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रेलवे जीएम के राडार पर आए तीन अधिकारी…. सिंहस्थ प्रोजेक्ट में बरती लापरवाहीं, जीएम बोले-घर से दूर दाहोद जाओ, वहीं बैठकर करों टेंडरिंग के काम

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। उज्जैन सिंहस्थ-2028 सिर पर है। रेलवे को कुंभ से जुड़े तमाम काम तय मियाद में पूरे करने है। लेकिन रतलाम मंडल के रेल अधिकारी इसे हल्के में ले रहे थे। चेतावनी के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा टेंडरिंग के काम अटकाए गए। ऐसे में पश्चिम रेलवे जीएम विवेक कुमार गुप्ता ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए रेल मंडल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को रतलाम मुख्यालय यानी घर छोड़कर दाहोद जाने का फ़रमान जारी कर दिया। इस आदेश से सकते में आए रेल मंडल के अधिकारी ताबड़तोड़ दाहोद पहुंच गए। पिछले तीन दिन से ये सभी विभाग प्रमुख अपने स्टाफ के साथ दाहोद में बैठकर टेंडरिंग की प्रकिया में उलझें हुए है।
बता दें कि हर बार की तरह ही उज्जैन सिंहस्थ-2028 में रतलाम रेल मंडल प्रशासन की अहम भूमिका रहने वाली है। यहां अधिकारियों को मेला स्पेशल ट्रेन संचालन की प्लानिंग के अलावा मेला परिक्षेत्र के लिए विभिन्न कामों की टेंडरिंग से जुड़े कामों की तैयारियां करनी है।
इसी सिलसिले में टेंडर कमेटी (टीसी) की प्रकिया तय मियाद में पूरी करना थी। बताया जा रहा है कि इंजीनियरिंग विभाग द्वारा यह प्रकिया पूरी की। इसके बाद लेखा विभाग में आंकलन व मंजूरी के लिए भेजी गई। लेकिन लेखा विभाग में करीब एक माह से फाइल उलझाकर रखी। इसे आगे नहीं बढ़ाई गई। इधर, रेल मंत्रालय द्वारा पश्चिम रेलवे जीएम के माध्यम से नियमित प्रोग्रेस रिपोर्ट ली जा रही थी। लेकिन उन्हें इस काम मे कोताही बरतने की जानकारी मिली। तब उन्होंने टेंडर कमेटी में शामिल तीन वरिष्ठ अधिकारी सीनियर डीईएन (कोर्डिनेशन) पीयूष पांडेय, सीनियर डीएसटीई (कोर्डिनेशन) आरएस मीणा तथा सीनियर डीएफएम नूपुर चौधरी को आड़े हाथों लिया। तत्काल प्रभाव से इन्हें रतलाम छोड़कर दाहोद रवाना होने के निर्देश दिए गए। तीनों अधिकारी सोमवार से अपने तकनीकी स्टाफ के साथ दाहोद में टीसी की प्रकिया में जुटे हुए है। इस बीच कुछ मामलों में लेखा विभाग की तकनीकी खामियों को सुलझाने के लिए जीएम को मुंबई से एफए एंड सीईओ श्रीमती सुषमा तक को दाहोद भेजना पड़ा।

ऐसे होती है टीसी की प्रकिया:- रेलवे में टैंडर के मूल्य निर्धारण सहित पूर्व की तैयारियों के लिए विभागों द्वारा मूल्य निर्धारण व आंकलन की मशक्कत की जाती है। टेंडर कमेटी में शामिल तीन सदस्यों के फाइल पर हस्ताक्षर होते है। इसके बाद एडीआरएम को पेश कर टेंडर निकाले जाते है। सिंहस्थ की प्रकिया में टेंडर कमेटी में भी सीनियर डीईएन पांडे, सीनियर डीएसटीई मीणा तथा सीनियर डीएफएम सुश्री चौधरी शामिल थी। इसलिए जीएम ने लेटलतीफी के लिए इन्हें ही जिम्मेदार माना।

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