मालवा एक्सप्रेस के कोच मेंटेनेंस के वक्त 750 वोल्ट करंट से झुलसा इलेक्ट्रिक विभाग का कर्मचारी, प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश
(फोटो विचलित कर सकता है। इसलिए इसे ब्लर किया गया है)
-सीनियर डीईई (पॉवर) की कार्यप्रणाली पर सवाल…कम स्टाफ में कराया जा रहा जोखिमपूर्ण कार्य।
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। डॉ. अबेंडकर नगर (महू) में मालवा एक्सप्रेस के कोच मेंटेनेंस के दौरान इलेक्ट्रिक पावर विभाग का कर्मचारी करंट से बुरी तरह झुलस गया। इसे तुरंत इंदौर रैफर किया गया। वहां कर्मचारी का उपचार किया जा रहा है।
11 मार्च को रात में हुए हादसे ने विभागीय लापरवाही की पोल व कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए है। घटना के बाद डीआरएम अश्वनी कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान ही फोन पर सीनियर डीईई (पावर) लेफ्टिनेंट धर्मेंद्र कुमार प्रजापति पर नाराजी जताते आड़े हाथ लिया है।
जानकारी के अनुसार मालवा एक्सप्रेस के कोच मेंटेनेंस के दौरान कार्य कर रहे कर्मचारी निप्पू कुमार को अचानक 750 वोल्ट का करंट लग गया। जिससे उनके बाया हाथ में बुरी नजर झुलस गया। हाथ की नसें तक क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद साथी कर्मचारियों और सुपरवाइजरों ने की तत्काल इसे गेटवेल हॉस्पिटल, महू पहुंचाया। जहां कर्मचारी का प्राथमिक उपचार किया गया। स्थिति गंभीर होने पर आगे बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल, इंदौर रैफर किया गया। जहां रात लगभग 9 बजे से उनका पुख्ता इलाज शुरू हुआ। डॉक्टरों ने आशंका जताई कि हाथ मे गहरा घाव है। उपचार उपरांत हाथ पहले जैसा पूरी तरह ठीक होना मुश्किल हो सकता है।
13 कर्मचारियों का काम, मौके पर 5, 6 ही कर्मचारी:- इस घटना के बाद कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। दरअसल 750 वोल्ट लाइन पर कोच मेंटेनेंस जैसे जोखिमपूर्ण कार्य के लिए कम से कम 13 कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। लेकिन मौके पर केवल 5 से 6 कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों पर अत्यधिक मानसिक व शारीरिक कार्यभार पड़ रहा है। बल्कि सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी हो रही है। इतना ही नहीं प्रशिक्षुओं को भी काम में जुटाया दिया जाता है। जबकि उनका उद्देश्य केवल प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है। यह सीधे तौर पर प्रशिक्षु कर्मचारियों की जान से भी खिलवाड़ है।
मंडल कार्यालय में बाबूगिरी में जुटे तकनीक कर्मचारी:- इस मामले के बाद तकनीकी कर्मचारियों से मंडल कार्यालय में बाबूगिरी कराने की आवाज दोबारा मुखर होने लगी है। दरअसल फील्ड में स्टाफ की भारी कमी है। बावजूद कई तकनीकी कर्मचारियों को अभी भी मंडल कार्यालय में बाबूगिरी कराई जा रही है। पिछले दिनों पर्सनल विभाग ने ऐसे कर्मचारियों को फील्ड में भेजने का प्रयास भी किया था। बताया जा रहा कि वरिष्ठ अधिकारी अपनी मनमानी पर उतारू है। कुछ चुनिंदा कर्मचारियों को फील्ड के कठिन कार्यों से दूर रखा गया है। जबकि बाकी कर्मचारियों से कम स्टाफ में ही जोखिमपूर्ण काम के लिए मजबूर किया जा रहा है।
ऐसी में बैठकर फील्ड का आंकलन नामुमकिन:- कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा है कि जब फील्ड में कर्मचारी कम स्टाफ और भारी जोखिम के साथ काम कर रहे हैं। तब वरिष्ठ अधिकारी अधिकांश समय चेंबर में बैठकर फील्ड का आंकलन कैसे कर सकते है। अधिकारी स्वयं फील्ड की वास्तविक स्थिति को समझने और व्यवस्था सुधारने पर ध्यान देन जरूरी है। वर्तमान स्थिति में फील्ड के कर्मचारियों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
