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सिंहस्थ के काम के लगे चौके-छक्के, ‘आयुष भैया’ पहुंचे अहिल्या नगरी, भोले भंडारी को भी ले गए…, बिलों को ‘हरी झंडी’ दिखाने वाले विभाग में गूंजेगी सत्यनारायण भगवान की कथा….ऐसा पावर, शासकीय वाहन के व्यक्तिगत उपयोग? चर्चाओं का बाजार गर्म

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। चेयरमैन रेलवे बोर्ड (CRB) के सख्त निर्देश थे कि रतलाम रेल मंडल के महाकाल नगरी के महाकुंभ सिंहस्थ में डुबकी लगाने आने वालों की सुविधा के लिए विकास कार्यों को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए। ये अधिकांश काम इंजीनियरिंग विभाग को करना है। लेकिन विभाग के आयुष जी मैदान में चौके-छक्के का लुफ़्त उठाने में डूबे रहे।
दरअसल रतलाम रेल मंडल के प्रोजेक्ट से जुड़े काम में ढिलाई और अधूरेपन को देख पिछले दिनों सीआरबी का पारा सातवें आसमान पर था। खबर तो यह भी है कि नाराज सीआरबी ने इंजीनियरिंग विभाग के ‘आयुष जी’ को ‘असमन्वय’ का कड़ा अल्टीमेटम थमाते हुए पिछले पेंडिंग कामों का पूरा कच्चा-चिट्ठा मांग लिया था।
लेकिन साहब को हुक्मरानों की डांट-फटकार और फाइलों के बोझ की क्या परवाह थी। आयुष जी ने अल्टीमेटम को बाएं हाथ का खेल समझा। सीधे पहुंच गए अहिल्याबाई की नगरी भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 मैच का नजारा देखने। आयुष जी स्टेडियम की वीआईपी गैलरी (पैवेलियन के पास) में बैठकर चौके-छक्के का लुत्फ उठा रहे थे।
​सीआरबी या जीएम की फटकार दोबारा न सुननी पड़े। इसके लिए आयुष जी ने मैच से पहले ही एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला। वे मंडल के ‘भोले भंडारी’ बड़े साहब को भी अपने साथ ही खींच ले गए।
​अब बेचारे बड़े साहब को क्या पता कि आयुष जी ने कौन सी जादुई सेटिंग लगाकर यह वीआईपी टिकट हथियाया है! गनीमत है कि इनके सिपेसलार रतलामी ‘मोदी’ भी *गलाराम* के नमकीन व ‘त्रिमूर्ति’ आकर की मिठाई के पैकेट लेकर साथ जाने वाले थे। लेकिन आयुष जी ने इंकार कर दिया कि ये पैकेट मेरे केबिन में आकर दे जाया करो। अभी मेरे साथ बड़े साहब भी है। पैकेज बांटने पड़ेंगे।
दूसरी तरफ, रतलाम मंडल के उन छोटे कर्मचारियों का दिल जल रहा है जो क्रिकेट और बल्ले के सच्चे आशिक हैं। अपनी जेब से 1800 रुपए का टिकट व खाने-पीने का सामान खरीदकर गेंद व बल्ले का मैच देखने पहुंचे थे।
साहब लोग रविवार को ठीक दोपहर 3:00 बजे (यानी रेलवे समय 15:00 बजे) रतलाम से रवाना होकर शाम 7 यानी 19 बजे पहले मैदान पर प्रकट हुए।

वहां हालत यह थे कि बड़े साहब आयुष जी के माथे पर प्यार से हाथ फेरकर लगातार शाबाशी पर शाबाशी दे रहे थे। वरना, इसके पहले वाले साहब का पारा तो ऐसा गरम रहता था कि उनकी तिरछी नजर भर पड़ने पर ही आयुष जी दबंग फिल्म के ‘चुलबुल पांडे’ की तरह चेंबर के बाहर नाचने जैसे हालात में आ जाते थे!
हे प्रभ, जगन्नाथम। अब रेलवे के विकास कार्य पटरी पर दौड़ेंगे या फिर आयुष जी की कृपा से स्टेडियम में ही रन बनाएंगे। यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो मंडल में यही चर्चा है “काम हो या ना हो, मैच छूटना नहीं चाहिए!

