही है। मामले में डीआरएम को सख्त होना जरूरी है।

पिछले दिनों बकरापुल पर बनाई घटिया सड़क:- पिछले दिनों रेलवे कॉलोनी बकरा पुल की ओर ठेकेदार द्वारा बनाई गई सीमेंट कंक्रीट सड़क बगैर गुणवत्ता मानकों के मान से बनाई गई। इस सड़क में न तो बेहतर बेस तैयार कर खुदाई की गई। मिट्टी के ऊपर ही सीधे सीमेंट, रेत व क्रंकीट का घोल डाल दिया गया। कॉलोनियों में घटिया निर्माण के ऐसे शासकीय फंड दुरुपयोग के कई मामले है।

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