मक्सी-पीर उमरोद रेल हादसे की एसएजी जांच शुरू: मौके पर पहुंची टीम, ट्रैकमैन सहित स्टेशन मास्टर्स के लिए बयान
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम/मक्सी। मक्सी-पीर उमरोद रेलवे सेक्शन में पिछले दिनों हुए भीषण रेल हादसे की उच्चस्तरीय (एसएजी) जांच शुरू हो गई। गुरुवार को जांच टीम ने घटनास्थल का जायजा लेने के साथ ही कर्मचारियों के बयान दर्ज किए।
इसके बाद दोपहर बाद रतलाम डीआरएम कार्यालय पहुंचकर संबंधित सेक्शनों के स्टेशन मास्टर्स और अन्य कर्मचारियों से भी लंबी पूछताछ की गई। इस हादसे के बाद रेलवे महकमे में कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उज्जैन से टावर वैगन में पहुंचे अधिकारी, घटनास्थल का लिया जायजा:- एसएजी स्तर की इस उच्चस्तरीय जांच के लिए अधिकारियों की टीम विशेष रूप से उज्जैन से टावर वैगन में सवार होकर संबंधित सेक्शन पर पहुंची।
<जांच टीम में प्रमुख रूप से शामिल अधिकारी कन्हैया झा, चीफ ट्रैक इंजीनियर (CTI), दिनेश कुमार जैन, चीफ इलेक्ट्रिक इंजीनियर (CEE), कुंजीलाल मीणा, एडीआरएम (ऑपरेशन) तथा पीयूष पांडे, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (सीनियर डीईएन, समन्वय) सहित मंडल कार्यालय
अधिकारियों ने दुर्घटना स्थल का मुआयना किया। मौके पर मौजूद ट्रैकमैन सद्दाम से चर्चा की। इस दौरान कर्मचारी ने घटना को लेकर अपने सीनियर इंचार्ज (CPWD और PWI) के संबंध में अहम जानकारियां साझा कीं। चर्चा में कर्मचारी सद्दाम भावुक हो गए।
रतलाम में स्टेशन मास्टर्स और अधिकारियों से पूछताछ: घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद जांच टीम दोपहर को रतलाम पहुंची। रतलाम स्थित डीआरएम ऑफिस में मक्सी, बेरछा और आसपास के स्टेशनों के स्टेशन मास्टर्स को तलब किया गया था। टीम ने उनसे सिलसिलेवार पूछताछ की और घटना से जुड़े तमाम पहलुओं के बयान दर्ज किए। रेलवे बोर्ड और जोनल अधिकारियों द्वारा इस मामले की हर एंगल से गहराई से जांच की जा रही है ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
16 अक्टूबर को गोवा एक्सप्रेस की चपेट में आए थे दो कर्मचारी:- 16 अक्टूबर 2026 को मक्सी-पीर उमरोद सेक्शन के किलोमीटर 100/6-8 डाउन लाइन पर एक दर्दनाक हादसा हुआ था। पुश ट्रॉली और ट्रेन संख्या 12780 (गोवा एक्सप्रेस) की चपेट में आने से रेलवे के दो समर्पित कर्मचारी भगवान सिंह बिलमा और दिलीप जायसवाल की अकाल मृत्यु हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद से ही रेलवे कर्मचारियों और विभिन्न यूनियनों में भारी आक्रोश व्याप्त था। जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने एसएजी जांच के आदेश दिए थे।
कैडर जानकारों का मानना है कि मैदानी अमले को प्रशासनिक कार्यों और बंगलों पर अटैच करने के कारण सेफ्टी से जुड़ा मूल काम प्रभावित हो रहा है, जिसका खामियाजा ऐसी दर्दनाक दुर्घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
उल्लंघन और बाबुओं की तरह अटैचमेंट पर गंभीर सवाल:- घटना के सामने आने के बाद से ही मक्सी-पीर उमरोद सेक्शन की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल और अनियमितताएं सामने आ रही हैं:
गलत कैडर से कराया जा रहा था काम: प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के वक्त जिन कर्मचारियों से ट्रॉली पुशिंग का काम लिया जा रहा था, उनका औपचारिक कैडर ट्रॉलीमैन का नहीं था।
कार्यालयों और बंगलों पर अटैचमेंट: एक तरफ जहां मैदानी कामों के लिए योग्य कर्मचारियों की कमी है। वहीं ट्रॉलीमैन कैडर के कई कर्मचारियों को कथित तौर पर डीआरएम ऑफिस में सीनियर डीईएन (कोर्डिनेशन) पीयूष पांडे के अधीन विभिन्न सेक्शनों में अटैच कर उनसे बाबूगीरी और सहायक के कार्य कराए जा रहे हैं।
डीआरएम ऑफिस के इंजीनियरिंग विभाग में अटैच: विभाग में ट्रैकमैन तथा ट्रॉलीमैन की फेहरिस्त लंबी है, जिन्हें मूल काम से हटाकर इनसे दफ्तरों की चाकरी करवाई जा रही। इसमें एईएन ऑफिस, ड्राइंग सेक्शन, ब्रिज सेक्शन, वर्क्स एकाउंट्स, अफ़सर प्यून, सीटीए ऑफिस सहित कुछ कर्मचारी को गतिशक्ति सेक्शनों में नियुक्त कर दिया गया।
इंजीनियरिंग विभाग में खींचतान: डीआरएम कार्यालय के इंजीनियरिंग विभाग में इन अटैच कर्मचारियों को लेकर आपसी खींचतान और विवाद की स्थिति भी समय-समय पर बनती रही है।
घरेलू कार्यों में दुरुपयोग का आरोप: रेल संगठनों द्वारा लगातार यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि भारतीय रेल की रीढ़ कहे जाने वाले ट्रैकमैन और ट्रॉलीमैन कर्मचारियों से सीनियर अधिकारियों से लेकर एसएसई स्तर के अफसरों के बंगलों पर घरेलू काम लिए जा रहे हैं।
