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रतलाम रेल मंडल: CCTS पदोन्नति सूची पर घमासान जारी; रिव्यू के बाद नई सूची से 12 और नाम जुड़े, फिर भी उठे सवाल

न्यूज़ जंक्शन-18
रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम रेल मंडल अंतर्गत कमर्शियल विभाग में ‘कमर्शियल क्लर्क कम ट्रैफिक सुपरवाइजर’ (CCTS) पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। गंभीर अनियमितताओं और वरिष्ठ कर्मचारियों को बाहर किए जाने के आरोपों के बाद रेलवे प्रशासन ने मंगलवार शाम को संशोधित रिव्यू सूची जारी की। इस नई सूची में 12 अन्य अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है, जिसके बाद चयनितों की कुल संख्या 69 से बढ़कर 81 हो गई है। हालांकि। इस रिव्यू पैनल के सामने आने के बाद भी धांधली और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं।

85 पद, 77 पास फिर भी 69 का ही चयन क्यों?:- ​विवाद की मुख्य वजह पहली सूची में पात्र उम्मीदवारों को बाहर करना रहा। प्रभावित कर्मचारियों का कहना था कि जब CCTS के लिए 85 पद स्वीकृत थे और लिखित परीक्षा में 77 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए थे। तब शुरुआती फाइनल पैनल में केवल 69 उम्मीदवारों को ही जगह क्यों दी गई? बाकी पात्र कर्मचारियों को बिना किसी ठोस वजह के प्रक्रिया से बाहर कर दिए जाने पर कर्मचारियों में भारी रोष था। इसे प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितता बताते हुए कर्मचारियों ने उच्च अधिकारियों को लिखित में शिकायत दर्ज कराई थी।

रिव्यू के बाद भी असंतोष, वरीयता के मानकों पर उठे सवाल:- मामला गरमाने पर रेलवे प्रशासन ने सूची की समीक्षा कर मंगलवार शाम नई सूची जारी की। इसमें 81 कर्मचारियों को शामिल तो कर लिया गया। लेकिन नया विवाद खड़ा हो गया। कर्मचारियों का आरोप है कि रिव्यू सूची तैयार करते समय केवल लिखित परीक्षा के अंकों को आधार बनाकर वरीयता तय कर दी गई। जबकि नियमानुसार कर्मचारियों की वरिष्ठता (सीनियरिटी) और अन्य सेवा मानकों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए था।

​स्पोर्ट्स कोटे की महिला कर्मचारी के चयन पर गहराया संदेह:- प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों ने एक अन्य मामले का हवाला भी दिया है। चर्चा है कि स्पोर्ट्स एक्टिविटी से जुड़ी एक महिला कर्मचारी, जिनकी नियमित ड्यूटी अवर्स बहुत सीमित हैं। विभाग में सीधी जिम्मेदारी नहीं के बराबर है। उन्होंने कठिन प्रश्नपत्र हल कर परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। इसे लेकर भी मंडल में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। ऐसे ही कुछ डीआरएम ऑफिस के कमर्शियल विभाग के अलग-अलग सेक्शन में कार्यरत कर्मचारियों के चयन को लेकर भी उंगलियां उठाई जा रही है।

​निष्पक्ष जांच और दोषी क्लर्क पर कार्रवाई की मांग:- नई रिव्यू सूची के बाद भी कर्मचारियों का असंतोष बरकरार है। कर्मचारियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है। साथ ही, इस लापरवाही और कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ‘डीलिंग क्लर्क’ व ढाई माह तक सूची रोकने वाले ‘क्लर्क’ खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का दबाव बनाया है। क्योंकि मामले में साठगांठ की पुख्ता आशंका जताई जा रही है। 

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