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कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप को मातृशोक…..धर्मपरायण एवं समाजसेवी श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप का निधन

न्यूज़ जंक्शन-18

​रतलाम। मध्यप्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप की माताजी, धर्मपरायण एवं समाजसेवी श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप (83) का रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को मुंबई में लंबी अस्वस्थता के बाद निधन हो गया। उनके निधन से काश्यप परिवार के साथ ही धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में शोक की लहर छा गई है।

​दिवंगत श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप की अंतिम यात्रा सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को प्रातः 10:30 बजे उनके निज निवास ‘वीसाजी मेंशन’, स्टेशन रोड, रतलाम से प्रस्थान करेगी।

​अदम्य साहस और संघर्ष से भरा जीवन:- श्रीमती तेजकुंवरबाई काश्यप का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्यप्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्व. चंपालालजी खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की प्रथम धर्मशाला ‘चंपा निवास’ का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमारजी काश्यप के साथ हुआ। वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद मात्र 21 वर्ष की कम उम्र में उन्होंने अटूट साहस और धैर्य का परिचय देते हुए परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने पुत्र चेतन्य काश्यप और पुत्री भावना मानावत का पालन-पोषण कर उन्हें उच्च संस्कार दिए और जीवनभर धर्म व जनसेवा को प्राथमिकता दी।

​धर्म, तपस्या और साधना में विशेष समर्पण:- उनका जीवन जैन धर्म की आराधना, तपस्या और साधना के प्रति समर्पित रहा। उन्होंने अपने जीवनकाल में दो वर्षीतप, एक मासक्षमण, नौ एवं आठ उपवास तथा बीस स्थानक ओलीजी जैसी कई कठिन तपस्याएं पूर्ण कीं। इसके साथ ही उन्होंने सम्मेद शिखरजी, पालिताना, गिरनार समेत देश-विदेश के अनेक जैन तीर्थों की यात्राएं कीं और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों में हमेशा सक्रिय रहीं।

​समाजसेवा और महिला सशक्तिकरण में अमूल्य योगदान:- सामाजिक कार्यों में उनका योगदान अत्यंत प्रेरणादायी रहा। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन द्वारा रतलाम में स्थापित ‘अहिंसा ग्राम’ में उन्होंने 100 जरूरतमंद परिवारों के पुनर्वास, स्वावलंबन और संस्कार निर्माण के कार्यों में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उन्होंने महिलाओं को सिलाई, बुनाई और अन्य कौशलों का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने और स्वसहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम योगदान दिया।

​मुंबई स्थित आदर्श मानव सेवा ट्रस्ट और आदर्श जैन हेल्थ सेंटर जैसी संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने जरूरतमंदों की चिकित्सा और सेवा में सहयोग दिया। इसके अलावा, उन्होंने पार्श्वनाथ महिला मंडल की स्थापना की और विभिन्न महिला मंडलों का नेतृत्व करते हुए महिलाओं को धर्म और समाजसेवा से जोड़ा।

​परिवार और शुभचिंतकों में शोक:- वे अपने पीछे पुत्र चेतन्य काश्यप, पुत्री भावना-शैलेन्द्र मानावत, पौत्र प्रसिद्ध युवा संगीतकार एवं उद्योगपति सिद्धार्थ काश्यप, श्रवण काश्यप तथा प्रपौत्र-प्रपौत्री समीक्षा व सारांश सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनकी सादगी, वात्सल्य और सेवाभावी जीवनशैली से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं।

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