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गड़बड़झाला वाले केटरिंग टेंडर….भोपाल मंडल में दस्तावेज रिजेक्ट, रतलाम मंडल में दे दी मंजूरी, जीएम व विजिलेंस तक पहुंची शिकायत

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। गलत दस्तावेज के आधार पर यात्रियों के लिए स्थापित खानपान स्टॉल आबंटन में अनियमितता रेलवे के जिम्मेदारों के गले की फांस बनने लगी है। मामले में एक आवेदक ने इसकी नामजद शिकायत विजिलेंस हेडक्वार्टर के अलावा पश्चिम रेलवे महाप्रबंधक तक को कर दी। अब विजिलेंस इस मामले में सक्रिय हुई है। दूसरी ओर गलत स्टाम्प के आधार पर टेंडर देने तथा लेनदेन को लेकर भी अलग से शिकायत की गई है। ऐसे मामले उजागर होने पर विभागों की टेंडर टेबलों पर भ्रष्टाचार लिप्तता की आशंका गहराने लगी है।
पहला मामला उज्जैन स्टेशन पर खानपान स्टॉल के टेंडर नंबर C45-GMU-4G-25 and C45-GMU-2G-25 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विजय जैन ने महाप्रबंधक तथा विजिलेंस मुंबई हेडक्वॉर्टर पर तथ्यात्मक शिकायत की है। जैन ने कहा कि यह टेंडर फर्म (पारस किराना एण्ड जनरल स्टोर ) को आबंटित किया गया है। उक्त फर्म ने इन्ही दस्तावेजों के आधार पर पहले भोपाल मंडल में टेंडर के लिए आवेदन किया था। जिसे वहां के प्रशासन द्वारा दस्तावेजों में कमी सहित फर्जीवाड़े की आशंका के चलते अस्वीकृत कर दिया था। आश्चर्यजनक पहलु है कि वही दस्तावेज जो भोपाल मंडल में अमान्य थे, उन्हें रतलाम मंडल में कैसे स्वीकार कर टेंडर आबंटित कर दिया गया। आशंका यह भी जताई गई कि केटरिंग टेंडर सेल के जिम्मेदार बाबुओं ने लेनदेन के चलते नियमों को ताक पर रखा गया है।
जैन के मुताबिक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 299 और रेलवे के टेंडर नियमों के अनुसार किसी भी अनुबंध में पारदर्शिता और दस्तावेजों की सत्यता अनिवार्य है। इसकी जांच की मांग की गई है। साथ ही भोपाल मंडल से उक्त फर्म की रिजेक्शन रिपोर्ट मंगवाई जाकर रतलाम मंडल में जमा दस्तावेजों से मिलान किया जाएं।
इधर, शिकायत के जवाब में विजिलेंस द्वारा जैन से जांच की बुनियाद तैयार करने और भी दस्तावेजों की मांग की गई है।

चित्तौड़ में गलत शपथ, फिर टेंडर निरस्त:- एक और अनियमितता चित्तौड़गढ़ स्टेशन पर उजागर हुई है। वहां एमपीएस यूनिट (मल्टीपल स्टोर) के आबंटन में भी केटरिंग टेंडर सेल को लेकर उंगलियां उठने लगी है। बताया जा रहा है कि देवेंद्र मिल्क पार्लर को जारी किए टेंडर के शपथ पत्र में गलत स्टाम्प स्वीकार कर लिए गए। हालांकि इस लिहाज से टेंडर निरस्त किया जाना था। शिकायतकर्ता देवेंद्र मिल्क पार्लर संचालक का कहना है कि बाबुओं ने टेंडर मंजूरी का झूठा दिलासा देकर अनुचित 15 हजार रुपए की मांग पूरी करवा ली गई। आपत्ति लेने पर राशि लौटाई तथा अंततः टेंडर निरस्त कर दिया गया।

आखिर ऐसी अनदेखी क्यों?:- विभाग द्वारा ऐसी अनदेखियों पर कार्रवाई न करना जिम्मेदारों के प्रति सवाल खड़े करते है। इसी विभाग में लैंड फ़ॉर जॉब की सीबीआई जांच में डिप्टी सीटीआई अनिल कुमार यादव का भी नाम सामने आया था। बावजूद यादव को फिलहाल महू में चेकिंग टीम का इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपना आम कर्मचारियों के समझ से परे है।

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