NEWS FOLLOW-UP…..ट्रेन में पकड़े जाने पर दलाल ने फोन पर सीधे सीएमआई से बात की, तुरंत भर दिया जुर्माना
न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। भले ही रेलवे टिकिटिंग सिस्टम को पारदर्शी मानते हुए दलाल मुक्त व्यवस्था की बात कर रही है। लेकिन 2 अक्टूबर 2025 को ट्रेन में बिना वैध रियायती प्रमाण-पत्र के यात्रा करते हुए पकड़े गए विद्यार्थियों व इनके साथ मौजूद दलाल से जुर्माना भरवाने की कार्रवाई रेलवे के दावे को सिरे से खरिज करने के काफ़ी है। कार्रवाई को लेकर आमजन से लेकर रेल महकमे में चर्चाएं होने लगी है। इस मामले में नई बात निकलकर आ रही है कि ट्रेन में चेकिंग टीम ने विद्यार्थियों को पकड़ा। तब इनके साथ ट्रेन में मौजूद दलाल ने मंडल कार्यालय के कार्यरत सीएमआई से अपनी जान-पहचान होने की बात बताई। वह सीएमआई को जानता था। हालांकि फोन पर बात करने के बाद जुर्माना राशि भी जमा कर दी गई। लेकिन दलाल तथा सीएमआई के बीच संबंध उजागर होने से सवाल खड़े होने लगे है। सूत्र बता रहे हैं कि पश्चिम रेलवे मुख्यालय से विजिलेंस भी सक्रिय हो गई है। मामले की सच्चाई जानने जानकारियां खंगाली जा रही है।
बता दें कि 2 अक्टूबर को वाणिज्य विभाग की टीम द्वारा संख्या 22944 इंदौर-दौंड एक्सप्रेस में देवास से लोनावला तक 152 यात्रियों को बिना वैध रियायती प्रमाण-पत्र के यात्रा करते हुए पकड़ा था। तब इनके साथ मौजूद दलाल ऑर्गनाइजर से 1,17,040 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया था। लेकिन 3 अगस्त को 8.20 बजे जब देवास रिजर्वेशन ऑफिस से विद्यार्थियों के टिकिट बुक हुए थे। शंका होने पर रिजर्वेशन सुपरवाइजर ने सीधे मंडल अधिकारी को उसी वक्त अवगत करा दिया था। बावजूद उस समय कार्रवाई न करते हुए 2 माह बाद यात्रा वाले दिन कार्रवाई की गई।
सीएमआई का कैसे लिया नाम:- ट्रेन में कार्रवाई के दौरान यह बात उभरकर आई है कि दलाल की रेलवे सिस्टम में खासी घुसपैठ रही है। दरअसल चेकिंग टीम जब विद्यार्थियों से पूछताछ के बाद दलाल तक पहुंची। तब कपिल सोनी नामक व्यक्ति ने फोन पर सीधे मंडल कार्यालय में कार्यरत सीएमआई से बात की। सीएमआई से बात करने व उसके कहने पर दलाल जुर्माना राशि भरने के लिए सहज तैयार हो गया।
बता दें कि पूर्व में सीएमआई का नाम दशक पहले कार्यालयीन घोटाले में भी सामने आया था।
जुर्माना वसूली के बाद दलाल पर कार्रवाई को लेकर संशय:- ट्रेन में जुर्माना कार्रवाई के बाद दलाल पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी फिलहाल पर्दे में है। क्योंकि ऐसे दलाल पर आरपीएफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई करती है। यदि केवल जुर्माना भरवाकर इसे जाने दिया गया। तब आगे भी फर्जी टिकिट बुक किए जाने की आशंका बनी रहेगी। हालांकि प्रेस रिलीज जारी करते वक्त रेलवे पीआरओ ने बयान दिया था कि रियायती दर व वैध यात्रा प्रमाण पत्र के आधार पर रेलवे किराए में छूट देता है।।लेकिन अनियमितता पाई जाने पर कार्रवाई की जाती है।