बिलों को ‘हरी झंडी’ दिखाने वाले विभाग में गूंजेगी सत्यनारायण भगवान की कथा; चंदे का गणित भी एकदम फिट!:- कहते हैं कि रेलवे के लेख-जोड़ वाले विभाग में परिंदा भी बिना ‘ऑडिट’ के पर नहीं मार सकता। जो विभाग दिन-रात रुपयों-पैसों का हिसाब बैठाने, ठेकेदारों के बिलों की बारीकियां जांचने और गणित के जोड़-घटाव में सिर खपाने के लिए जुटा रहता है। उसी रतलाम रेल मंडल के वित्त वाले विभाग पर इन दिनों भक्ति का ऐसा खुमार चढ़ा है कि फाइलें भी ‘हरिमन नारायण नारायण’ कह उठी हैं।
​दरअसल त्योहारों (बोनस) का सीजन है। एक तरफ नवरात्रि की धूम मचने वाली है। दूसरी तरफ दिवाली की आहट….। ऐसे में रेलवे के इन ‘गणितज्ञों’ के अफसरों ने सोचा कि जब दिमाग थक जाए, तो प्रभु की शरण से बेहतर कोई रास्ता नहीं। फिर क्या था, धार्मिक इंजन पटरी पर दौड़ पड़ा और पूरे विभाग में भगवान सत्यनारायण का दरबार सजाने का फरमान जारी हो गया।
​विभागीय नोटिस बोर्ड से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक, एक बेहद आकर्षक और आदरयुक्त “सादर आमंत्रण” वायरल हो रहा है। आमंत्रण पत्र का अंदाज़ देखकर तो लगता है कि जैसे कोई सरकारी गजट नहीं, बल्कि भक्ति का रेलवे पास जारी कर दिया गया हो!
बकायदा आमंत्रण में पूजा का मुहूर्त 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार), सुबह ठीक 09 बजे तय किया गया। इस समय सेक्शन में सत्यनारायण भगवान का भव्य दरबार सजेगा। भक्ति के इस महा-आयोजन में कोई ‘फाइनेंशियल घाटा’ न हो, इसके लिए स्वेच्छिक अनुदान (चंदा) का फॉर्मूला भी निकाला गया है। कर्मचारियों को अपना श्रद्धा-अंशदान 13 अक्टूबर 2026 तक हर हाल में अपने वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी, पर्यवेक्षक या मंडल खजांची के पास जमा कराने की हिदायत दी गई है। किसी एक का नाम नहीं, बल्कि बैनर तले साफ लिखा है  “समस्त लेखा परिवार, रतलाम”। यानी भक्ति भी मिलकर होगी और पुण्य का बंटवारा भी बराबर!
हमेशा कागजी खानापूर्ति, ऑडिट आपत्तियों और फाइलों के अटकाव-भटकाव के लिए चर्चित रहने वाले इस विभाग के ‘भक्ति अवतार’ की चर्चा अब पूरे रेलवे मंडल में जोरों पर है।
अन्य विभागों और ठेकेदारों में यह चर्चा है कि भगवान सत्यनारायण का प्रसाद ग्रहण करने के बाद क्या लंबित पड़े बिलों पर ‘तथास्तु’ की मुहर भी उतनी ही तेजी से लगेगी?
​खैर, प्रभु जगन्नाथम। कर्मचारियों का मानना है कि काम के भारी-भरकम तनाव के बीच इस आयोजन से विभाग में सकारात्मक ऊर्जा आएगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि कथा के इस ‘पुण्य’ से रतलाम रेलवे की वित्तीय फाइलें कितनी रफ्तार से हरी झंडी पाती हैं

ऐसा पावर, शासकीय वाहन के व्यक्तिगत उपयोग? चर्चाओं का बाजार गर्म:- रेल इंजिन वाले ऑफिस में इन दिनों संसाधनों के कथित दुरुपयोग और नियमों को दरकिनार करने का एक मामला सुर्खी बना हुआ है। चर्चा है कि बिजली विभाग से जुड़े एक अफ़सर के उपयोग का शासकीय वाहन आम मैजिक या लोडिंग वाहन बना दिया गया है। जब जरूरत पड़ती है, इसका निजी कार्यों में उपयोग कर लेते है। कभी-कभी इसे लोडिंग वाहन भी बना देते है।
​ऑफिस के गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो इस शासकीय वाहन में हाल ही में रेल मंडल के बाहर अफ़सर के रिश्तेदार ठेकेदार की सामग्री ले जाते हुए देखा गया है। ठेकेदार के सामान के बॉक्स शासकीय वाहन की डिक्की में ढोकर दूसरे मंडल तक पहुंचा दिए गए। बेचारे ड्राइवर करें तो क्या? उन्हें तो हुक़्म पालन करना है।
बात सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि बीते दिनों अफ़सर ने अपने ‘पावर’ का उपयोग भी बखूबी किया। शासकीय वाहन में परिवार के सदस्यों को धार्मिक यात्रा कराने का भी लाभ दिया। एक करीबी रिश्तेदार (पिताजी) को उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन कराने गाड़ी ले गई। महाकाल नगरी की इस निजी यात्रा की तस्वीरें और जानकारी सार्वजनिक होने के बाद से ही रेल प्रशासन के महकमे में तरह-तरह की बातें शुरू हो चुकी हैं।
हे प्रभु, जगन्नाथम। कुछ अधिकारी तो फ़िल्मी हीरो ‘धर्मेंद्र’ की तरह बिंदास ही चल रहे है। नियमों के मुताबिक शासकीय वाहनों का आवंटन और उपयोग केवल प्रशासनिक व विभागीय कार्यों के लिए ही होता है। लेकिन निजी एवं धार्मिक भ्रमण और ठेकेदारों की सामग्री परिवहन के लिए शासकीय संसाधनों का प्रयोग करने के लिए धर्मेंद्र जैसा जिगरा हर किसी का नहीं होता है।

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