महू-निमारखेड़ी रूट पर लोको पायलटों लेकर जा रही रेलवे की अनुबंधित कार दुर्घटनाग्रस्त, ग्रामीणों ने कर्मचारियों को बंधक बनाया, बिना कमर्शियल प्लेट
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम/महू। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल अंतर्गत आने वाले निमारखेड़ी सेक्शन में मालगाड़ी संचालन के लिए लोको पायलट (क्रू मेंबर्स) को ले जा रही रेलवे की एक अनुबंधित कार मंगलवार सुबह सड़क हादसे का शिकार हो गई। हादसा तब हुआ, जब महू से कर्मचारियों को लेकर जा रही कार की टक्कर एक वैगन-आर कार से हो गई। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में बड़ा हादसा टल गया।
जानकारी के मुताबिक घटना एनएसपीएन साईडिंग से 8 किलोमीटर पहले हुई। महू से अर्टिका कार से CLI जी एस वर्मा तथा लोको पायलट उमाशंकर पेडवा को निमारखेड़ी वर्किंग के लिए ले जाया जा रहा था। घटना में वर्मा को शरीर के अलग अलग हिस्से में चोंट आई। घटना के बाद ग्रामीणों ने बंदी बना लिया तथा बदसलूकी भी की। कॉल करने पर मौके पर 112 वाहन से पुलिस पहुंची। इसके बाद कर्मचारियों ने राहत ली।
निजी (व्हाइट) नंबर प्लेट पर चल रहा था अनुबंधित वाहन?:- हादसे के बाद रेल प्रशासन के क्रू ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मौके पर देखा गया कि रेलवे द्वारा अनुबंधित की गई कार कमर्शियल (पीली नंबर प्लेट) न होकर निजी (व्हाइट नंबर प्लेट) दिखाई दे रही थी।
नियमानुसार रेलवे या किसी भी संस्थान द्वारा निजी कार्यों अथवा कर्मचारियों के परिवहन के लिए कमर्शियल वाहनों का ही इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य है। यह अनुबंध के वक्त टेंडर में अनिवार्य शर्त में शामिल रहता है। जानकारों का कहना है कि यदि यह हादसा गंभीर रूप ले लेता या किसी कर्मचारी को अनहोनी का सामना करना पड़ता। तब निजी नंबर प्लेट होने के कारण बीमा क्लेम और मुआवजा राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया बेहद जटिल व पेचीदा हो सकती थी। महू से निमारखेड़ी तक क्रू को कार से भेजने में न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा दांव पर लगी है। बल्कि रेलवे को भी भारी वित्तीय और राजस्व का नुकसान हो रहा है। प्रशासन को इस व्यवस्था में तुरंत सुधार करना चाहिए।
कर्मचारियों ने उठाए सवाल: राजस्व और समय का हो रहा नुकसान:- इस घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन से जुड़े महू के पदाधिकारी ने बताया कि अपरिपक्व मैनेजमेंट के चलते पहले भी दो से तीन बार कर्मचारी दुर्घटना के शिकार हुए है। उन्होंने रतलाम रेल प्रशासन की कार्यशैली और क्रू मैनेजमेंट पर सवाल उठाते हुए दो मुख्य सुझाव दिए हैं
– खंडवा में तबादला: रतलाम रेल प्रशासन महू से लोको पायलटों को कार के जरिए निमारखेड़ी भेजता है। इसके बजाय कर्मचारियों का तबादला खंडवा किया जा सकता है। जिससे बार-बार लंबी दूरी के सड़क सफर का जोखिम न उठाना पड़े।
– जोनल हैंडओवर (WCR को हस्तांतरण): महज 30 किलोमीटर की इस रनिंग को पश्चिम रेलवे (WR) जोन के बजाय पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) को सौंपा जा सकता है।
मंडल मुख्यलय पर घोर अनदेखी:– रतलाम मंडल मुख्यालय, जहां डीआरएम, एडीआरएम सहित अन्य अधिकारियों का सीधा प्रबंधन दखल है। यहां सरकार को बगैर टेक्स चुकाए शासकीय प्रकिया के तहत अनुबंधित नॉन कमर्शियल वाहन धड़ल्ले से दौड़ाए जा रहे है। अधिकांश अनुबंध शुदा कार तथा अन्य वाहन यलो नंबर प्लेट के बजाय व्हाइट नबर प्लेट से चलाई जा रही है।
