मक्सी-पीर उमरोद रेल हादसा: साथियों की दर्दनाक मौत से सदमे में रेलकर्मी, सिसकियों में बयां किया ख़ौफ़नाक मंजर, बोले- ”आंखों के सामने ही गया सब कुछ”
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। मक्सी–पीर उमरोद रेलवे सेक्शन में हुई दर्दनाक रेल दुर्घटना के बाद गैरजिम्मेदाराना रवैए के चलते ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा अभी थमा नहीं है। हादसे में अपनी जान गंवाने वाले दोनों रेल कर्मचारियों भगवान सिंह बिलमा और दिलीप जायसवाल के पैतृक गांव बर्डिया सोन में अभी भी वीरानी पसरी है। मृतकों के साथी कर्मचारियों का आरोप है कि अभी तक जांच के पते नहीं है। जबकि ऐसी दुर्घटना में सीआरएस इंक्वायरी होना चाहिए। मामले को दबाने के लिए उल्टा उन्हें फंसाने के लिए धमकाया जा रहा है। सोमवार को सभी साथी कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई को लेकर बेरछा हेडक्वार्टर पर धरना शुरू कर दिया है।
हालांकि दुर्घटना में शिकार कर्मचारियों के घर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी जरूर परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे। रेल संगठन से जुड़े लोग भी पहुंचे। लेकिन परिजनों और ग्रामीणों में सीपीडब्लूआई सत्यप्रकाश जैन व पीडब्लूआई मनोज वर्मा के प्रति गहरा आक्रोश है। उनका आरोप है कि घटना के बीत जाने के बाद भी ये इंचार्ज सुध लेने घर नहीं पहुंचे हैं। उल्टा हादसे के बाद एक सेक्शन इंजीनियरिंग इंचार्ज बगैर चोंट लगे ही अस्पताल में भर्ती हो गया था।

फ़ोटो- मृतक दिलीप जायसवाल।
बता दें कि मृतक दिलीप जायसवाल लार्जेस्ट स्कीम के तहत नौकरी पर लगे थे। वह टेरिटोरियल आर्मी के सदस्य भी थे। उनके पिता भी रेलवे में ट्रॉलीमैन रह चुके हैं। घटना के कारणों और लापरवाही से वे भलीभांति वाकिफ़ है।
सिसकियों में बयां, बचे कर्मचारियों रो-रोकर बुरा हाल:- घटना के तीन दिन बाद भी ख़ौफ़नाक मंजर को साथी कर्मचारी भूला नहीं पा रहे। बल्कि दिमाग से ही नहीं निकाल पा रहे है। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। न्यूज़ जंक्शन-18 से चर्चा में साथी कर्मचारी बात करते ही फुटकर-फुटकर रो पड़े। सिसकियों के बीच वे खुद से बिछड़ने व मृत साथियों के बच्चों व परिजनों की पीड़ा का दर्द बयां करते रहे। गले से निकल रही आवाज में रुंधन थी। उन्होंने कहा कि इंचार्ज से ट्रैक पर उस वक्त काम नहीं करने के लिए चेताया था। कहा था कि सर, इस लाइन पर गाड़ी आने वाली है। बावजूद उन पर काम के लिए दबाव बनाया गया। मेंटेनेंस के लिए ट्रैक पर ट्रॉली चढ़वा दी। ट्रॉली पुश करने के बाद यह स्पीड रोल हो गई।
तब अचानक सामने से गोवा एक्सप्रेस आ गई। सुरक्षा के लिहाज से फौरन ही ट्रॉली के ब्रेक लगाए। उसे समेटकर लाइन से उतारने की जल्दबाजी में दिलीप का पैर पहिए में फंस गया। वह बस हमसे इतना बोल पाया कि मेरा पैर फंस गया है। इतने में सामने से धधकती हुई ट्रेन आई और वे चपेट में आ गए। घटना के बाद दोनों इंचार्ज दूर जा निकले। ट्रेन रुकी तो हम भागते हुए ट्रेन के पास पहुंचे। यात्रियों से निवेदन कर उन्हें मौके पर बुलवाया। उनकी सहायता से जैसे-तैसे शरीर के कटे अंगों को एक ओर समेटा। बेरर्दी ऐसी रही कि एम्बुलेंस आने के बाद इंचार्ज ने शव को हाथ तक नहीं लगाया। अब उल्टा हमें बेरछा बुलवाया गया। धौंस डपट कर उन्हें फंसाने के प्रयास किए जा रहे है।
पूरा मामला और लापरवाही?
