मक्सी-पीरउमरोद हादसा: कर्मचारियों के भारी आक्रोश के बाद GM ने दिए SAG स्तर की ‘मेजर जॉइंट इंक्वायरी’ के आदेश, ट्रैक मेंटेनेंस के बजाय कर्मचारियों पर फाइलों का बोझ
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। रतलाम मंडल के मक्सी-पीरउमरोद सेक्शन में ट्रैक मेंटेनेंस के दौरान गोवा एक्सप्रेस की चपेट में पुश ट्रॉली आने तथा काम में जुटे दो कर्मचारियों की मौत के बाद कर्मचारियों के आक्रोश ने भारतीय रेलवे के सिस्टम को हिला दिया। हादसे में कर्मचारी सीधे सेक्शन इंचार्ज इंजीनियर्स को दोषी मान रहे है। बढ़ते आक्रोश के बाद मामला पश्चिम रेलवे महाप्रबंधक सहित मंत्रालय तक पहुंचा। आखिरकार महाप्रबंधक द्वारा SAG स्तर के अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा Major Joint Enquiry के आदेश जारी किए गए हैं।
बता दें कि 16 अक्टूबर 2026 को
सेक्शन के किलोमीटर 100/6-8 डाउन लाइन में पुश ट्रॉली और ट्रेन संख्या 12780 गोवा एक्सप्रेस की चपेट में आने से दुखद हादसा हुआ। इसमें दो कर्मचारी भगवान सिंह बिलमा और दिलीप जायसवाल को जान गवानी पड़ी थी। तब से रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त था। जांच के आदेश के बाद अधिकारी भी नियुक्त किए गए है।
इधर, ट्रैक मेंटेनेंस से जुड़े कामों के लिए नियुक्त कर्मचारी से मंडल कार्यालय में अटैच किए जाने से मूल काम प्रभावित होने के भी आरोप लगाए जा रहे है।
कैडर उल्लंघन और अटैचमेंट को लेकर उठे गंभीर सवाल:- घटना के बाद इस सेक्शन के कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप और अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि सेक्शन में दो कर्मचारी जिनका ट्रॉलीमैन कैडर नहीं था। उनसे जबरन ट्रॉली पुशिंग का काम कराया जा रहा था। दूसरी ओर, ट्रॉलीमैन कैडर के कुछ कर्मचारियों को डीआरएम ऑफिस में सीनियर डीईएन (कोर्डिनेशन) पीयूष पांडेय के अधीन अलग-अलग सेक्शनों में अटैच कर उनसे सहायक और बाबूगिरी कराई जा रही है। सहायक बने कर्मचारियों को लेकर डीआरएम ऑफिस के इंजीनियर विभाग में काम की खींचतान को लेकर विवाद की स्थिति भी निर्मित हुई है।
इसके अलावा भी रेल संगठन द्वारा समय-समय पर आरोप लगाए गए कि भारतीय रेल की रीढ़ ट्रॉलीमैन व ट्रैकमैन कर्मचारी ही है। लेकिन सीनियर अफ़सर से लेकर एसएसई स्तर के अधिकारियों के बंगले पर इन कर्मचारियों से घरेलू काम लिए जा रहे है। इससे सेक्शनों में सेफ़्टी से जुड़ा मूल काम प्रभावित होने के साथ ही हादसे भी हो रहे है।
निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें सौपी जिम्मेदारी
– जाँच समिति के सदस्य: इस उच्चस्तरीय जाँच समिति में CTE, CFTM, CEE(Op) और ADRM(O)-RTM शामिल हैं। संरक्षा विभाग सहित संबंधित विभागों के उपयुक्त स्तर के मंडल अधिकारी इस SAG समिति का सहयोग करेंगे।
– जाँच रिपोर्ट की समय-सीमा: समिति के सबसे वरिष्ठ अधिकारी इसके अध्यक्ष होंगे। यह समिति दुर्घटना स्थल का दौरा करेगी। PCSO के माध्यम से 10 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सबमिट करने के साथ महाप्रबंधक को सौंपेगी।
यूनियनों और परिषद द्वारा भी निष्पक्ष जांच की मांग
–PRKP की निष्पक्ष जाँच की मांग:- पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद (PRKP) ने इस पूरे मामले को वेस्टर्न रेलवे मुख्यालय (चर्चगेट, मुंबई) के उच्च अधिकारियों Sec to GM, AGM, PCE, PCPO, PCSO, PCSC, SDGM तथा CVO के साथ-साथ मंडल के DRM (RTM), ADRM, Sr.DPO, Sr.DEN Co., Sr.DSC एवं Sr.DSO के समक्ष प्रमुखता से उठाया है। PRKP के ज़ोनल संगठन महामंत्री शिव लहरी शर्मा, ज़ोनल संयोजक आर. के. दीक्षित एवं ज़ोनल सचिव प्रशांत पांडे ने मांग की है कि इस दुखद हादसे की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो। ताकि पीड़ितों एवं उनके परिवारों को उचित न्याय मिल सके।
– वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन (WREU) के मंडल मंत्री मनोहर बारठ द्वारा घटना की उच्चस्तरीय जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
– वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ (WRMS) द्वारा मजदूर संघ के मंडल मंत्री अभिलाष नागर ने स्वयं बर्डियासोन पहुँचकर मृतक कर्मचारियों के परिजनों से मुलाकात की और संवेदना व्यक्त की।
