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टीएंडसीपी ने दिया अभिमत, हुरावली में बन सकेंगी दस मंजिला इमारतें

ग्वालियर। हुरावली में लगभग 150 करोड़ रुपये कीमत की 23 बीघा जमीन पर नगर निगम अब 10 मंजिल तक की इमारतें तैयार कर सकता है। मास्टर प्लान के प्रविधानों को देखते हुए नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) के अधिकारियों ने निगम को अपना अभिमत दे दिया है। इसके अनुसार यहां 30 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण करने के साथ ही 10 मीटर जगह मिनिमम ओपन स्पेस (एमओएस) के रूप में छोड़नी होगी। इसके अलावा जमीन के पिछले हिस्से में मौजूद नदी की संरचना से भी 30 मीटर की दूरी पर निर्माण करना होगा।

ऐसा करने पर नगर निगम को फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) का लाभ मिल जाएगा और यहां 10 मंजिल की ऊंचाई तक इमारतें तैयार हो सकेंगी। इसके अलावा व्यवसायिक काम्प्लेक्स या दुकानों सहित खेल काम्प्लेक्स के निर्माण को भी टीएंडसीपी ने हरी झंडी दे दी है। टीएंडसीपी से मिले अभिमत के आधार पर अब तीन हिस्सों में निर्माण कार्य कराया जाएगा। इसमें आवासीय, व्यवसायिक और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, स्वीमिंग पूल का निर्माण होगा। इसमें 50 प्रतिशत जमीन आवासीय व व्यवसायिक संपत्तियों के लिए और 50 प्रतिशत जमीन पर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स व स्वीमिंग पूल तैयार हो सकता है। टीएंडसीपी ने बताया है कि यहां ऊंचाई का कोई बंधन नहीं है। ऐसे में नगर निगम के अधिकारी हाइराइज यानी 10 मंजिल तक इमारतें तैयार कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा आर्मी एरिया से 100 मीटर छोड़कर निर्माण करना होगा। अब नगर निगम फाइनल डिजाइन तैयार कर यहां फ्लैटों और दुकानों की संख्या निर्धारित करेगा। इसके बाद बुकिंग शुरू की जाएगी। इस कार्य के लिए मार्च माह में ही बुकिंग की प्रक्रिया भी करने की तैयारी की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने माना नगर निगम का मालिकाना हक इस जमीन को सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निगम के मालिकाना हक की माना है। इसके लिए गत 13 फरवरी को दायर स्पेशल लीव पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। दरअसल, हुरावली स्थित सर्वे क्रमांक 4076 की 23 बीघा आठ बिस्वा भूमि को लेकर वर्ष 2005 में जनक सिंह सहित अन्य लोगों ने प्रथम अपील दायर की थी। उनकी ओर से तर्क दिया गया था कि वर्ष 1945 में उनके पूर्वजों को नगर निगम ने यह जमीन लीज पर खेती करने के लिए दी थी। वर्ष 1950 से इस जमीन पर उनके पूर्वज खेती करते थे। इस जमीन का उन्हें मालिक घोषित किया जाए, लेकिन हाईकोर्ट ने दिसंबर में इस जमीन को निगम की माना था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की गई थी।

स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के लिए खेलो इंडिया से मांगेंगे फंड

इंटरनेशनल स्वीमिंग पूल और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स के लिए खेलो इंडिया से 32 से 50 करोड़ रुपये का फंड मांगा जाएगा। ये प्रस्ताव पूर्व में निगम ने तैयार कर भोपाल भेज दिया था। अब इसके लिए दिल्ली स्थित खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय से संपर्क किया जाएगा, क्योंकि ग्वालियर में खेलो इंडिया के तहत आयोजित प्रतियोगिताओं का आयोजन सफल रहा है। ऐसे में खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स आवश्यक है। लोकेशन के लिहाज से स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स को खिलाड़ियों का अच्छा रिस्पांस मिलेगा, क्योंकि यह शहर का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स होगा। इसके अलावा आल वेदर स्वीमिंग पूल और आडिटोरियम का भी प्रविधान यहां किया जाएगा।

हुरावली में निगम को मिली जमीन पर आवासीय, व्यवसायिक और स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स तैयार कराया जा सकता है। यहां मास्टर प्लान के अनुसार ऊंचाई का कोई बंधन नहीं है। सिर्फ मुरार नदी से 30 मीटर दूर और सेना क्षेत्र से 100 मीटर छोड़कर निर्माण करना होगा।

वीके शर्मा, संयुक्त संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग

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