प्राथमिक तौर पर यह दुर्घटना रेलवे सिस्टम की गंभीर चूक और लापरवाही का परिणाम मानी जा रही है।
– बिना अनुमति के ट्रॉली संचालन?: ट्रैक पर ट्रॉली ले जाने से पहले निर्धारित अनुमति (एम्बुश/ब्लॉक) नहीं ली गई थी।
– अनुभवी और ट्रेकमैन कर्मचारियों की तैनाती: ट्रॉली पुशिंग के कार्य में ट्रॉलीमैन के बजाय दो ट्रेकमैन कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था।
– अचानक आई गोवा एक्सप्रेस: लंबे समय से ट्रॉली का काम संभाल रहे कर्मचारी जब अचानक आई गोवा एक्सप्रेस को देखकर ताबड़तोड़ ट्रॉली हटाने की कोशिश कर रहे थे। तभी वे इसकी चपेट में आ गए। वहीं। ड्यूटी पर तैनात जो अन्य ट्रेकमैन थे वे समय रहते दूर हट गए?
इन बिंदुओं पर हो रही निष्पक्ष जांच की मांग:- घटना की गंभीरता को देखते हुए रेलवे द्वारा उच्चस्तरीय जांच की जाएगी, लेकिन परिजन और ग्रामीण बिंदुवार पुख्ता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं:
1. क्या दोनों मृतकों सहित चारों कर्मचारी आधिकारिक तौर पर ट्रॉलीमैन कैडर के थे या नहीं?
2. जब चारों कर्मचारी ट्रॉलीमैन का काम कर रहे थे। तब उस दौरान इंचार्ज अधिकारी क्या कर रहे थे?
3. आखिर किसके आदेश पर और किसकी लापरवाही से बिना अनुमति के ट्रैक पर मेंटेनेंस का काम किया जा रहा था?
रेल संगठनों ने दी श्रद्धांजलि
इस दुखद हादसे के बाद विभिन्न रेलवे संगठनों द्वारा दिवंगत कर्मचारियों को श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।
– वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ: मंडल मंत्री अभिलाष नागर ने बर्डिया सोन पहुंचकर शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और ढांढस बंधाया। सोशल मीडिया पर सहायक मंडल मंत्री नरेंद्र सिंह सोलंकी सहित कार्यकर्ताओं व प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। दूसरी ओर वेस्टर्न रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के मंडल मंत्री मनोहर बारठ के नेतृत्व में श्रद्धांजलि दी गई।
मजदूर संघ मंडल मंत्री अभिलाष नागर, CWC शेख जमील ने दिवंगत कर्मचारियों के गृह ग्राम बर्डीया सोन स्थित निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीड़ित परिवारो से मुलाकात कर रेल प्रशासन से हर संभव सहयोग दिलवाने एवं दुर्घटना की निष्पक्ष जांच करवाने हेतु आश्वस्त किया। कहा कि दुःख की इस घड़ी में मजदूर संघ परिवार पीड़ित परिवार के साथ है। अनिल देवड़ा, निरंजन कुमार, तानाजी भगत एवं सीताराम हनोतिया ने भी उपस्थित होकर शोक संवेदना व्यक्त की।
– पश्चिम रेलवे कर्मचारी परिषद:संगठन की ओर से गांधीनगर स्थित पीआरकेपी (PRKP) कार्यालय में एक शोक सभा का आयोजन किया गया। पदाधिकारियों और सदस्यों ने कैंडल जलाकर दिवंगत रेलकर्मी भगवान सिंह बिलमा और दिलीप जायसवाल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मीडिया प्रभारी धीरज प्रजापति ने कहा कि मामले में जांच के लिए संगठन द्वारा रेल मंत्री को अवगत कराएगा। इस मौके पर जोनल संगठन मंत्री शिवलहरी शर्मा, डीआरयूसीसी मेंबर अनिल उपाध्याय, जोनल बॉडी के प्रशांत पांडे, मंडल मंत्री पुष्पेंद्र पराशर सहित कर्मचारी व पदाधिकारी मौजूद रहे।
